MP: उपचुनाव नहीं आसान घुटनों के बल झुकना है...
कांग्रेस से बीजेपी में शामिल होकर सरकार बनाने वाले 25 लोगों को दोबारा बीजेपी से जिताकर लाना की जिम्मेदारी शिवराज सिंह चौहान के कंधों पर है. इसलिए अब वह अपना सारा राजनीतिक कौशल दिखा रहे हैं.

मंदसौर जिले के कयामपुर गांव की वो सभा, सुवासरा विधानसभा के कांग्रेस से बीजेपी में पाला बदल कर आए उम्मीदवार हरदीप सिंह डंग के प्रचार के लिए थी. मंच पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भाषण दे रहे थे. बात करते-करते जाने उनके मन में क्या आया और वो कह उठे कि आज मेरा दिल कह रहा है शिवराज यहां बैठ कर मंदसौर और नीमच जिले की जनता को प्रणाम करे और कार्यकर्ताओं को धन्यवाद दे. इसके बाद वो मंच पर घुटनों के बल बैठ गये और दोनों हाथ जोड़ कर सामने बैठे कार्यकर्ताओं को हाथ जोड़कर प्रणाम करने की मुद्रा में झुक गए. बस फिर क्या था मंच पर बैठे बीजेपी के नेता शिवराज सिंह के इस कदम से भौचक्के से रह गए और खडे होकर तालियां बजाने लगे.
देखते ही देखते ये वीडियो और घुटनों के बल बैठकर प्रणाम करते हुए शिवराज का फोटो वायरल हो गया. इस फोटो के लोग अलग-अलग मायने निकालने लगे. कांग्रेस ने कहा कि मुख्यमंत्री चुनाव के पहले ही घुटनों पर आ गए, तो कुछ इसे मुख्यमंत्री की विनम्रता तो कुछ इसे नाटक और नौटंकी कहने लगे. मगर ये फोटो बहुत कुछ कहता है. ये निर्विवाद है कि शिवराज मध्यप्रदेश के सबसे लोकप्रिय और सबसे लंबे समय तक प्रदेश के सर्वोच्च पद पर रहने वाले नेता हैं. ये पद और कद उनको यूं ही नहीं मिला.
मध्यप्रदेश की राजनीति हमेशा से नेता प्रधान रही है यदि उसमें शिवराज सिंह चौहान जैसा साधारण पृप्ठभूमि से आया कार्यकर्ता जैसा व्यक्ति लंबे समय तक नेता रह जाये तो और इतने लंबे समय में भी अपना कार्यकर्ता भाव जिंदा रखे तो ये यूं ही नहीं है. सच तो ये शिवराज प्रदेश की जनता की नब्ज अच्छी तरह पहचानते हैं. उनको मालूम है कि कमलनाथ सरकार गिरने के बाद चौथी बार यदि उनको प्रदेश की कुर्सी मिली है तो उसकी कीमत भारी है.
कोरोना की चुनौती तो उनको और सिस्टम को ही जैसे तैसे निपटनी थी मगर कांग्रेस से बीजेपी में शामिल होकर सरकार बनाने वाले 25 लोगों को दोबारा बीजेपी से जिताकर लाना उनके ही जिम्मे हैं. इसलिए अब वह अपना सारा राजनीतिक कौशल दिखा रहे हैं. भोपाल में बैठकर रोज नई-नई योजनाओं का ऐलान कर रहे हैं. योजनाओं के हितग्राहियों से ना सिर्फ बात कर रहे हैं बल्कि प्रत्येक जिले में उसका सीधा प्रसारण भी करवा रहे हैं और इनसे छूटते ही वो निकल पडते हैं चुनाव वाले इलाकों में सभाएं करने.
वो समझ रहे हैं कि कांग्रेस से पाला बदल बीजेपी का पट्टा पहन लेने भर से कोई भी उम्मीदवार बीजेपी का नहीं हो जाता. इन्हीं बीजेपी के कार्यकर्ताओं को डेढ़ साल पहले इसी प्रत्याशी को हाथ उठाकर हराने की कसम तो शिवराज ने ही खिलवायी थी फिर भला अब ये कार्यकर्ता कैसे इसे अपना ले. इसलिए शिवराज अब जनता से बाद में पहले बीजेपी के कार्यकर्ताओं को प्रणाम कर रहे हैं और वो भी घुटने टेक कर. जिससे बीजेपी कार्यकर्ताओं की नाराजगी इस उम्मीदवार से दूर हो तब तो ये भाई कांग्रेस प्रत्याशी से लड़ पायेगा. वरना बीजेपी की टिकट पर चुनाव लडने वाले कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी के सामने चुनौती का पहाड़ बड़ा है. पहले उसे बीजेपी के नेताओं कार्यकर्ताओं से लडना है, फिर जनता को जबाव देना है जो पूछ रही है कि भैया जब विधायक ही बनना था तो विधायकी से इस्तीफा क्यों दिया, जब मंत्री ही बनना था तो मंत्री पद छोडा क्यों. क्यों हमें इस कोरोना काल में भीड़ भरी सभाओं में बुला रहे हो. क्यों इस कोरोना काल में हमारे घर भीड़ लेकर आ रहे हो. हम देश के प्रधानमंत्री की बात मान रहे हैं जो कहते हैं कि जब तक आवश्यक कार्य ना हो घर से ना निकलें और तुम गली गली घूम रहे हो. और अब तो ये भी साफ हो गया है कि जिन सत्रह जिलों की 28 विधानसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं वहां पिछले दो महीने में कोरोना संक्रमण की दर बढ़ी है मरीज बढ़े हैं जबकि प्रदेश में ये दर घट रही है कोरोना के एक्टिव मरीज कम हो रहे हैं. उपचुनाव वाले जिलों में एक अगस्त से अब तक करीब सत्तर दिनों में 33925 नये रोगी मिले और 532 मरीजों की जान गयी.
इन सारे सवालों के बाद बीजेपी प्रत्याशी को कांग्रेस से मुकाबला करना है. हांलाकि ग्वालियर चंबल के कई इलाकों में बीएसपी ने उम्मीदवार उतारकर मुकाबला त्रिकोणीय कर दिया है. जिसका कुछ जगहों पर बीजेपी को तो कहीं कांग्रेस को लाभ है. इसलिए शिवराज सिंह का ये प्रणाम बेमानी नहीं है और ये भी तय मानिए कि उनकी ये अदा खाली भी नहीं जाएगी. भाव की भूखी जनता में शीश झुका कर प्रणाम का असर हुआ है और आगे भी होगा. कांग्रेस में है कोई ऐसा नेता जो कर सके ऐसा प्रणाम करने की हिम्मत.
शिवराज सिंह ने पिछले पंद्रह सालों में मध्यप्रदेश में राजनीति करने का रंग ढंग और व्याकरण बदल दिया है. तभी वो लंबे समय तक अजेय बने हुए हैं हांलाकि ये चुनाव उनकी कडी परीक्षा ले रहा है. वैसे यदि शिवराज घुटनों के बल बैठकर प्रणाम कर रहे हैं तो उनकी इस अदा को और आगे ले गए हैं कांग्रेस के सांची के प्रत्याशी मदन चौधरी जो अपनी हर सभा में मंच पर दंडवत होकर जनता को पहले प्रणाम करते हैं और जनसंपर्क के दौरान रास्ते में मिलने वाले छोटे बड़े और बुजुर्ग के चरण छूते हैं. यकीन मानिये मदन की ये अदा कांग्रेस से पाला बदल कर आये स्वास्थ्य मंत्री डा प्रभुराम चौधरी को भारी पड़ रही है यकीन ना तो सांची के किसी मतदाता को फोन लगाकर पूछ लीजिए.
(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है)
“ मेरठ की दलित बेटी के मामले पर सियासत, योगी सरकार का सख्त एक्शन तय, पुराने मामले गवाह






























