कार बेचने के बाद भी आपके नाम पर आ रहा चालान, कहां रह गई कमी?
अपनी पुरानी कार बेचने के बाद भी आ रहे हैं ट्रैफिक चालान के मैसेज. ट्रांसफर प्रक्रिया में हुई एक छोटी सी लापरवाही आपको बड़ी कानूनी मुसीबत में डाल सकती है, आइए जानते हैं इसकी मुख्य वजह.

अगर आपने अपनी पुरानी कार बेच दी है और आप यह सोचकर निश्चिंत हैं कि आपकी जिम्मेदारी खत्म हो गई तो आप बड़ी मुसीबत में पड़ सकते हैं. कई बार ऐसा होता है कि गाड़ी बेचने के महीनों बाद भी पुराने मालिक के मोबाइल पर ट्रैफिक पुलिस के ई-चालान आने लगते हैं. जब तक आपके पास नई कार की खुशियां मनाने का समय होता है, तब तक पुरानी गाड़ी का कोई नियम तोड़ने पर जुर्माना आपके नाम फटने लगता है. कानूनी नियमों के मुताबिक, जब तक गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट नए खरीदार के नाम पर ट्रांसफर नहीं हो जाता, तब तक कानून की नजर में आप ही उस गाड़ी के असली मालिक हैं.
RC ट्रांसफर न होना है सबसे बड़ी कमी
गाड़ी बेचने के बाद भी आपके नाम पर चालान आने का एकमात्र और सबसे मुख्य कारण RC का ट्रांसफर न होना है. परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार, गाड़ी का सौदा होने के ठीक 14 दिनों के भीतर RC ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए. जब तक खरीदार RTO में जाकर गाड़ी को अपने नाम पर नहीं करवाता, तब तक सिस्टम में पुराना रिकॉर्ड ही दर्ज रहता है. ऐसे में जब भी वह गाड़ी किसी रेड लाइट को पार करेगी या स्पीड लिमिट तोड़ेगी तो सीसीटीवी कैमरे गाड़ी का नंबर प्लेट देखकर सीधे पुराने मालिक के नाम पर ही ई-चालान भेज देंगे.
अधूरी कागजी कार्रवाई बढ़ाती है परेशानी
अक्सर लोग कार बेचते समय जरूरी फॉर्म और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर तो कर देते हैं, लेकिन उन्हें RTO में जमा करना भूल जाते हैं. मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार बेचने वाले को फॉर्म 29 RTO को भेजना अनिवार्य होता है. इसके साथ ही खरीदार को फॉर्म 30 भरकर RC ट्रांसफर की फीस चुकानी होती है. अगर आपने सिर्फ खरीदार को फॉर्म साइन करके दे दिए हैं और उसने उसे RTO में प्रोसेस नहीं कराया, तो सिस्टम में कोई बदलाव नहीं होगा.
फास्टैग को डिएक्टिवेट न करना भी है बड़ी भूल
कार बेचने के बाद केवल RC ही नहीं, बल्कि गाड़ी में लगा फास्टैग भी आपके बैंक अकाउंट से जुड़ा रहता है. लोग अक्सर गाड़ी सौंपते समय फास्टैग को हटाना या उसे डिएक्टिवेट करना भूल जाते हैं. नतीजा यह होता है कि नई गाड़ी का मालिक टोल प्लाजा से गुजरता है और पैसे आपके खाते से कटते रहते हैं. इसके अलावा, अगर नई गाड़ी का मालिक कोई गंभीर एक्सीडेंट कर देता है या गाड़ी का इस्तेमाल किसी गैर-कानूनी गतिविधि में होता है, तो पुलिस सबसे पहले पुराने मालिक को ही आरोपी मानकर पकड़ती है.
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गलत चालान आ जाए तो तुरंत करें यह काम
अगर कार बेचने के बाद आपके पास कोई गलत चालान आता है तो घबराने के बजाय तुरंत कदम उठाएं. सबसे पहले भारत सरकार के आधिकारिक परिवहन पोर्टल echallan.parivahan.gov.in पर जाएं. वहां ग्रीवेंस या डिस्प्यूट सेक्शन में जाकर आप इस गलत ई-चालान को ऑनलाइन चुनौती दे सकते हैं. इसके लिए आपको कार की बिक्री से जुड़े पुख्ता दस्तावेज, जैसे कि डिलीवरी नोट, हस्तांतरित फॉर्म 29 और 30 की कॉपी और सेल डीड की रसीद अपलोड करनी होगी. यह दस्तावेज इस बात का प्रमाण होते हैं कि चालान कटने की तारीख पर गाड़ी आपके कब्जे में नहीं थी.
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