एक्सप्लोरर

उर्दू से भाजपा को है दिक्कत, योगी का सदन में कठमुल्ला राग तो राजस्थान में पढ़ाई पर ही संकट

भारत में भाषा पर बवाल नया नहीं है. हमारे यहां तो भाषा को लेकर राज्यों का बंटवारा और नामकरण भी हुआ है. हमने भाषा पर सियासत तब भी देखी है, जब कर्नाटक या महाराष्ट्र में बिहारियों को पीटा जाता है, तमिलनाडु में हिंदी-विरोध में बोर्ड काले कर दिए जाते हैं तो कभी संसद में संस्कृत में अनुवाद को लेकर विरोध होता है. ताजा मामला उर्दू का है, जब राजस्थान सरकार ने बीकानेर में उर्दू पढ़ाने की जगह संस्कृत पढ़ाने का फरमान जारी किया है, हालांकि सरकार के पास दलील है कि उर्दू में तो विद्यार्थी ही नहीं थे. वहीं, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन के भीतर उर्दू पढ़ाकर कठमुल्ला बनाने की बात कह एक नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया है. 

पहचान की राजनीति और भाषा

यह कोई नई चीज नहीं है. यह पहचान से जुड़ी बात है. हमने इसके पहले रंगों की सियासत भी देखी है. खासकर उत्तरप्रदेश में जब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने थे उसके बाद से तमाम जगह भगवा रंग से रंगवा दी गई, यहां तक कि रोडवेज की बसों को भी भगवा रंगा दिया गया. एक ऐसा महौल बना हुआ है जहां भगवा रंग हिन्दुओं का हो जाता है और हरा रंग मुस्लिमों का हो जाता है. इसी तरह से भाषा के साथ है. उर्दू की बदनसीबी यह है कि उर्दू की पहचान मुसलमानों से जोड़ दी जाती है, जबकि बात इससे बहुत अलग है क्योंकि उर्दू एक हिन्दुस्तानी जुबान है. हिन्दुस्तान के अन्दर बनी और बढ़ी है. अगर उर्दू की बात करें तो कायस्थों ओर खत्रियों ने उसको सींचा, लेकिन फिलहाल की राजनीति में उर्दू मुसलमानों की भाषा है. इसमे कोई दो राय नहीं है और योगी आदित्यनाथ उसी तरफ इशारा कर रहे थे. बात जब शिक्षा की आती है तो उनकी इस बात से इत्तेफाक है कि अंग्रेजी सबसे ज्यादा जरूरी हो गई है इस वक्त, लेकिन वो तो सब जगह है. कोई अपने बच्चों को हिन्दी लिटरेचर पढ़ाना नहीं चाहता है ठीक वैसे ही जैसे उर्दू लिटरेचर नहीं पढ़ना चाहता हैं. बहुत कम लोग होते है ज्यादा तर चीजें अंग्रेजी मीडियम स्कूलों के हवाले हो गई हैं तो वो एक दूसरा मामला है. हालांकि,  राजनीति में ये बात आती है तो उसके निहितार्थ बहुत अलग होते हैं.


उर्दू से भाजपा को है दिक्कत, योगी का सदन में कठमुल्ला राग तो राजस्थान में पढ़ाई पर ही संकट

भाषा को तो बख्श दें सियासतदान

इस बार भी जब योगी ने सदन मे यह बोला तब उसके बाद अखिलेश यादव का एक बयान आया. उन्होंने तंज के लहजे में कहा कि मुल्ला और मौलवी बनना खराब नहीं है और योगी बनना भी खराब नहीं है लेकिन खराब होता है खराब योगी बनना. तो राजनीति के तीर और तरकश अपनी जगह हैं और धनुष की प्रत्यंचा चढ़ी हुई है तो हमले भी हो रहे हैं. कुल मिला कर बात यह है कि देखना चाहिए कि इसका संदर्भ क्या था. दरअसल, उत्तर प्रदेश की विधान सभा में एक नई परंपरा शुरू हुई है कि क्षेत्रीय बोली-भाषाएं जो हैं, जैसे  बुंदेलखंडी है, अवधी है, भोजपुरी है, इसमें भी विधायक अपनी बात रख पाएं. यह पहल की गई है सरकार की तरफ से, उसी पर बहस हो रही थी और विपक्ष के नेता माता प्रसाद पाण्‍डेय ने उसपर कहा कि हिंदी के लिए हमने बहुत लड़ाई लड़ी है और ये बोलियां जो हैं हिंदी से निकली है, मगर सदन में कम से कम हिंदी को तवज्जो देनी चाहिए.

यूपी में मुश्किल होगा, उर्दू को निकालना

वहां से यह विवाद घूम के उर्दू और कठमुल्लों तक चला गया. योगी आदित्यनाथ कोई भी ऐसा मौका नहीं छोड़ते है जिसमें हिन्दू और मुस्लिम के सवाल को राजनीति में ना लाएं. कल भी यही हुआ. हालांकि राजस्थान और उत्तरप्रदेश के बीच में एक फर्क यह है कि अगर राजस्थान सरकारी विद्यालयों में उर्दू बन्द करने की बात कर रहा है, तो वह कर सकता है, लेकिन उत्तरप्रदेश में यह करना इस लिए मुश्किल है क्योंकि उत्तरप्रदेश में उर्दू को दूसरी राजभाषा का दर्जा है और सुप्रीम कोर्ट ने भी इसपर मोहर लगाई है. तो, अगर सरकार को उर्दू हटानी होगी तो उसको बहुर सारे विधायी कार्य करने होंगे, फिर उस एक्ट को खत्म करना होगा, फिर उसके बाद कोर्ट के इस जजमेंट को देखना पड़ेगा, तो उर्दू को हटाना इतना आसान नहीं होगा.

नीयत ओर नीति, राजनीति में ये दोनों बहुत अलग चीजें होती हैं. तो नीयत का सवाल इस वक्त है कि जो  योगी आदित्यनाथ की अपनी यूएसपी है वो हिंदुत्व की राजनीति को जैसे उपर रखते हैं, उससे जाहिर बात है कि अगर किसी एक को ऊपर रखना है तो दूसरे को छोटा बनाना पड़ता है.  दुर्भाग्य से इसमें मुस्लिम की जगह उर्दू आ गई है. हालांकि, अगर मौलवी की पढ़ाई, जिसकी वो बात कर रहे थे, कठमुल्ला बनाने को लेकर वो उर्दू में होती ही नहीं है, वो अरबी और फारसी मे होती है. राजनीति के अपने मायने हैं, इसमें सामान्य जनता को पार्टियां अपने हिसाब से अड्रेस करती हैं, और एक समझ यही है कि उर्दू मुसलमानों की भाषा हो गई है. 

जब माता प्रसाद पाण्डेय बोल रहे थे तो उन्होंने उर्दू का जिक्र नहीं किया था उन्होंने बोलियों और हिंदी का जिक्र किया था. ऊर्दू तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लेकर आए थे उस मुद्दे मे. जो विधान सभा के भीतर बात है इसमें कोई दो राय नहीं है कि कई बार हमने वो भाषाई वक्तृता भी सुनी है, जिसके भीतर   स्थानीय बोली में तमाम उदाहरण भी दिए गए हैं. हालांकि, मुख्य भाषा हिन्दी ही रही है. अब जबकि यह नई परंपरा उत्तर प्रदेश में शुरू हो रही है इसके अच्छे पहलू भी हैं. हमारे प्रदेश में जितनी भाषाएं हैं उनको एक स्वीकार्यता मिले, मगर उसके लिए एक सिस्टम बनाना पड़ेगा, क्योंकि बुंदेलखंडी मे कोई बात कर रहा है तो पूरे उत्तर प्रदेश का भोजपुरी जानने वाला विधायक उसको कैसे समझेगा? तो एक एंटरप्रेटर की व्यवस्था करनी पड़ेगी जो अभी उत्तर प्रदेश में नहीं है.

उत्तर प्रदेश में हमने बहुत अच्छे भाषण सुने है जिसमें उर्दू और क्षेत्रीय आंचलिक बोलियों का मिश्रण रहा है. आजम खान जब बोलते थे तो उर्दू की नफासत झड़ती थी, हृदय नारायण दीक्षित जी जब बोलते थे तो बड़ी संस्कृतनिष्ठ हिंदी में विधानपरिषद में बोलते थे. मगर तब कोई विवाद नहीं था मगर अब राजनीति है. हर चीज विवाद के केंद्र मे ही लाई जाती है और उसको लेकर फिर अपनी-अपनी रणनीति के हिसाब से बयानबाजियां शुरू हो जाती है.

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही ज़िम्मेदार है.] 

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

US Ro Khanna: अमेरिका में हिंदुओं पर हमले, नफरत बर्दाश्त नहीं! US संसद में लाया गया प्रस्ताव, इकट्ठे हो गए 32 MP
अमेरिका में हिंदुओं पर हमले, नफरत बर्दाश्त नहीं! US संसद में लाया गया प्रस्ताव, इकट्ठे हो गए 32 MP
'हम क्यों फाजिल कहें', CM योगी ने बदल दिया यूपी के फाजिलनगर का नाम, अब यह कहा जाएगा
'हम क्यों फाजिल कहें', CM योगी ने बदल दिया यूपी के फाजिलनगर का नाम, अब यह कहा जाएगा
'तृणमूलाइजेशन नहीं...', बंगाल BJP चीफ ने ममता के बागियों को दिखाया रेड फ्लैग, एंट्री का दरवाजा बंद!
'तृणमूलाइजेशन नहीं...', बंगाल BJP चीफ ने ममता के बागियों को दिखाया रेड फ्लैग, एंट्री का दरवाजा बंद!
पीवी सिंधु का दावा उनकी वजह से आरसीबी टीम की हुई जीत, फैंस को कहा- जरा हिसाब लगाइए
पीवी सिंधु का दावा उनकी वजह से आरसीबी टीम की हुई जीत, फैंस को कहा- जरा हिसाब लगाइए

वीडियोज

Breaking | Attack on Lebanon: Trump की Netanyahu से नाराजगी खुलकर आई सामने  | Hormuz | Latest Update
'मां बहन' में दिखेगा Madhuri Dixit का नया अंदाज, बोलीं- किरदार देखकर हो जाएंगे हैरान
2026 Royal Enfield Guerrilla 450 Apex Review | Auto Live #royalenfield
'हस्तिनापुर के वीर' में भीष्म पितामह का नया रूप दिखाएंगे Manish Wadhwa, बोले- ऐसा किरदार ठुकराना मुश्किल था
Twisha Sharma Death Murder Case: कोर्ट में आज आमने-सामने होंगे गिरिबाला और समर्थ | CBI | Giribala Singh |

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
US Ro Khanna: अमेरिका में हिंदुओं पर हमले, नफरत बर्दाश्त नहीं! US संसद में लाया गया प्रस्ताव, इकट्ठे हो गए 32 MP
अमेरिका में हिंदुओं पर हमले, नफरत बर्दाश्त नहीं! US संसद में लाया गया प्रस्ताव, इकट्ठे हो गए 32 MP
'हम क्यों फाजिल कहें', CM योगी ने बदल दिया यूपी के फाजिलनगर का नाम, अब यह कहा जाएगा
'हम क्यों फाजिल कहें', CM योगी ने बदल दिया यूपी के फाजिलनगर का नाम, अब यह कहा जाएगा
'तृणमूलाइजेशन नहीं...', बंगाल BJP चीफ ने ममता के बागियों को दिखाया रेड फ्लैग, एंट्री का दरवाजा बंद!
'तृणमूलाइजेशन नहीं...', बंगाल BJP चीफ ने ममता के बागियों को दिखाया रेड फ्लैग, एंट्री का दरवाजा बंद!
पीवी सिंधु का दावा उनकी वजह से आरसीबी टीम की हुई जीत, फैंस को कहा- जरा हिसाब लगाइए
पीवी सिंधु का दावा उनकी वजह से आरसीबी टीम की हुई जीत, फैंस को कहा- जरा हिसाब लगाइए
100 करोड़ की मालकिन हैं सुष्मिता सेन, एक्टिंग नहीं…हीरों के बिजनेस से भी करती हैं करोड़ों की कमाई
100 करोड़ की मालकिन हैं सुष्मिता, एक्टिंग नहीं…हीरों के बिजनेस से कमाती हैं करोड़ों
Explained: जून तो आ गया लेकिन मानसून क्यों नहीं? केरलम में 3 दिन में पहुंचने की उम्मीद, आपके राज्य में कब देगा दस्तक?
जून तो आ गया लेकिन मानसून क्यों नहीं? केरलम में 3 दिन में पहुंचने की उम्मीद, आपके राज्य में कब?
'...तो तुम जेल में होते', ट्रंप की फटकार के बाद नेतन्याहू ने पीछे खींचे कदम, लेबनान पर हमला नहीं करेगा इजरायल
'...तो तुम जेल में होते', ट्रंप की फटकार के बाद नेतन्याहू ने पीछे खींचे कदम, लेबनान पर रोके हमले
ChatGPT को भूल जाइए, OpenAI का नया AI महामारियों से लड़ने की करेगा तैयारी
ChatGPT को भूल जाइए, OpenAI का नया AI महामारियों से लड़ने की करेगा तैयारी
Embed widget