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Divestment: पूरा हुआ टारगेट! विनिवेश और एसेट की बिक्री से खजाने में आया इतना फंड

Govt Finances: केंद्र सरकार पिछले 5 सालों से लगातार विनिवेश के लक्ष्य को हासिल करने से चूक जा रही है. इस बार भी सरकार ने हालिया बजट में लक्ष्य में बदलाव किया था...

सरकार ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान विनिवेश और संपत्तियों की बिक्री से राजस्व जुटाने के संशोधित लक्ष्य को हासिल कर लिया. इन दोनों स्रोतों को मिलाकर सरकार बीते वित्त वर्ष में 30 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा जुटा पाने में कामयाब रही.

विनिवेश से आए इतने हजार करोड़

ईटी की एक रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि 31 मार्च 2024 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में विनिवेश और संपत्तियों की बिक्री से सरकार ने 30 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा जुटा लिया. सरकार को विनिवेश से 16,507 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि एसेट सेल से लगभग 16 हजार करोड़ रुपये का राजस्व आया. इस तरह सरकार को दोनों स्रोतों को मिलाकर 32,500 करोड़ रुपये से ज्यादा मिले, जबकि संशोधित लक्ष्य 30 हजार करोड़ रुपये का था.

इस बजट में किया गया ये बदलाव

विनिवेश और एसेट सेल को बजट में अलग-अलग कैटेगरी में रखा जाता रहा है. हालांकि अब इसमें बदलाव हो चुका है. वित्त वर्ष 2024-25 के लिए फरवरी में पेश अंतरिम बजट में दोनों को एक साथ मिला दिया गया और मिसलेनियस कैपिटल रिसीट कैटेगरी में डाल दिया गया. बजट में वित्त वर्ष 2023-24 के लिए 30 हजार करोड़ रुपये का संशोधित अनुमान रखा गया था. वित्त वर्ष 2024-25 में इन स्रोतों से 50 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया गया है.

पहले तय किया था इतने का टारगेट

यह बदलाव इस कारण अहम हो जाता है कि सरकार लगातार कई वित्त वर्ष से विनिवेश का लक्ष्य पाने से चूक रही है. पिछले वित्त वर्ष के लिए ही पहले सरकार ने विनिवेश के माध्यम से 51 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया था. दूसरी ओर सरकार विनिवेश से सिर्फ 16,500 करोड़ रुपये ही जुटा पाई. आईडीबीआई बैंक के विनिवेश को सरकार नए वित्त वर्ष के टालने पर बाध्य हो गई.

लगातार लक्ष्य से चूक रही सरकार

पिछले 3 दशकों में ऐसा सिर्फ 6 बार हो पाया है, जब सरकार ने विनिवेश के लक्ष्य को हासिल किया है. आखिरी बार सरकार ने 2017-18 और 2018-19 में विनिवेश के लक्ष्य को हासिल किया था. वित्त वर्ष 2017-18 में सरकार ने विनिवेश से 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व जुटाया था, जबकि लक्ष्य सिर्फ 72,500 करोड़ रुपये का रखा गया था. वहीं 2018-19 में सरकार ने 80 हजार करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 94,700 करोड़ रुपये जुटाने में सफलता हासिल की थी.

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