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1 अप्रैल से लागू हुई E-Way बिल व्यवस्थाः जानें क्या है ये और क्यों है जरूरी

दरअसल, ई-वे बिल या इलेक्ट्रोनिक बिल एक तरह का परमिट है जो ये जानकारी देता है कि तय कीमत का माल पूरी तरह से कर चुकाने के बाद एक जगह से दूसरे जगह पर कानूनी तरीक से ले जाया जा रहा है.

नई दिल्लीः पूरे देश को एक बाजार बनाने वाली कर व्यवस्था वस्तु व सेवा कर यानी जीएसटी में कर चोरी रोकने के लिए ई वे बिल यानी इलेक्ट्रोनिक बिल व्यवस्था की शुरुआत की गयी है. जमीन, आसमान या पानी, किसी भी रास्ते से एक राज्य से दूसरे राज्य में 50 हजार रुपये या उससे ज्यादा का माल लाने-ले जाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक यानी ई वे बिल पहली अप्रैल से जरुरी कर दिया गया है.

आप आप कहेंगे कि आखिरकार ये ई वे बिल क्या बला है. दरअसल, ये एक तरह का परमिट है जो ये जानकारी देता है कि तय कीमत का माल पूरी तरह से कर चुकाने के बाद एक जगह से दूसरे जगह पर कानूनी तरीक से ले जाया जा रहा है. अभी ये व्यवस्था दो राज्यों के बीच शुरु की गयी है, जबकि कुछ दिनों बाद चरणबद्ध तरीके से राज्यों के बीच एक जगह से दूसरे जगह के बीच सामान लाने-ले जाने के मामले में इस्तेमाल होगा. e-way बिल को कुछ हद तक पुराने समय के सी फॉर्म के तौर पर देखा जा सकता है. सी फॉर्म राज्यों के बीच कारोबार के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन उसमे भारी गड़बड़ी होती रही और एक ही सी फॉर्म पर कई बार सामान इधर से ऊधर कर टैक्स की चोरी की गयी. लेकिन ई वे बिल के साथ ये मुमिकन नही. इसका इस्तेमाल एक ही बार हो सकेगा.

वित्त मंत्रालय के मुताबिक, पहली अप्रैल तक

  • कुल मिलकार 10.96 लाख करदाताओं ने ई वे बिल पोर्टल (https://ewaybillgst.gov.in) पर रजिस्ट्रेशन कराया है.
  • 19,796 ट्रांसपोर्टर ने भी रजिस्ट्रेशन कराया है, हालांकि ये लोग जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड नहीं हैं.
  • मध्यरात्रि 12 बजे से शाम 5 बजे के बीच 1.71 लाख से भी ज्यादा ई वे बिल जारी किया गए.

मंत्रालय ने ये भी जानकारी दी है कि

  • ई वे बिल के लिए आपके पास कंप्यूटर, लैपटॉप या टैबलेट होना ही जरुरी नहीं, ये एट्रांयड सिस्टम आधारित मोबाइल फोन पर एप के जरिए जारी किया जा सकता है.
  • ये एसएमएस के रुप में भी हो सकता है.
  • साथ ही यदि एक ट्रक पर कई कंसाइनमेंट हैं तो कंसोलिडेटेड ई वे बिल भी जारी किया ज सकता है
  • बिल जारी होने के 24 घंटे बाद जारी करने वाला रद्द कर सकता है.

ई वे बिल की कुछ और खास बातें इस तरह हैं-

  • ई वे बिल जारी करने वाले के लिए जीएसटी पोर्टल यानी जीएसटीएन पर रजिट्रेशन कराना जरुरी है. गैर रजिस्टर्ड ट्रांसपोर्टर्र को https://ewaybillgst.gov.in पर पंजीकृत होना जरूरी है.
  • ई बिल जारी करने के लिए कर की अदायगी, डिलीवरी चालान, ट्रांसपोर्टर्स के पहचान पत्र के साथ वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर होना जरुरी है.
  • गौर करने की बात ये है कि एक बार जारी करने के बाद ई वे बिल में फेरबदल नहीं किया जा सकता है. इसकी जगह इसे रद्द करना होगा और नया ई वे बिल जारी करना होगा.
  • अगर कारोबारी जीएसटी पोर्टल पर रजिस्टर्ड नहीं है और उसे अपना माल दूसरे राज्य में भेजना है तो यहां पर ट्रांसपोर्टर उसकी तरफ से ई वे बिल तैयार कर सकता है.
  • ई वे बिल जारी होने के समय से प्रत्येक 100 किलोमीटर के लिए 1 दिन तक वैध होगा
  • अगर किसी वजह से ट्रक को आधे घंटे से ज्यादा समय के लिए रोक लिया जाता है तो ट्रांसपोर्टर इसकी जानकारी ई वे बिल पोर्टल पर दे सकता है.
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