6000 के ब्रांडेड शूज का 1 महीने में उखड़ा सोल, कोर्ट ने ठोका इतना जुर्माना, सिर पकड़ बैठ गई कंपनी
Product Defect: चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग ने खराब रनिंग शूज़ मामले में ASICS India को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए ग्राहक को मुआवजे के रूप में 10,000 रुपये अतिरिक्त देने का आदेश दिया.

ASICS Shoes Case: अगर आप भी किसी बड़े और भरोसेमंद ब्रांड के जूते इस उम्मीद से खरीदते हैं कि यह बेहतर क्वॉलिटी का होगा और काफी लंबे समय तक चल सकता है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. हाल ही में चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने रनिंग शूज़ से जुड़ी एक शिकायत पर सुनवाई करते हुए स्पोर्ट्स फुटवियर कंपनी ASICS India को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार को दोषी मानते हुए 10,000 रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने का हुक्म सुनाया है.
क्या है पूरा मामला?
अजय मलिक नाम के एक ग्राहक ने महंगे ब्रांड की एक जूते की खरीदारी की, लेकिन सिर्फ एक महीने के अंदर ही उन्हें दौड़ने और चलने के दौरान परेशानी महसूस होने लगी. जांच के दौरान उन्हें पता चला कि जूतों का सोल एड़ी और किनारों से अलग हो चुका था, इसस वजह से उन्हें इस्तेमाल करने में काफी दिक्कतें हो रही थी. इसके बाद अजय मलिक जूते लेकर स्टोर पहुंचे, जहां शुरुआत में उनका क्लेम स्वीकार कर लिया गया.
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लेकिन वही मॉडल उनके पास न रहने की वजह से उन्हें दूसरे जूते चुनने के लिए कहा गया और एक्सचेंज फॉर्म पर साइन भी कराए. हालांकि, बाद में कंपनी ने जूते बदलने या पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया और सिर्फ क्रेडिट वाउचर देने की बात कही. वहीं दूसरी तरफ कंपनी ने अदालत के सामने खुद का बचाव करते हुए कहा कि जूतों में कोई खराबी नहीं था.
आयोग ने क्यों सुनाया ग्राहक के पक्ष में फैसला?
कोर्ट ने सारी बातें सुनने के बाद कहा कि अगर आपके जूतों में कोई खराबी नहीं थी तो कंपनी ने क्लेम स्वीकार क्यों किया और एक्सचेंज फॉर्म पर साइन क्यों कराया. इसके अलावा उन्होंने कहा कि जब कोई ग्राहक किसी महंगे ब्रांड के लिए अच्छी-खासी रकम खर्च करता है, तो उसे अच्छी क्वॉलिटी की उम्मीद होती है. ऐसे में महज एक महीने में जूतों का खराब होना कंपनी की लापरवाही को दर्शाता है.
क्या है अदालत का आखरी फैसला?
कोर्ट ने कंपनी को आदेश दिया कि वह ग्राहक को जूतों की पूरी खरीद कीमत 6,499 रुपये वापस करे. इसके अलावा खरीद की तारीख से 6% सालाना ब्याज भी अदा किया जाएगा. साथ ही कोर्ट ने मानसिक परेशानी और कानूनी कारवाई में हुए खर्च को देखते हुए ग्राहक को 10,000 रुपये अतिरिक्त मुआवजे देने का आदेश दिया है. इसके बाद उन्होंने कहा कि यह पूरी रकम कंपनी को 60 दिनों के भीतर ग्राहक को पेमेंट करनी होगी.
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