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आखिर सभी हाईवे पर रातभर लाइटें क्यों नहीं जलतीं? NHAI ने बताई ऐसी वजह, जिसे ज्यादातर लोग नहीं जानते

Highway Lights: सभी हाईवे पर पूरी रात स्ट्रीट लाइट नहीं जलतीं. NHAI के अनुसार इसके पीछे सुरक्षा, लागत और तकनीकी कारण हैं. जानिए आखिर किन जगहों पर ही लाइट लगाने की जरूरत पड़ती है.

Highway Lights: रात के समय हाईवे पर सफर करते हुए अक्सर लोगों के मन में एक सवाल आता है कि आखिर सभी राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर पूरी रात स्ट्रीट लाइटें क्यों नहीं जलतीं. शहरों की सड़कों की तरह अगर पूरे हाईवे पर रोशनी हो तो यात्रा और आसान हो सकती है. लेकिन वास्तविकता यह है कि भारत के ज्यादातर हाईवे पूरी तरह रोशन नहीं होते. कई जगह केवल टोल प्लाजा, इंटरचेंज, बड़े चौराहों और आबादी वाले क्षेत्रों के पास ही लाइटें लगाई जाती हैं. 

इस विषय पर NHAI ने भी स्पष्ट किया है कि हर किलोमीटर पर स्ट्रीट लाइट लगाना जरूरी नहीं होता. हाईवे की डिजाइन, वाहन तकनीक, बिजली की लागत और सड़क सुरक्षा जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया जाता है. यही कारण है कि हाईवे पर रोशनी की व्यवस्था सामान्य शहरों की सड़कों से अलग होती है और इसके पीछे कई महत्वपूर्ण वजहें छिपी हैं.

हर जगह लाइट लगाना जरूरी नहीं, हाईवे की डिजाइन भी है वजह

NHAI के अनुसार आधुनिक राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेसवे इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि वाहन चालक अपनी हेडलाइट की मदद से सुरक्षित तरीके से सफर कर सकें. अधिकांश हाईवे पर ट्रैफिक एक दिशा में व्यवस्थित लेन में चलता है और सड़क के बीच डिवाइडर भी होता है. ऐसे में लगातार स्ट्रीट लाइट की जरूरत कम हो जाती है. दूसरी ओर इंटरचेंज, टोल प्लाजा, फ्लाईओवर जंक्शन, सुरंगों के प्रवेश और निकास बिंदुओं जैसी जगहों पर अतिरिक्त रोशनी जरूरी मानी जाती है. 

इन क्षेत्रों में वाहन चालकों को दिशा बदलनी होती है, इसलिए वहां स्ट्रीट लाइट लगाई जाती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि जरूरत के हिसाब से प्रकाश व्यवस्था करना ज्यादा प्रभावी और व्यावहारिक तरीका है. इससे सड़क उपयोगकर्ताओं को जरूरी स्थानों पर बेहतर दृश्यता मिलती है और संसाधनों का सही उपयोग भी होता है.

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बिजली खर्च और रखरखाव भी बनता है बड़ा कारण

देश में हजारों किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग मौजूद हैं. अगर हर हिस्से में पूरी रात स्ट्रीट लाइट चलाई जाए तो बिजली की खपत और रखरखाव का खर्च बहुत अधिक बढ़ जाएगा. लाखों लाइटों के संचालन, मरम्मत और निगरानी के लिए बड़े स्तर पर संसाधनों की जरूरत होगी. यही वजह है कि NHAI जरूरत आधारित प्रकाश व्यवस्था को प्राथमिकता देता है. कई नए प्रोजेक्ट्स में सोलर आधारित लाइटिंग और ऊर्जा बचाने वाली LED तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा रहा है. 

इससे बिजली की बचत के साथ संचालन लागत को भी कम किया जा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षित ड्राइविंग के लिए वाहन की हेडलाइट, सड़क संकेतक और रिफ्लेक्टिव मार्किंग भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं. इसलिए हाईवे पर हर जगह लाइट न होने का मतलब सुरक्षा में कमी नहीं है, बल्कि यह एक सोची समझी और तकनीकी रूप से तैयार की गई व्यवस्था का हिस्सा है.

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हिमांशु सिंह पिछले साढ़े तीन साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. फिलहाल वह ABP News में ऑटो बीट पर कार्यरत हैं. ऑटो सेक्टर में उन्हें नई कारों और बाइक्स के लॉन्च, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, फीचर्स, माइलेज, टेक्नोलॉजी और ऑटो मार्केट से जुड़ी खबरों की अच्छी जानकारी है. वह ऑटो से जुड़ी हर जरूरी और नई जानकारी आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं, ताकि लोग बिना किसी परेशानी के खबरों को समझ सकें.

ABP News से पहले हिमांशु DNP India, Sports Wiki और Hawk E Commerce के साथ काम कर चुके हैं. इस दौरान उन्होंने स्पोर्ट्स, राजनीति और वायरल खबरों पर भी काम किया. अलग-अलग बीट्स पर काम करने की वजह से उन्हें कई तरह की खबरों को समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने का अनुभव मिला.

हिमांशु की कोशिश रहती है कि उनकी खबरें सरल, भरोसेमंद और सीधे लोगों से जुड़ी हों. उन्हें ऐसी खबरों पर काम करना पसंद है, जिनका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है. डिजिटल मीडिया की अच्छी समझ होने की वजह से वह ट्रेंडिंग और जरूरी खबरों को तेजी से पाठकों तक पहुंचाते हैं.

काम के अलावा हिमांशु को क्रिकेट खेलना, स्टैंडअप कॉमेडी करना और नई जगहों पर घूमना पसंद है. उनका मानना है कि नई जगहों को देखना और नए लोगों से मिलना सोच को बेहतर बनाता है, जिसका फायदा उनके काम में भी मिलता है.

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