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आज का सूर्यग्रहण भारत में नहीं दिखा लेकिन था बेहद खास, ग्रहों की चाल बता रही 100 वर्षों बाद लगा ऐसा ग्रहण

आज का सूर्यग्रहण बहुत खास बताया गया, हालांकि भारत में दृश्य (विजिबल) नहीं था. यह इस साल का पहला सूर्यग्रहण था जो सिंगापुर, थाईलैंड, ताइवान, मलेशिया, फिजी, जापान, कंबोडिया, चीन, अमेरिका, इंडोनेशिया इत्यादि देशों में दिखाई दिया. हालांकि, यह ग्रहण इस मायने में खास है कि इस साल ऐसे दो ही और ग्रहण लगने वाले हैं. चूंकि यह भारत में विजिबल ही नहीं है तो जो भी इससे संबंधित सूतक का लगना या उससे जुड़ा हुआ दान-पूजा वगैरह है, वह जरूरी नहीं कि यहां किया ही जाए. 

ग्रहण महत्वपूर्ण खगोलीय घटना

जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं तो ग्रहण होता है. एक सीध में आ जाने से दरअसल पृथ्वी पर सूर्य की किरणें नहीं पहुंचती हैं. आज का सूर्यग्रहण सुबह 7 बजकर चार मिनट से शुरू हुआ है और 12 बजकर 29 मिनट पर खत्म हुआ है. तकरीबन साढ़े 5 घंटे का यह ग्रहण रहा है. सूर्यग्रहण तीन प्रकार के होते हैं- आंशिक, जिसमें पृथ्वी पर आंशिक ही अंधेरा होता है, पूर्ण सूर्यग्रहण में पृथ्वी पर सूर्य की किरणें आनी पूरी तरह बंद हो जाती हैं और ग्रहण का यह प्रकार महत्वूपूर्ण माना जाता है. इसी तरह तीसरा एक ग्रहण होता है- कुंडलाकार. इसमें ऐसा प्रतीत होता है मानो सूर्य के चारों तरफ कुंडली बनी हो. आज के ग्रहण में ये तीनों ही प्रकार हैं. ऐसा ग्रहण 100 वर्षों के बाद लग रहा है, लेकिन चूंकि यह भारत में दृश्य नहीं है इसलिे इसमें सूतक नहीं लगेगा. सूतक अगर लगना है तो 12 घंटे पहले लग जाता है. इसलिए, ग्रहण का जो प्रभाव आम तौर पर पड़ता है, वह तो खगोलीय दृष्टि से घटित होगा ही, लेकिन उसके लिए आम तौर जो पूजा या दान किया जाता है, वह जरूरी नहीं है. आज का ग्रहण चीन, सिंगापुर, ताइवान, थाइलैंड, मलेशिया जैसे देशों में पड़ेगा. 

ग्रहों का मानवीय जीवन से गहरा संबंध

सूर्य ग्रहों के राजा हैं. वह आत्मा का प्रतिनिधित्व करते हैं. तो, किसी भी तरह की जो ग्रहीय हलचल होती है, उसका प्रभाव उन पर भले न पड़े, बाकी जीवों पर तो पड़ेगा ही. वैसे, जो सूर्य से संबंधित राशियां हैं, वे ऊर्जा से प्रभावित होती हैं. इसको आप ऐसे समझिए कि ग्रहों की जो स्थिति है, वह एक बड़े डिजाइन का हिस्सा हैं और हम सभी लोग भी उसी डिजाइन का एक पुर्जा हैं, तो ग्रहों की चाल हमारे जीवन को भला कैसे नहीं प्रभावित करेगी? फिलहाल, सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में हैं. मेष राशि वालों पर इसका अच्छा या बुरा प्रभाव पड़ेगा. हृदय रोग वालों की दिक्कतें बढ़ेंगी. वृश्चिक और मीन जैसी सूर्य से प्रभावित होनेवाली राशियों पर भी काफी प्रभाव पड़ेगा. आनेवाले समय में इसका काफी असर सूर्याधारित ग्रहों पर पड़ेगा. 

हालांकि, इस सूर्यग्रहण से बहुत डरने वाली बात नहीं है, क्योंकि यह भारत में दृश्य नहीं है. हां, ये जरूर है कि एक तो यह काफी वर्षों बाद ऐसा हो रहा है, दूजे इसमें तीनों आकृतियां दिखाई पड़ेंगी तो इसके लिए सामान्य जो भी पूजा-पाठ करना चाहिए, इतना काफी है. बाकी, तो खगोलीय परिघटना को समझने के लिए पहले ये समझना पड़ेगा कि ग्रहों का मतलब क्या है, उनकी युति क्या है और उनकी चाल का क्या अर्थ होता है? सूर्य आत्मा हैं, राजा हैं तो चंद्रमा मन हैं. पंडित लोग कहते भी हैं- चंद्रमा मनसो जातः, मंगल जो है वह पराक्रम है, आपके शरीर में बनने वाला रुधिर है. बुध पृथ्वी तत्व हैं और वह बुद्धि के कारक हैं. गुरु यानी बृहस्पति ज्ञान के कारक हैं, शुक्र जीवन के कारक हैं यानी जितनी भी जागतिक चीजें हैं, उससे संबंधित हैं, शनि जनजीवन को रिप्रजेंट करते हैं, वृद्धावस्था को, दीन-दुखियों को रिप्रजेंट करते हैं. राहु-केतु चूंकि छाया ग्रह हैं, तो उनका जिक्र रहने देते हैं, लेकिन आप केवल ऊपर बताई गई बातों से समझिए ये बातें मैंने संकेत में कही हैं, लेकिन ग्रहों और हमारे जीवन का आपस में बहुत गहरा संबंध है. ज्योतिष का जो शास्त्र है, वह संकेतों के साथ ही भौतिक जगत के समन्वय का शास्त्र है. 

ग्रहण के दौरान पवित्रता का रखें ध्यान

सबसे बड़ी बात तो यह है कि ग्रहण के दौरान पवित्रता का भाव लगातार बनाए रखना चाहिए, पवित्र बने रहना चाहिए. सूर्यग्रहण का का सीधा साइंस समझिए. सूर्य के चारों ओर पृथ्वी घूम रही है. अब पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा परिक्रमा करता है. तो, यह केवल डिग्री और अंश का मामला है. जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं तो ग्रहण हो जाता है. अब आधी दुनिया में सूरज का प्रकाश रहेगा, आधी दुनिया में नहीं रहेगा. यह तीनों की डिग्री पर निर्भर करता है. खास एंगल पर पहुंचने पर किसी खास इलाके में रोशनी होती है, किसी जगह अंधेरा छा जाता है. तो, सूर्य की परिक्रमा पृथ्वी और पृथ्वी की परिक्रमा चंद्रमा कर रहा है. चंद्रमा 13 डिग्री या अंश पर हैं, तो उसी डिग्री का सारा मामला है. जैसे, सिंगापुर के सामने आने पर वहां अंधेरा हो जाएगा, या उस अंश के सामने अगर ऑस्ट्रेलिया होगा तो वहां अंधेरा छा जाएगा. तो, ये पूरा ग्रहण का सिद्धांत है. 

इस दौरान बस हमें सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. पवित्रता का ख्याल रखना चाहिए. आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ सामान्य दिनों की अपेक्षा इन दिनों में काफी लाभदायक होगा. 

[ये आर्टिकल निजी विचारों पर आधारित है]

 

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