Turbo इंजन वाली कार खरीदने की सोच रहे हैं, पहले जान लें फायदे ज्यादा है या जेब पर बढ़ेगा खर्च?
Turbo Engine Pros and Cons: टर्बो पेट्रोल कार खरीदने का है प्लान? पहले जान लें इसके फायदे, नुकसान और माइलेज का पूरा सच ताकि बाद में पछताना न पड़े.

Turbo Engine Pros and Cons: ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में पिछले कुछ सालों में बहुत बदलाव आया है और अब इंडस्ट्री आगे भी नई तकनीक के साथ गाड़ियां निकाल सकती हैं. आजकल कार मार्केट में टर्बो पेट्रोल इंजन का क्रेज बढ़ता जा रहा है. जैसे ही आप शोरूम में नई गाड़ी खरीदने जाते हैं सेल्समैन आपको नॉर्मल इंजन की जगह टर्बो-पेट्रोल इंजन वाली गाड़ी लेने की सलाह देने लगते हैं.
बता दें कि, कंपनियां भी छोटे इंजन में टर्बोचार्जर लगाकर उसे सुपरफास्ट और दमदार बनाकर बेच रही हैं. तो चलिए आइए आज बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं कि टर्बो इंजन आपके लिए कितना फायदेमंद है और यह आपकी जेब पर कितना भारी पड़ सकता है.
गाड़ी चलाने का मिलता है असली मजा
बता दें कि, टर्बो इंजन का सबसे बड़ा फायदा इसकी पावर का है. यह इंजन नॉर्मल यानी नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन के मुकाबले कहीं ज्यादा हवा और फ्यूल को कंप्रेस करके बर्न करता है. इसका मतलब यह हुआ कि जैसे ही आप एक्सीलेटर पर पैर रखते हैं गाड़ी सीधे रॉकेट की तरह भागती है.
जबकि हाईवे पर ओवरटेक करना हो या पहाड़ पर गाड़ी चढ़ानी हो टर्बो इंजन आपको कभी भी पावर की कमी महसूस नहीं होने देता. अगर आपको ड्राइविंग का असली शौख है और तेज रफ्तार पसंद है तो यह इंजन आपको बेहद पसंद आएगा.
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माइलेज में आती है गिरावट
हालांकि टर्बो पेट्रोल में आपको पॉवर तो मिलता है लेकिन टर्बो इंजन वाली कारों के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इनका माइलेज आपके ड्राइविंग स्टाइल पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है. अगर आप हाईवे पर एक फिक्स स्पीड में गाड़ी चलाएंगे तो यह बहुत शानदार माइलेज देगी.
लेकिन जैसे ही आप सिटी के बंपर-टू-बंपर ट्रैफिक में आते हैं या बार-बार एक्सीलेटर दबाते हैं तो इसका माइलेज अचानक बहुत तेजी से गिर जाता है. कई बार तो यह नॉर्मल कार के मुकाबले आधा माइलेज ही दे पाती है जो आपके बजट को पूरी तरह से बिगाड़ सकती है.
मेंटेनेंस में होता है खर्च
आपको बता दें कि टर्बोचार्जर एक बहुत ही कॉम्प्लेक्स और एडवांस टेक्नोलॉजी है. जो बेहद हाई टेंपरेचर और प्रेशर पर काम करती है. इसका मतलब यह है कि इस इंजन को आम गाड़ियों के मुकाबले ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है.
इसमें आपको हमेशा प्रीमियम क्वालिटी का सिंथेटिक इंजन ऑयल डालना पड़ता है जो काफी महंगा आता है. इसके अलावा सर्विसिंग का खर्च भी नार्मल कारों से 15 से 20 परसेंट ज्यादा होता है. गाड़ी स्टार्ट करने के बाद और बंद करने से पहले 30 सेकंड तक स्टार्ट रखने का नियम भी आपको रोज फॉलो करना पड़ता है.
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