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प्रतिशोध, बदले की राजनीति और चंद्रबाबू नायडू की गिरफ्तारी... क्या होगा BJP का कदम और किस ओर आंध्र प्रदेश की पॉलिटिक्स?

आंध्र प्रदेश की राजनीति में सियासी तूफान उस वक्त खड़ा हो गया जब तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) सुप्रीमो एन. चंद्रबाबू नायडू की कथित स्किल डेवलपमेंट घाटोले में गिरफ्तारी हुई. उन्हें 22 सितंबर तक ज्यूडिशियल कस्टडी में राजमुंदरी सेंट्रल जेल भेज दिया गया है. ऐसा आरोप है कि जिस वक्त नायडू साल 2014 से लेकर 2019 के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री थे उस समय का ये घोटाला है. हालांकि, आंध्र की राजनीति पर अगर गौर करें तो बदले की राजनीति वहां पर पुरानी है और ऐसा भी नहीं है कि 2019 का चुनाव हारने के बाद नायडू के खिलाफ ये कोई पहला एक्शन हो.

दरअसल, 2019 का चुनाव हारने के बाद से नायडू के खिलाफ कई एक्शन हुए और अब तक उनके खिलाफ 10 मामले दर्ज किए गए, जबकि उनके बेटे नारा लोकेश के खिलाफ दर्जनभर से ज्यादा मुकदम दर्ज किए गए. चंद्रबाबू नायडू के अमरावति स्थित दफ्तर पर बुलडोजर चलवा दिया गया गया. इस कार्रवाई का जश्न जगनमोहन रेड्डी की राज्य की सत्ताधारी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस के नेताओं ने मनाया. ठीक इसी तरह से तुलुगू देशम पार्टी के हेडक्वार्टर पर भी एक्शन हुआ. 

बदले की राजनीति पुरानी

जगन मोहन रेड्डी सरकार की तरफ से चंद्रबाबू नायडू, उनके बेटे नारा लोकेश और टीडीपी समर्थकों के खिलाफ लगातार होती कार्रवाई से वह इतने आहत हुए कि विधानसभा में उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े और वे रो पड़े थे. इसके बाद नायडू ने विधानसभा में ये कसम खाई कि सीएम बनने के बाद ही वे दोबारा विधानसभा में आएंगे.

वैसे, ऐसा भी नहीं है कि आंध्र प्रदेश में सिर्फ एन. चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ ही इस तरह का एक्शन हुआ. बल्कि, जिस वक्त जगन मोहन रेड्डी विपक्ष में थे, उस समय टीडीपी नेताओं की तरफ से उन पर तंज किया गया था. इस ताने से आहत जगन मोहन रेड्डी भी राज्य विधानसभा से बाहर चले गए थे और प्रण किया था कि मुख्यमंत्री बनने के बाद ही सदन में लौटेंगे.

किस तरफ आंध्र की राजनीति?

अभी हाल में ये कयासबाजी हो रही थी कि चंद्रबाबू नायडू लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए का रुख कर सकते हैं, लेकिन भ्रष्टाचार में गिरफ्तार के बाद एनडीए का नायडू के साथ जाना मुमकिन नहीं है. अगर एनडीए में शामिल हो जाते उसके बाद जगन मोहन रेड्डी सरकार के लिए नायडू के खिलाफ इस तरह का एक्शन आसान नहीं रह जाता. जगनमोहन रेड्डी की भी यही चाहत होगी कि नायडू किसी भी सूरत में एनडीए के साथ न जाएं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बदले की कार्रवाई के बीच लोकसभा चुनाव 2024 से पहले आखिर किस तरफ आंध्र प्रदेश की राजनीति जा रही है?

दक्षिण भारत की राजनीति को करीब तीन दशक से भी ज्यादा वक्त से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार एन. राजगोपालन ने एबीपी डिजिटल टीम से बात करते हुए बताया कि खासकर दक्षिण के राज्यों तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में राजनीतिक बदले की कार्रवाई होती रही है. नायडू की गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि को देखना आवश्यक है कि किस वक्त उनको अरेस्ट किया गया है.

नायडू को परेशान करना ठीक नहीं

नायडू को तड़के साढ़े तीन बजे सुबह गिरफ्तार करना, उसके बाद पुलिस स्टेशन में 3 घंटे उन्हें बिठा देना और उसके बाद उन्हें पानी तक नहीं देना.... ये सारी चाजें स्थानीय मीडिया में वायरल है. इसके विरोध में टीडीपी समर्थकों ने प्रदर्शन किया, जगह-जगह बसें रोकी गईं और ट्रैफिक जाम किया गया.

आर. राजगोपालन का कहना है कि ये पूरी तरह से प्रतिशोध की राजनीति है. जगनमोहन रेड्डी का ये राजनीति इस लिहाज से ठीक नहीं कही जा सकती है. चंद्रबाबू नायडू की अभी एनडीए में शामिल होने की संभावना थी. ऐसे में नायडू को अभी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. जिस तरह से यूपी में बीएसपी का दबदबा खत्म हो गया, करीब करीब कुछ वैसा ही हाल आंध्र में टीडीपी का हो चुका है. चंद्रबाबू नायडू का जनाधार खत्म हो चुका है, उनकी पार्टी का प्रभाव खत्म हो रहा है.

आर. राजगोपालन कहते हैं कि जहां आंध्र प्रदेश में राजनीतिक असर की बात है तो जगन मोहन रेड्डी को फायदा होगा. आंध्र प्रदेश की 25 लोकसभा सीटों में से कम से कम 18 से 19 सीटें जगन मोहन रेड्डी जीत सकते हैं. टीडीपी के हाथ कुछ सीटें आ सकती है. 

नायडू की गिरफ्तारी पर वे आगे बताते हैं कि दरअसल देश के करीब-करीब हर राज्य में बदले की कार्रवाई होती है, वो चाहे यूपी हो या महाराष्ट्र. इसका उदाहरण उत्तर प्रदेश के मायावती और मुलायम सिंह की लड़ाई और गेस्ट हाउस कांड का हवाला दिया. ऐसे में जगनमोहन रेड्डी के साथ जनता खड़ी है, उन्हें पब्लिक सपोर्ट है जबकि चंद्रबाबू नायडू के साथ जनता अभी नहीं है.

दरअसल, जहां तक जगन मोहन रेड्डी और चंद्रबाबू नायडू के बीच राजनीतिक लड़ाई की बात है तो ये रेड्डी वर्सेज खम्मम की लड़ाई है. जब भी जो सत्ता में आया, उसने दूसरे के साथ बदला लिया. चंद्रबाबू जिस वक्त मुख्यमंत्री थे, उस समय वे जगनमोहन रेड्डी के पिता वाई.एस. राजेशेखर रेड्डी के खिलाफ बदला लेते थे. हालांकि, तेलंगाना के अलग राज्य बन जाने और कांग्रेस के राज्य में करीब खत्म हो जाने के बावजूद यहां पर दो क्षेत्रीय दल टीडीपी और वाईएसआर का मुकाबला बना रहेगा.
हालांक, जगन रेड्डी के खिलाफ लोगों में अभी तक सत्ता विरोधी लहर नहीं देखी जा रही है. इसलिए, आने वाले चुनाव में नतीजे आने से काफी कुछ साफ होगा. जहां तक चन्द्रबाबू नायडू की बात है तो वे एनडीए में जाएंगे या इंडिया गठबंधन में जाएंगे, इस पर अभी सस्पेंस बरकरार है.

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.] 

 

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