अब बिना PUC नहीं चल जाएंगी सरकारी गाड़ियां, कटेगा चालान
बिना PUC नहीं चलेंगी सरकारी गाड़ियां, एनजीटी के सख्त निर्देश के बाद दिल्ली सरकार अलर्ट, अब नियम तोड़ने पर सीधे कटेगा भारी चालान.

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण NGT ने एक बहुत बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया है. एनजीटी ने साफ कर दिया है कि प्रदूषण फैलाने के मामले में अब सरकारी गाड़ियों को भी कोई छूट नहीं मिलेगी. एनजीटी ने दिल्ली सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि बिना वैध पॉल्यूशन सर्टिफिकेट PUC के सड़कों पर दौड़ने वाली सभी सरकारी गाड़ियों पर तुरंत रोक लगाई जाए और उनका भारी चालान काटा जाए. इस फैसले के बाद अब सरकारी विभागों के अधिकारियों और ड्राइवरों में हड़कंप मच गया है.
क्या है पूरा मामला?
NGT चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डॉ. अफरोज अहमद ने यह आदेश जितेंद्र महाजन नाम के शख्स की याचिका पर सुनाया. महाजन ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि दिल्ली में कई सरकारी और सरकार द्वारा किराए पर ली गई गाड़ियां बिना वैध PUC सर्टिफिकेट के ही सड़कों पर चल रही हैं. सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार ने भी इस बात से इनकार नहीं किया कि PUC के नियम सरकारी और निजी, दोनों तरह की गाड़ियों पर बराबर लागू होने चाहिए.
आम जनता के बाद अब सरकारी गाड़ियां
आमतौर पर देखा जाता है कि ट्रैफिक पुलिस सड़कों पर आम जनता की गाड़ियों को रोककर उनका PUC सर्टिफिकेट चेक करती है. सर्टिफिकेट न होने पर 10,000 रुपये का भारी-भरकम चालान भी काटा जाता है. लेकिन कई बार सरकारी विभागों, पुलिस और नगर निगम की गाड़ियों की जांच नहीं हो पाती थी. एनजीटी के पास आई एक शिकायत में यह बात सामने आई कि दिल्ली सरकार के कई विभागों की गाड़ियां बिना वैध पीयूसी सर्टिफिकेट के सड़कों पर चल रही हैं और प्रदूषण बढ़ा रही हैं.
पुरानी गाड़ियों पर पहले से ही बैन
NGT ने यह भी याद दिलाया कि PUC सर्टिफिकेट सॉफ्टवेयर में पहले से ही एक व्यवस्था है, जिसके तहत 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियों और 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को सर्टिफिकेट जारी ही नहीं किया जाता. यह नियम भी सरकारी और निजी गाड़ियों पर समान रूप से लागू होता है. फिलहाल दिल्ली में करीब 950 PUC सेंटर चल रहे हैं, जहां गाड़ियों की जांच होती है.
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आम लोगों के लिए क्या मायने?
दिल्ली में पहले से ही बिना PUC सर्टिफिकेट के गाड़ी चलाने पर आम लोगों को 10,000 रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ता है. अब तक यह सख्ती ज्यादातर निजी वाहनों पर ही देखी जाती थी, लेकिन NGT के इस ताजा आदेश के बाद सरकारी गाड़ियों पर भी वही नियम पूरी सख्ती से लागू होंगे. NGT का मानना है कि जब आम जनता से नियमों का पालन कराया जाता है, तो सरकारी विभागों को भी नियमों का करना चाहिए.
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