क्या E20 फ्यूल पहुंचा रहा आपकी गाड़ी के इंजन को नुकसान? टोयोटा और मारुति सुजुकी का आया जवाब
E20 Fuel: कार कंपनियों के मुताबिक, कई बार इंजन में आने वाली दिक्कत की असली वजह खराब क्वालिटी वाला पेट्रोल होता है. यानी अगर किसी पेट्रोल पंप पर फ्यूल में मिलावट है तो उसका असर इंजन पर पड़ सकता है.

भारत में पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाकर तैयार किए जाने वाले E20 फ्यूल की पिछले काफी टाइम से चर्चा हो रही है. कई कार मालिकों का मानना है कि इस फ्यूल के इस्तेमाल से पुरानी गाड़ियों के इंजन को नुकसान पहुंच सकता है. देश की दो बड़ी कार निर्माता कंपनियां टोयोटा और मारुति सुजुकी ने इन सभी दावों को गलत बताया है. कार कंपनियों का कहना है कि E20 फ्यूल को बाजार में लाने से पहले इसकी बड़े लेवल पर टेस्टिंग की गई थी. यह पुरानी और नई दोनों तरह की गाड़ियों के लिए पूरी तरह सेफ है.
मारुति सुजुकी के मुताबिक, कंपनी ने 2010 से पहले बनी अपनी कई कारों पर E20 पेट्रोल की टेस्टिंग की थी. इन टेस्ट के दौरान यह पाया गया कि इंजन के जरूरी हिस्सों में किसी तरह की घिसावट या नुकसान नहीं हुआ. यानी जिन लोगों के पास पुराने मॉडल की मारुति कारें हैं, उन्हें केवल E20 फ्यूल की वजह से इंजन खराब होने की चिंता करने की जरूरत नहीं है.
टोयोटा ने भी इसी तरह का भरोसा जताया है. कंपनी का कहना है कि अब तक उनके पास E20 पेट्रोल की वजह से इंजन खराब होने की कोई शिकायत नहीं आई है. उनके मुताबिक, E20 फ्यूल को सभी जरूरी टेस्टिंग के बाद ही लागू किया गया है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि इंजन से जुड़ी हर समस्या की वजह E20 फ्यूल ही है.
कार कंपनियों का क्या है कहना?
ऑटोमोबाइल कंपनियों के मुताबिक, कई बार इंजन में आने वाली दिक्कत की असली वजह खराब क्वालिटी वाला पेट्रोल होता है. यानी अगर किसी पेट्रोल पंप पर फ्यूल में मिलावट है तो उसका असर इंजन पर पड़ सकता है. यह समस्या E20 लागू होने से पहले भी मौजूद थी और आज भी बनी हुई है. इसलिए हर इंजन खराबी के लिए E20 फ्यूल को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं माना जा सकता.
कंपनियों का यह भी कहना है कि E20 पेट्रोल के कई फायदे हैं. इसमें मौजूद एथेनॉल की वजह से इंजन की नॉकिंग कम होती है. गाड़ी का एक्सीलेरेशन बेहतर हो सकता है और पॉल्यूशन भी कम होता है. यही कारण है कि सरकार और ऑटोमोबाइल कंपनियां इसे पर्यावरण के लिए बेहतर ऑप्शन मानती हैं. भारत में इस फ्यूल को फेजवाइज लागू किया गया ताकि कार निर्माता और ग्राहक दोनों आसानी से इसके लिए तैयार हो सकें.
माइलेज हो सकता है थोड़ा कम
एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि E20 फ्यूल इस्तेमाल करने पर कुछ पुरानी गाड़ियों में माइलेज थोड़ा कम हो सकता है. क्योंकि एथेनॉल की एनर्जी कैपेसिटी नॉर्मल पेट्रोल की तुलना में थोड़ी कम होती है. इसलिए पहले की तुलना में कुछ फीसदी फ्यूल की खपत बढ़ सकती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इंजन को नुकसान होगा.
साल 2023 के बाद भारत में बनने वाली नई कारों को E20 फ्यूल के हिसाब से तैयार करना अनिवार्य कर दिया गया है. यानी नए मॉडल की कारें इस फ्यूल के साथ पूरी तरह अनुकूल हैं. वहीं 2023 से पहले बनी ज्यादातर कारें भी E20 पर चल सकती हैं, हालांकि उनमें माइलेज में थोड़ी कमी देखने को मिल सकती है.
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