जिला कारागार देहरादून में जब सुनाई दी प्रेमचंद की ईदगाह, जुड़ गया तिनका जेल पाठशाला का नया अध्याय

जिला जेल, देहरादून की महिला बैरक से 13 मई यानी बुधवार को महक और दीपिका को एक खास वजह से जेल रेडियो के रूम में बुलाया गया. इस जेल में निरुद्ध दीपिका आजीवन कारावास पर है जबकि महक विचाराधीन बंदिनी है. इन दोनों को यहां बुलाए जाने की वजह है- जेल के रेडियो पर शुरू होने वाला एक नया कार्यक्रम. यह दोनों बंदिनियां पिछले कई दिनों से जेल के रेडियो के साथ जुड़ी हैं. इन दोनों का चयन इस जेल रेडियो के नए कार्यक्रम- जेल में साहित्य के लिए किया गया है.
महिला बंदिनियों के लिए विशेष व्यवस्था
इस जेल में महिला बंदिनियों की क्षमता 40 है. अमूमन यहां 50 के आस-पास बंदिनियां रहती हैं. दून जेल रेडियो की शुरुआत 2021 में तिनका तिनका फाउंडेशन और जिला जेल देहरादून ने मिलकर की थी. तब महिलाओं के लिए इस रेडियो पर कार्यक्रम प्रस्तुत कर पाना संभव नहीं था लेकिन बाद में जेल प्रशासन ने इसकी व्यवस्था भी कर दी. एक रिकॉर्डर का इंतजाम हुआ ताकि वे अपने कार्यक्रमों को रिकॉर्ड करके पुरुष सेक्शन तक भेज सकें जहाँ पर जेल का रेडियो स्थापित है.
जेल में साहित्य
अब एक नए बदलाव के तहत वे जेल के साहित्यिक कार्यक्रमों पर काम करेंगी. इस बात की घोषणा उत्तराखंड जेल के उप महानिरीक्षक दधी राम मौर्य, जेलर पवन कोठारी और प्रोफेसर वर्तिका नंदा, संस्थापक तिनका तिनका फाउंडेशन ने की. यह भारत में एक नई तरह की पहल है.
कार्यक्रम का मकसद और तिनका जेल पाठशाला
इस पहल का मकसद है-बंदियों को साहित्य और समाज से अवगत कराना, उनके खाली समय में सार्थकता भरना और उन्हें लेखन और पाठन के लिए प्रोत्साहित करना. 1947 से 1980 का कालखंड हिंदी साहित्य के लिए बेहद समृद्ध रहा है. इस दौरान 'नई कहानी', 'नई कविता' और 'प्रगतिशील' आंदोलनों ने हिंदी साहित्य को नई दिशा दी. इस दौर में लेखकों ने अपनी लेखनी से समाज, रिश्तों और स्त्री चेतना को गहराई और संवेदना से उकेरा. इस साहित्य के वाचन के जरिए जेल का वातावरण बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी.
इस कार्यक्रम का प्रसारण हर रोज 5 मिनट के लिए किया जाएगा. इनमें भारतेंदु हरिश्चंद्र, प्रेमचंद,धर्मवीर भारती, राही मासूम रजा, निर्मल वर्मा, जैनेंद्र कुमार, अज्ञेय, फणीश्वर नाथ 'रेणु’, मोहन राकेश, हरिशंकर परसाई आदि लेखकों और कृष्णा सोबती, शिवानी, मन्नू भंडारी जैसी लेखिकाओं की कृतियों का वाचन होगा. शुरुआती दिनों में यह वाचन दीपिका औऱ महक करेंगी. इस कड़ी में पहली कहानी है- प्रेमचंद की कहानी- ईदगाह.
जेल से रिहा एक नेत्रहीन बंदी करेंगे कहानियों का संपादन
मैंने 2021 में (प्रोफेसर वर्तिका नंदा, संस्थापक, तिनका तिनका फाउंडेशन) इस जेल रेडियो की परिकल्पना की थी. श्री दधी राम मौर्य, उप महानिरीक्षक, श्री पवन कोठारी, जेलर और के सहयोग से जेल रेडियो साकार रूप ले सका. तब 14 बंदियों का रेडियो जॉकी के तौर पर चयन किया गया था जिनकी अगुवाई डॉ. सुचित नारंग ने की थी. वे एक नेत्रहीन बंदी हैं और जेल में आने से पहले संगीत के शिक्षक थे. उनके साथ अरुण और रोहित ने जेल रेडियो की कमान संभाली. आज डॉ. सुचित नारंग जेल से रिहा हो गए हैं, लेकिन जेल रेडियो के लिए उनका सहयोग बरकरार है. वही इस कथावाचन का संपादन करेंगे. उन्होंने 2023 में जेल रेडियो के सिग्नेचर ट्यून को बनाया था.
जेल रेडियो का प्रभाव
रेडियो की वजह से जेल के वातावरण में साफ तौर पर बहुत बदलाव आया है. शुरुआत में जेल का रेडियो सिर्फ पुरुष बंदियों तक सीमित था लेकिन धीरे-धीरे इसकी पहुँच महिला बंदिनियों तक की गई. जेल प्रशासन मानता है कि रेडियो ने जेल के माहौल में जबरदस्त सकारात्मकता भर दी है.
जेल रेडियो की कुछ उपलब्धियां
दून जेल रेडियो अपनी शुरुआत से ही बंदियों के लिए संवाद और भावनात्मक सुकून का जरिया बन रहा है. अप्रैल में उत्तराखंड लीगल अथॉरिटी और नालसा ने मिलकर देहरादून में एक क्षेत्रीय कान्फ्रेंस का आयोजन किया था. उसका उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश श्री सूर्यकांत ने किया था. इस कॉन्फ्रेंस में वर्तिका नंदा ने उत्तराखंड की जेल में लाए गए रेडियो की यात्रा को उत्तर भारत के न्यायाधीशों के सामने प्रस्तुत किया था.
तिनका रिसर्च सेल करेगा शोध
2021 में तिनका तिनका रिसर्च सेल की स्थापना हुई थी. इस दौरान उत्तराखंड की देहरादून जेल रेडियो पर भी कई तरह के शोध किए गए जिससे जेल में संगीत की जरूरतों का भी आकलन किया गया. 13 मई, 2023 को जिला जेल, देहरादून और तिनका तिनका के बीच तीन करार किए गए थे जिनका मकसद इस जेल को एक मॉडल जेल के तौर पर स्थापित करना है. 2024 में नेशनल बुक ट्रस्ट से आई किताब रेडियो इन प्रिजन में भी इस जेल का विशेष उल्लेख किया गया है. इसी तरह 2023 में स्पेन और 2022 में नार्वे में हुई अंतर्राष्ट्रीय कान्फ्रेंस में भी दून जेल रेडियो का विशेष जिक्र किया गया था.
[ये लेखक के निजी विचार है]
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