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आजादी के बाद कितनी बदल गई भारत की कारों की तस्वीर? देखें सफर
Independence Day Special: भारत में कारों का सफर कई दशकों पुराना है, लेकिन Maruti Suzuki की एंट्री ने देश के ऑटोमोबाइल बाजार को एक नई दिशा दी. अब बाजार इलेक्ट्रिक कारों की ओर तेजी से बढ़ रहा है.

कितनी बदल गई भारत की कारों की तस्वीर?
Source : Maruti Suzuki
भारत ने आजादी के बाद से हर क्षेत्र में बड़ी तरक्की की है और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री भी इस बदलाव का अहम हिस्सा रही है. एक समय था जब देश की सड़कों पर गिनी-चुनी कारें ही नजर आती थीं और Hindustan Ambassador जैसी कारें स्टेटस और रुतबे की पहचान मानी जाती थीं.
इसके बाद Maruti 800 ने आम लोगों के लिए कार खरीदने का सपना आसान बनाया. धीरे-धीरे SUV, सेडान, MPV और प्रीमियम कारों का दौर आया और अब भारतीय बाजार इलेक्ट्रिक कारों की ओर तेजी से बढ़ रहा है.
कितनी बदल गई तस्वीर?
- आजादी के बाद भारतीय कार बाजार में Hindustan Ambassador का नाम सबसे खास रहा. हिन्दुस्तान मोटर्स ने 1957 में इस कार का प्रोडक्शन शुरू किया था और यह 2014 तक भारतीय बाजार में बनी रही. लंबे समय तक Ambassador को देश की सबसे पहचान वाली कारों में गिना जाता रहा.
- इसका डिजाइन काफी मजबूत था और इसमें यात्रियों के लिए अच्छा खासा केबिन स्पेस मिलता था. यही वजह थी कि यह कार नेताओं, कारोबारियों और सरकारी अधिकारियों के बीच काफी पॉपुलर रही. एक दौर में Ambassador को भारतीय सड़कों पर रुतबे और सरकारी व्यवस्था की पहचान तक माना जाता था.
- भारत में कारों का सफर कई दशकों पुराना है, लेकिन Maruti Suzuki की एंट्री ने देश के ऑटोमोबाइल बाजार को एक नई दिशा दी. 1980 के दशक की शुरुआत में कार खरीदना आम लोगों के लिए आसान नहीं था. उस समय कारें महंगी थीं और ऑप्शन भी बहुत कम थे.
- ऐसे समय में Maruti Suzuki की शुरुआत हुई और कुछ ही सालों बाद आई Maruti 800 ने भारतीयों की कार को लेकर सोच ही बदल दी. कंपनी का सफर 1981 में शुरू हुआ और 1983 में Maruti 800 को भारतीय बाजार में उतारा गया.

1981 में हुई Maruti की शुरुआत
- Maruti Suzuki का सफर साल 1981 में शुरू हुआ. उस समय कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसी कार तैयार करना थी, जिसे आम लोग भी खरीद सकें. भारत में उस दौर में कारों की संख्या काफी कम थी और कार रखना ज्यादातर लोगों के लिए बड़ी बात माना जाता था. Maruti की शुरुआत का मकसद सिर्फ एक नई कार बेचना नहीं था, बल्कि देश में किफायती और ज्यादा लोगों की पहुंच वाली कार लाना था. यही सोच आगे चलकर कंपनी की सबसे बड़ी ताकत बनी.
- कंपनी के सफर का सबसे बड़ा मोड़ 1983 में Maruti 800 के लॉन्च के साथ आया. यह छोटी, किफायती और इस्तेमाल में आसान कार थी. भारतीय ग्राहकों ने इसे काफी पसंद किया और देखते ही देखते यह देश की सबसे पॉपुलर कारों में शामिल हो गई. उस समय भारतीय बाजार में बड़ी और महंगी कारों का दबदबा था. ऐसे में Maruti 800 ने आम लोगों के लिए फॉर व्हीलर खरीदने का रास्ता आसान किया. बहुत से परिवारों के लिए यह उनकी पहली कार बनी और धीरे-धीरे कार सिर्फ अमीर लोगों की जरूरत नहीं रह गई.
- Maruti 800 की सफलता सिर्फ इसकी बिक्री तक सीमित नहीं थी. इस कार ने लोगों की जीवनशैली और सफर करने के तरीके पर भी असर डाला. पहले जहां परिवार लंबी दूरी की यात्रा के लिए बस, ट्रेन या दूसरे साधनों पर निर्भर रहते थे, वहीं अपनी कार होने से सफर ज्यादा सुविधाजनक हो गई.
- छोटी कार होने के चलते इसे शहरों में चलाना भी आसान था. इसकी किफायती कीमत और डिजाइन ने इसे मिडिल क्लास वर्ग के बीच खास पहचान दिलाई. इसी वजह से Maruti 800 को भारत में मिडिल क्लास के कार सपने को साकार करने वाली कारों में से एक माना जाता है. Maruti 800 की शुरुआती कीमत करीब 47,500 रुपये थी और इसने उस समय की पॉपुलर Ambassador को कड़ी चुनौती दी थी.
अब भारत में पॉपुलर हो रहे ये मॉडल
- Maruti 800 की सफलता कंपनी के लिए सिर्फ शुरुआत थी. इसके बाद Maruti Suzuki ने भारतीय ग्राहकों की अलग-अलग जरूरतों को समझते हुए कई नए मॉडल बाजार में उतारे. कंपनी ने छोटी कारों के साथ-साथ सेडान, MPV और SUV सेगमेंट में भी अपनी मौजूदगी मजबूत की.
- समय के साथ Alto, WagonR, Swift, Dzire, Ertiga, Brezza और Grand Vitara जैसे मॉडल भारतीय बाजार में काफी पॉपुलर हुए. इससे कंपनी का ग्राहक आधार लगातार बढ़ता गया. वहीं Maruti Suzuki आज भारत की सबसे बड़ी कार कंपनियों में शामिल है और इसके पोर्टफोलियो में कई अलग-अलग सेगमेंट की कारें मौजूद हैं.
- सिर्फ कम कीमत और अच्छा माइलेज ही काफी नहीं था. ग्राहक बेहतर डिजाइन, परफॉर्मेंस, फीचर्स और आराम भी चाहते थे. इसी बदलाव के दौर में Maruti Swift जैसी कारों ने कंपनी को युवाओं के बीच मजबूत पहचान दिलाई. Swift को 2005 में पेश किया गया और अपने आकर्षक डिजाइन, किफायती कीमत और ड्राइविंग फील के चलते यह तेजी से पॉपुलर हुई.

- भारत में SUV का क्रेज बढ़ने के साथ Maruti Suzuki ने भी इस सेगमेंट पर फोकस बढ़ाया. e- Vitara Brezza, S-Presso, Fronx, Jimny और Grand Vitara जैसे मॉडल कंपनी के SUV पोर्टफोलियो का हिस्सा बने. खास बात यह है कि SUV की पॉपुलेरिटी भारत में अचानक नहीं बढ़ी. ग्राहकों की जरूरत धीरे-धीरे बदलती गई. लोग ऐसी कार चाहते थे जो शहर में आसानी से चले, लेकिन साथ ही ज्यादा ग्राउंड क्लीयरेंस, बेहतर रोड प्रेजेंस और ज्यादा स्पेस भी दे. Maruti ने इसी बदलती मांग के हिसाब से अपने पोर्टफोलियो को विस्तार दिया.
4 दशक से ज्यादा का सफर
- Maruti Suzuki का सफर अब चार दशक से भी ज्यादा लंबा हो चुका है. कंपनी ने 1981 में शुरुआत की थी और आज यह भारत के ऑटोमोबाइल बाजार की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल है. कंपनी का सफर अब पेट्रोल कारों तक सीमित नहीं है. कंपनी इलेक्ट्रिक और फ्लेक्स-फ्यूल जैसी नई तकनीकों पर भी काम कर रही है.
- कंपनी ने भारत में अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार लॉन्च कर दी है और इसे भारत में बनाकर दूसरे देशों में भी एक्सपोर्ट किया जा रहा है. इसके अलावा Maruti ने फ्लेक्स-फ्यूल WagonR भी पेश की है, जो E85 यानी 85 फीसदी एथनॉल और 15 फीसदी पेट्रोल वाले फ्यूल पर चल सकती है. इससे साफ है कि कंपनी अब बदलते ऑटोमोबाइल बाजार और वैकल्पिक फ्यूल की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है.
- अगर पूरे सफर को देखें तो 1981 में शुरू हुई Maruti Suzuki की कहानी 1983 की Maruti 800 से आम भारतीय परिवारों के घर तक पहुंची. इसके बाद कंपनी ने अलग-अलग समय पर ग्राहकों की बदलती जरूरतों के हिसाब से नई कारें पेश की.पहले फोकस था कि आम आदमी कम कीमत में कार खरीद सके. फिर माइलेज, ज्यादा स्पेस और आराम जरूरी हुआ. इसके बाद डिजाइन, फीचर्स और परफॉर्मेंस की मांग बढ़ी और आज भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी बन गई है.
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