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मुरली विजय का शतक क्यों विराट के लिए गुड न्यूज़ नहीं है

कवर पर एक शानदार ड्राइव,एक बेहद नजाकत भरा लेग ग्लान्स, एक कॉपी बुक स्ट्रेट ड्राइव. नागपुर टेस्ट के दूसरे दिन मुरली विजय के ये शॉट्स देखकर हर क्रिकेट फैन ने ताली बजाई होगी. फिर आप सोच रहे होंगे कि वापसी कर रहा एक बल्लेबाज़ अगर शतक बनाता है तो ये कप्तान के लिए अच्छी खबर क्यों नहीं होती. मुरली विजय का फॉर्म में आना मुरली विजय के लिए निश्चित तौर पर अच्छा है लेकिन अगर टीम की बात करें तो ये खबर बहुत अच्छी नहीं है. ओपनर्स के बीच म्यूज़िकल चेयर चल रहा है देखिए कप्तान विराट के लिए अभी तक खुशनुमा परेशानी ये रही है कि उनके दो ओपनर हमेशा फिट और तैयार मिले हैं. केएल राहुल, मुरली विजय और शिखर धवन तीन ओपनर हैं. तीन में से दो ही ओपनर खेलेंगे ये कप्तान कोहली ने साफ कर दिया है. ये भी सच है कि इन तीनों के बीच किस्मत का म्यूज़िकल चेयर चल रहा है. मुरली विजय चोटिल हुए और श्रीलंका दौरे के लिए टीम में नहीं चुने गए शिखर धवन शामिल हुए. शिखर ने दो शतक जमाए और फॉर्म में लौटे. उनका शतक बनाना टीम इंडिया के लिए अच्छी नहीं बहुत अच्छी खबर है. इस बारे में भी तफ्सील से आगे बताएंगे. लेकिन अब दूसरा म्यूजिकल चेयर देखिए. मुरली विजय चोटिल हुए तो केएल राहुल को मौका मिला. राहुल ने लगातार 7 अर्द्धशतक जमा दिए. उनका अर्द्धशतक जमाना भी टीम इंडिया के लिए अच्छी खबर है. मुरली विजय के शतक से बिगड़ेगा भविष्य इस हेडिंग की भाषा पर मत जाइये, भावना समझिए. मुरली विजय का मैं भी फैन हूं लेकिन सिर्फ और सिर्फ भारतीय पिचों पर. विदेशी पिचों पर अगर टीम इंडिया का मकसद जीत है तो फिर मुरली विजय कम से कम मेरे लिए तो प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं होते. टीम इंडिया को आने वाले समय में अपनी सारी टेस्ट सीरीज़ विदेशों में ही खेलनी है और बेहद मुश्किल दौरे हैं ये. साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और इंग्लैंड जैसे देशों में जाकर उनके गेंदबाज़ों और तेज़ बाउंसी पिचों पर टेस्ट में लोहा लेना है. इन पिचों पर मुरली विजय की असफलता की 100 फीसदी गारंटी है. इसको समझिए क्यों ऐसा है. मुरली विजय का करियर दो हिस्सों में बांटा जा सकता है. एक 30 साल की उम्र के पहले और दूसरा 30 साल की उम्र के बाद. करियर के पहले हिस्से में मुरली विजय के पैरों में ताकत थी, शॉट्स में कोई खौफ नहीं होता था. लेकिन जैसे जैसे उम्र बढ़ी मुरली विजय के पैरों की रवानी और शॉ़ट्स की नौजवानी दोनों पर असर दिखने लगा. दूसरा सबसे बड़ा कारण है कि मुरली विजय का करियर पिछले 3 सालों में चोटों से परेशान रहा है. उन्होंने चोटों से वापसी तो की है लेकिन जब चोटें पैरों पर लगें तो एक बल्लेबाज़ के लिए बाउंसी पिचों पर खेलना मुश्किल होता है. जब पैर और विकेट दोनों में से किसी एक को बचाना हो तो हमेशा जीत पैर की ही होती है. अब तेज विदेशी पिचों पर मुरली विजय के प्रदर्शन को देखेंगे तो मिला जुला असर दिखेगा. लेकिन जब इन आंकड़ों की तह में जाएंगे तो दिखेगा कि विदेशी पिचों पर मुरली विजय ने जो थोड़ा बहुत कमाल किया है वो उम्र की 30वीं ईंट को छूने से पहले किया है.

देश                      टेस्ट      रन       शतक         अर्द्धशतक साउथ अफ्रीका      03        176        00              01 ( द. अफ्रीका में मुरली ने 2013 में शतक लगाया था डरबन में) ऑस्ट्रेलिया           04       482        01               04 ( ब्रिसबेन में 144 रन बनाए 2014 में ) इंग्लैंड                  05        402        01              00 ( नॉटिंघम में 2014 में 146 रन बनाए) न्यूज़ीलैंड             02         48        00               00

राहुल बन सकते हैं भविष्य मुरली का सीधा मुकाबला केएल राहुल से है. राहुल की उम्र 25 साल है. मतलब फुटवर्क चीजे जैसा और दूसरी सबसे बड़ी बात है कि तेज़ पिचों पर कट और पुल रन बनाने का सबसे बड़ा हथियार बनते हैं, उसमें राहुल माहिर हैं. उनके पास क्रिकेट के सारे शॉट्स हैं और उसे लगाने की काबिलियत भी. दूसरे वो लगातार टेस्ट में प्रदर्शन कर रहे हैं. दुर्भाग्य ही है कि वो अपने अर्द्धशतकों को शतक में नहीं बदल पा रहे हैं. ऑस्ट्रेलिया में 2015 में सिडनी टेस्ट में राहुल ने 110 रन की शानदार पारी खेली थी.

मैच विनर वाला फैक्टर ओपनर्स में शिखर धवन मैच विनर हैं और वो हाल के दिनों में कई बार ये साबित भी कर चुके हैं. दूसरी बात रही मुरली विजय की तो वो घरेलू पिचों पर तो मैच विनर हैं लेकिन विदेशी पिचों पर नहीं. राहुल युवा भी हैं और टेक्नीकली मुरली विजय से बेहतर बल्लेबाज हैं. उनके मैच विनर वाला वो जोश भी है जो कम उम्र के टीम इंडिया के सभी नौजवानों में दिखता है. इसलिए मुरली विजय का नागपुर में लगाया गया ये शतक उनके लिए तो अच्छी खबर है, अगर चोट नहीं लगी तो वो तीसरे ओपनर के तौर पर साउथ अफ्रीका जाएंगे. बस खतरा ये है कि घरेलू सीरीज़ के प्रदर्शन के आधार पर वो साउथ अफ्रीका में प्लेइंग इलेवन का हिस्सा ना बन जाएं. विराट जो दुनिया पर राज करने वाली टीम बनाना चाहते हैं उसमें विदेशी पिचों पर राहुल को तराशने से ज्यादा फायदा है ना कि मुरली विजय को मौका देने से.

TWITTER - @anuragashk

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