2 साल बढ़ी PM E-Drive स्कीम, अब इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर कितनी मिलेगी सब्सिडी?
PM E-Drive Scheme: पहले इस योजना के तहत ज्यादा सब्सिडी मिलती थी. वित्त वर्ष 2024-25 में सब्सिडी 5,000 रुपये प्रति kWh थी जिसकी लिमिट 10,000 रुपये प्रति वाहन थी. 1 अप्रैल 2025 से इसे घटा दिया गया था.

भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की PM E-DRIVE योजना बड़ी भूमिका निभा रही है. सरकार ने इस योजना के टाइम को बढ़ाकर 31 मार्च 2028 तक कर दिया है. हालांकि, यहां एक जरूरी बात यह है कि योजना के सभी इलेक्ट्रिक वाहन सेगमेंट के लिए सब्सिडी की टाइम लिमिट एक जैसी नहीं है.
PM E-DRIVE का पूरा नाम PM Electric Drive Revolution in Innovative Vehicle Enhancement है. इसे केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2024 में शुरू किया था. शुरुआत में यह योजना दो साल के लिए यानी 31 मार्च 2026 तक लागू की गई थी. इसके लिए सरकार ने कुल 10,900 करोड़ रुपये का बजट तय किया था. बाद में योजना का टाइम बढ़ाकर 31 मार्च 2028 कर दिया गया.
अब कितनी मिलेगी सब्सिडी?
- अब संशोधित योजना के तहत, 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2028 के बीच रजिस्टर होने वाले इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स पर सब्सिडी दी जाएगी, जिसके तहत 2,500 रुपये प्रति किलोवाट-घंटा (kWh) बैटरी क्षमता की दर से सब्सिडी दी जाएगी, जिसकी लिमिट 5,000 रुपये प्रति वाहन होगी. इसके साथ ही सिर्फ उन्हीं इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स को इस स्कीम का फायदा मिलेगा जिनकी एक्स-शोरूम कीमत 1.5 लाख रुपये तक होगी.
- आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पहले इस योजना के तहत ज्यादा सब्सिडी मिलती थी. वित्त वर्ष 2024-25 में सब्सिडी 5,000 रुपये प्रति kWh थी जिसकी लिमिट 10,000 रुपये प्रति वाहन थी. 1 अप्रैल 2025 से इसे घटा दिया गया था.
- इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री और इस्तेमाल को बढ़ाना है. इसके साथ ही सरकार EV के लिए जरूरी चार्जिंग नेटवर्क तैयार करने और देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के निर्माण को बढ़ावा देने पर भी जोर दे रही है. यानी योजना को सिर्फ EV सब्सिडी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह भारत के पूरे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को विकसित करने की कोशिश है.

इलेक्ट्रिक बसों के लिए क्या?
- सरकार ने इलेक्ट्रिक बसों के लिए 4,391 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिसके तहत 14,028 इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती का लक्ष्य रखा गया है. इन बसों की खरीद और भुगतान अलग-अलग चरणों में होने हैं, इसलिए योजना को लंबा समय दिया गया है.
- इसके अलावा EV की टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन से जुड़ी एजेंसियों के लिए जरूरी उपकरण खरीदने और उन्हें स्थापित करने में भी समय लगता है. सरकार का मानना है कि बेहतर टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से इलेक्ट्रिक गाड़ियों की सेफ्टी और क्वालिटी को मजबूत किया जा सकेगा.
क्या हर EV पर 2028 तक सब्सिडी मिलेगी?
- PM E-DRIVE योजना का टाइम 2028 तक बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर इलेक्ट्रिक वाहन पर सब्सिडी 2028 तक जारी रहेगी. अगस्त 2025 के ऑफिशियल नोटिफिकेशन में साफ किया गया था कि रजिस्टर्ड इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, ई-रिक्शा, ई-कार्ट और L5 कैटेगरी के इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के लिए उस समय अंतिम तारीख 31 मार्च 2026 रखी गई थी. वहीं योजना के दूसरे हिस्सों को 31 मार्च 2028 तक जारी रखा गया. इसलिए 2028 की तारीख को पूरे PM E-DRIVE योजना का टाइम समझना चाहिए.
- PM E-DRIVE के तहत इलेक्ट्रिक स्कूटर और दूसरे इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की खरीद पर शुरुआती कीमत कम करने के लिए इंसेंटिव दिया जाता है. योजना का मकसद इलेक्ट्रिक स्कूटर की शुरुआती कीमत और पेट्रोल स्कूटर के बीच के अंतर को कम करना है. इससे उन ग्राहकों के लिए EV खरीदना आसान हो सकता है जो शुरुआती कीमत ज्यादा होने की वजह से इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से पीछे हटते हैं.

इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर को भी फायदा
- PM E-DRIVE में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर भी शामिल हैं. इसमें ई-रिक्शा, ई-कार्ट और L5 कैटेगरी के इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर जैसे वाहन आते हैं. इन वाहनों को बढ़ावा देने का उद्देश्य खास तौर पर शहरों और छोटे शहरों में कम प्रदूषण वाले पब्लिक और कमर्शियल ट्रांसपोर्ट को बढ़ाना है. हालांकि, अलग-अलग कैटेगरी के वाहनों के लिए प्रोत्साहन की अवधि और नियम अलग हो सकते हैं. इसलिए सिर्फ योजना के 2028 तक चलने की खबर देखकर किसी खास वाहन पर 2028 तक सब्सिडी मिलने की उम्मीद करना सही नहीं होगा.
- सरकार का फोकस सिर्फ निजी इलेक्ट्रिक स्कूटर या कारों तक सीमित नहीं है. PM E-DRIVE के तहत इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. खासतौर पर इलेक्ट्रिक बसों को बड़े शहरों के पब्लिक ट्रांसपोर्ट में शामिल करने पर जोर है.
- इलेक्ट्रिक ट्रकों को बढ़ावा देना भी जरूरी है क्योंकि भारी कमर्शियल गाड़ियों से बड़ी मात्रा में फ्यूल की खपत और उत्सर्जन होता है. अगर इस सेगमेंट में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इस्तेमाल बढ़ता है तो इससे पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है.
EV चार्जिंग नेटवर्क पर भी खर्च
- इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री बढ़ाने के लिए सिर्फ सब्सिडी देना पर्याप्त नहीं है. लोगों को यह भरोसा भी होना चाहिए कि रास्ते में जरूरत पड़ने पर गाड़ी को चार्ज किया जा सकेगा. इसी वजह से PM E-DRIVE में पब्लिक EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भी शामिल किया गया है. सरकार ने इसके लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है.
- चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार से EV इस्तेमाल करने वालों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक यानी चार्जिंग की उपलब्धता और रेंज एंग्जायटी को कम करने में मदद मिल सकती है.
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