भारत का इन्फ्लुएंसर मार्केट 10,000 करोड़ के पार! छोटे क्रिएटर बने नए पावर प्लेयर्स, एक रील से लाखों की कमाई
डिजिटल दुनिया की बढ़ती रफ्तार के बीच भारत का इन्फ्लुएंसर मार्केट भी बहुत तेजी से ग्रो कर रहा है. एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का इन्फ्लुएंसर मार्केट 10 हजार करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है..

Influencer Marketing India: डिजिटल दुनिया की बढ़ती रफ्तार के बीच भारत का इन्फ्लुएंसर मार्केट भी बहुत तेजी से ग्रो कर रहा है. फास्ट इंटरनेट और मोबाइल तक आम लोगों की पहुंच ने उन्हें एक ऐसा प्लेटफॉर्म दिया है, जहां वे अपना टैलेंट दिखा रहे हैं.
जिससे वे ना सिर्फ पॉपुलर हो रहे हैं, बल्कि पैसे कमाने का एक जरिया भी बना रहे हैं. आज एक रील और वीडियो पोस्ट के लिए कंपनियां इन्फ्लुएंसरों को लाखों रुपये तक पे करने को तैयार हैं. इंडिया टीवी में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का इन्फ्लुएंसर मार्केट 10 हजार करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है....
10,000 हजार करोड़ का इन्फ्लुएंसर मार्केट
इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग SaaS प्लेटफॉर्म KlugKlug से मिली जानकारी के अनुसार, भारत में इस वक्त 10,000 हजार करोड़ का इन्फ्लुएंसर मार्केट हैं. हालांकि, अब तक इसका आंकड़ा 3 से 4 हजार करोड़ रुपये बताया जा रहा था. KlugKlug ने इसे 10 हजार करोड़ रुपये का बताया है.
छोटे क्रिएटर, बड़ा असर
माइक्रो और नैनो इन्फ्लुएंसर अब ब्रांड्स के लिए ज्यादा उपयोगी बनते जा रहे हैं. KlugKlug की रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही बड़े इन्फ्लुएंसर ज्यादा फेमस हों, लेकिन ग्राहकों पर छोटे क्रिएटर्स का असर भी काफी है. जिसकी वजह से ब्रांड्स आसानी से और प्रभावी तरीके से अपने ग्राहकों तक पहुंच बना पा रहे हैं.
कंपनियां सीधे क्रिएटर से कर रही डील
बहुत से कंपनियां अब सीधे इन्फ्लुएंसर से ही डील करने लगी हैं. जिसके कारण पैसों का सही ट्रैक नहीं मिल पाता है. रिपोर्ट में बताया गया कि, 75 फीसदी पैसा ब्रांड्स और इन्फ्लुएंसर्स के बीच सीधे डील में खर्च हो रहा है. इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के तहत खर्च होने वाला 25 प्रतिशत पैसा ही एजेंसियों के चेन से होकर गुजरता हैं. जिसकी सही जानकारी मिल पाती है.
विज्ञापन का बदल रहा है ट्रेंड
रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार बहुत से D2C ब्रांड्स हर साल 20 करोड़ रुपये से ज्यादा इनहाउस क्रिएटिव टीम पर खर्च कर रही हैं. कंपनियां खुद की टीम से ही वीडियो, रील और कंटेंट बनवा रही हैं. जिससे ऐड एजेंसियों पर निर्भरता कम हुई है. यह इस बात का साफ संकेत है कि, विज्ञापन के पुराने तरीकों में बहुत तेजी से बदलाव आ रहा है.
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