जावा डेवलपर की वायरल सोशल मीडिया पोस्ट; जानें कैसे 5 साल बाद भी बढ़ने के बजाय घट गई सैलरी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर एक जावा डेवलपर की पोस्ट बहुत तेजी से वायरल हो रही है. यह पोस्ट पूरे आईटी सेक्टर में बहस का एक नया मुद्दा बन गई है. पोस्ट में व्यक्ति ने अपनी आपबीती सुनाई है...

IT Employee Salary Reduced: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर एक जावा डेवलपर की पोस्ट बहुत तेजी से वायरल हो रही है. यह पोस्ट पूरे आईटी सेक्टर में बहस का एक नया मुद्दा बन गई है. पोस्ट में व्यक्ति ने अपनी आपबीती सुनाई है, जिसमें उसकी सैलरी लंबे समय तक काम करने के बाद बढ़ने के बजाय घट गई है.
पोस्ट के अनुसार टीसीएस में 5 साल से ज्यादा काम करने के बाद उसकी इन हैंड सैलरी लगातार घट रही है. आईए जानते हैं, आखिर इस पोस्ट को लेकर इतनी चर्चा क्यों हो रही है?
क्या है पूरा मामला?
मुंबई के एक युवक ने साल 2020 में टियर-3 कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में बतौर जावा डेवलपर नौकरी शुरू की थी. उस समय उसकी इन-हैंड सैलरी करीब 25 हजार रुपये थी. हैरानी की बात यह है कि जनवरी 2026 में, यानी करीब साढ़े पांच साल काम करने के बाद, उसकी टेक-होम सैलरी घटकर 22,800 रुपये रह गई है.
आमतौर पर देखा जाता है कि, आईटी सेक्टर में 5 साल का अनुभव होने पर वेतन में अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखने को मिलती है. लेकिन इस केस में सैलरी बढ़ने की बजाय कम हो गई. जिससे यह मामला चर्चा में आ गया है.
कर्मचारी ने खुद बताई इसकी वजह
कर्मचारी ने माना कि नौकरी के शुरुआती दौर में उसने कोडिंग स्किल्स और नई टेक्नोलॉजी सीखने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया. वह काम के साथ-साथ सरकारी नौकरी की तैयारी भी कर रहा था. जिसका असर उसके ऑफिस वर्क पर साफ दिखने लगा. समय के साथ प्रोजेक्ट्स में उसका प्रदर्शन कमजोर होता गया और उसे बार-बार 'C' और ‘D’ जैसी कम रेटिंग्स मिली.
आईटी सेक्टर में इन रेटिंग्स का मतलब होता है कि कर्मचारी तय मानकों पर खरा नहीं उतर पा रहा है. इसी वजह से कंपनी ने उसे परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान (PIP) में डाल दिया. भले ही उसकी नौकरी बच गई, लेकिन इसके बाद उसकी सैलरी बढ़ोतरी और अप्रेजल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई.
ऐसे कम हुई सैलरी
जब किसी कर्मचारी की परफॉर्मेंस रेटिंग नीचे जाती है, तो सबसे पहले इसका असर उसके वेरिएबल पे पर पड़ता है. कंपनी प्रदर्शन के हिसाब से वेरिएबल में कटौत कर लेती है. युवक के मामले में भी यही हुआ हो सकता है.
वहीं समय के साथ-साथ टैक्स नियमों में बदलाव और प्रोविडेंट फंड (पीएफ) जैसी अनिवार्य कटौतियां बढ़ने लगती है. अगर बेसिक सैलरी में कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही हो और डिडक्शन लगातार बढ़ रहे हों, तो इन-हैंड सैलरी कम होना लाजमी है.
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Source: IOCL























