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Gold Import Duty: सरकार के इस एक फैसले से फीकी पड़ी सोने की चमक, 70% तक घटी खरीदारी, बाजार में हलचल

Gold Import Duty: सोने का बढ़ता दाम और अब बढ़ती आयात ड्यूटी ने इसकी चमक फिलहाल फीकी कर दी है. मांग में 70% तक की गिरावट बताती है कि उपभोक्ता अब खर्च करने से पहले कई बार सोच रहे हैं.

Gold Import Duty: भारत में सोने की खरीदारी को बड़ा झटका लगा है. हाल ही में सरकार द्वारा सोने पर आयात शुल्क बढ़ाने के बाद देशभर में इसकी मांग में करीब 70% तक गिरावट दर्ज की गई है. ज्वेलर्स और बुलियन कारोबारियों का कहना है कि बढ़ी हुई ड्यूटी, महंगाई और कमजोर उपभोक्ता मांग के कारण लोग नया सोना खरीदने से बच रहे हैं.  भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है. ऐसे में मांग में इतनी बड़ी गिरावट को बाजार के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है.

सरकार के किस फैसले से बदला पूरा खेल?

सरकार ने मई में सोने पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया. इस फैसले का मकसद सोने के आयात को कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाना बताया गया. लेकिन इसका सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ा और घरेलू बाजार में सोना पहले से ज्यादा महंगा हो गया. ड्यूटी बढ़ने के बाद सोने पर कुल टैक्स बोझ काफी बढ़ गया है, जिससे खरीदारों की दिलचस्पी कम होती दिख रही है.

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25 टन से घटकर 7.5 टन रह गई मांग

उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, 27 मई को समाप्त हुए पखवाड़े में देश की सोने की मांग घटकर करीब 7.5 टन रह गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह लगभग 25 टन थी. यानी खरीदारी में भारी गिरावट दर्ज की गई है. इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि ड्यूटी बढ़ने के बाद बाजार में मांग लगभग 70% तक घट गई है. 

कौन है जिम्मेदार?

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सोने की मांग में गिरावट के पीछे सिर्फ आयात शुल्क बढ़ना ही वजह नहीं है. पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, खाद्य महंगाई और घरेलू बजट पर बढ़ता दबाव भी लोगों को सोना खरीदने से रोक रहा है. जब परिवारों का बड़ा हिस्सा जरूरी खर्चों में जाने लगे तो लोग सोने जैसी बड़ी खरीदारी को टालना पसंद करते हैं. यही वजह है कि बाजार में ग्राहकों की संख्या कम होती दिखाई दे रही है.

हल्के गहने की मांग

ज्वेलर्स के अनुसार ग्राहक अब भारी और महंगे गहनों की जगह हल्के वजन की ज्वेलरी खरीद रहे हैं. कई लोग अपने पुराने गहने बेचकर नकदी जुटा रहे हैं, जबकि नए गहनों की खरीदारी को टाल रहे हैं. दक्षिण भारत समेत कई बड़े बाजारों में ग्राहकों का रुझान कम कीमत वाले और हल्के आभूषणों की तरफ बढ़ा है.

किसपर हो रहा है सबसे ज्यादा असर?

सोने की मांग में आई इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर छोटे और स्थानीय ज्वेलर्स पर पड़ा है. बड़े ब्रांड्स के पास स्टॉक और मजबूत ग्राहक आधार होने के कारण वे कुछ हद तक स्थिति संभाल पा रहे हैं, लेकिन छोटे कारोबारियों के लिए बिक्री में गिरावट बड़ी चुनौती बन गई है. बुलियन कारोबारियों का यह भी मानना है कि ज्यादा ड्यूटी से तस्करी बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है, क्योंकि वैध और अवैध बाजार के बीच कीमत का अंतर बढ़ गया है. 

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आगे क्या कहता है अनुमान?

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का अनुमान है कि आयात शुल्क बढ़ने के कारण 2026 में भारत की सोने की मांग 50-60 टन तक कम हो सकती है. यह पिछले साल के मुकाबले करीब 10% की गिरावट होगी. अगर सोने की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और महंगाई का दबाव जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में भी बाजार में सुस्ती बनी रह सकती है.

About the author सृष्टि

'एबीपी नेटवर्क' में सीनियर कॉपी-एडिटर के तौर पर काम कर रहीं सृष्टि का डिजिटल मीडिया में 4 सालों से अधिक का अनुभव है.बिजनेस, एंटरटेनमेंट, धर्म, लाइफस्टाइल और यात्रा सेक्शन में लेखन, इंटरव्यू और विश्लेषण इनकी विशेषज्ञता है.सीसीएसयू से मास कम्युनिकेशन में स्नातक कर चुकीं सृष्टि ने अपने करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स के साथ की थी, जिसके बाद वो 2.5 साल तक टाइम्स नाउ नवभारत का हिस्सा भी रहीं.फाइनेंस के साथ फिल्मी कीड़ा होना न केवल इनका पेशा बल्कि हिस्सा है.

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