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Vladimir Putin India Visit: पुतिन भारत में तो कौन ले रहा यूक्रेन जंग के फैसले, किसके पास यह जिम्मेदारी?

Vladimir Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर हैं. इसी बीच आइए जानते हैं कि अगर पुतिन भारत में है तो यूक्रेन जंग के फैसले कौन ले रहा है.

Vladimir Putin India Visit: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 23वें भारत-रूस सालाना शिखर सम्मेलन के लिए दिल्ली आ चुके हैं. कल शाम 7:00 बजे पुतिन का विमान दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर लैंड हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पालम एयरपोर्ट पर खुद पुतिन का स्वागत किया. लेकिन इसी बीच एक सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि अगर पुतिन भारत में है तो यूक्रेन जंग के फैसले कौन ले रहा है. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

कौन ले रहा है जंग के फैसले 

दरअसल पुतिन की फिजिकल लोकेशन से उनके कंट्रोल में कोई भी फर्क नहीं पड़ता. वह मिलिट्री और स्ट्रैटेजिक फैसलों पर पूरा अधिकार रखते हैं. इसी के साथ सीनियर मिलिट्री अधिकारी रोजाना के ऑपरेशन संभालते हैं. रूस के राष्ट्रपति के तौर पर पुतिन के पास यूक्रेन युद्ध से जुड़े सभी बड़े फैसलों पर अंतिम शक्ति है. अब चाहे पुतिन मॉस्को, सेंट पिटर्सबर्ग या फिर नई दिल्ली में हों उनके अधिकार कहीं भी खत्म या फिर कम नहीं होते.

रक्षा मंत्रालय रोजाना के ऑपरेशन मैनेज करता है 

जिस तरफ पुतिन स्ट्रैटेजिक दिशा को संभालते हैं युद्ध के मैदान के रोजाना के फैसलों को रूसी रक्षा मंत्रालय संभालता है. रक्षा मंत्री और सीनियर जनरल सैनिकों की आवाजाही, लॉजिस्टिक्स और टैक्टिकल प्लानिंग को संभालते हैं. वे हर मोर्चे पर ऑपरेशन की देखरेख करते हैं और दुश्मनों की गतिविधि का आकलन करने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर तुरंत जवाब देने की अनुमति देते हैं. इससे यह पक्का होता है कि जब राष्ट्रपति अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर हो तब भी कोई काम ना रुके.

रूसी सुरक्षा परिषद स्ट्रैटेजिक फसलों का मार्गदर्शन करती है 

सभी बड़े फैसले रूसी सुरक्षा परिषद से होकर गुजरते हैं. पुतिन इस परिषद की अध्यक्षता करते हैं और विदेशी यात्राओं के दौरान भी सुरक्षित कम्युनिकेशन सिस्टम के जरिए इसमें भाग लेते हैं. सदस्यों में शीर्ष मंत्री, इंटेलिजेंस प्रमुख और रक्षा अधिकारी शामिल होते हैं. 

पुतिन की गैर मौजूदगी में सिस्टम कैसे काम करता है 

रूस ने ऐसा सिस्टम बनाया है कि वह बिना किसी रूकावट के लगातार काम करता रहता है भले ही राष्ट्रपति इंटरनेशनल दौरे पर हों. कमांड की चेन स्थिर है, काफी ज्यादा हायरार्कीकल है और बाती हुई जिम्मेदारियों के साथ काम करती है. जमीनी स्तर पर टैक्टिकल फैसलों को लिया जाता है, ऑपरेशनल फैसले जनरल स्टाफ लेता है और स्ट्रैटेजिक फैसले पुतिन ही लेते हैं. भले ही वे कहीं भी हों.

ये भी पढ़ें: क्या सिर्फ पुतिन के इशारे पर किसी देश पर परमाणु हमला कर सकता है रूस, किसके पास है इसका कंट्रोल?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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