कार का Ground Clearance असल में कितना जरूरी, क्या है सही पैमाना?
भारतीय सड़कों के लिए 170 से 200mm ग्राउंड क्लीयरेंस अच्छा माना जाता है, सेडान में यह अक्सर कम होता है जबकि एसयूवी में ज्यादा, सस्पेंशन और टायर साइज भी उतने ही जरूरी हैं.

भारत में कार पसंद करते वक्त माइलेज और फीचर्स के साथ ग्राउंड क्लीयरेंस को भी जरूर देखना चाहिए. लोग अक्सर नई कार खरीदते वक्त इंजन, माइलेज और फीचर्स पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन एक चीज अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, ग्राउंड क्लीयरेंस. खासकर भारत जैसी सड़कों पर, जहां गड्ढे और स्पीड ब्रेकर आम बात हैं, यह चीज कार के आराम और सेफ्टी दोनों पर सीधा असर डालती है.
आखिर ग्राउंड क्लीयरेंस होता क्या है
आसान भाषा में समझें तो कार के सबसे निचले हिस्से और सड़क के बीच की दूरी को ही ग्राउंड क्लीयरेंस कहते हैं. यह जितनी ज्यादा होगी, कार उतनी ही आसानी से उबड़ खाबड़ रास्तों, गड्ढों और ऊंचे स्पीड ब्रेकर से बिना नुकसान के गुजर पाएगी. वहीं कम ग्राउंड क्लीयरेंस वाली कार में अक्सर नीचे का हिस्सा टकराने का डर बना रहता है, जिससे साइलेंसर, बंपर या इंजन गार्ड जैसे पार्ट्स को नुकसान पहुंच सकता है, और बार बार मरम्मत का खर्चा भी उठाना पड़ सकता है.
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कितना क्लीयरेंस माना जाता है सही
भारतीय सड़कों के हिसाब से आमतौर पर 170 से 200 मिलीमीटर के बीच का ग्राउंड क्लीयरेंस बेहतर माना जाता है. सिडान कारों में यह अक्सर कम होता है, यही वजह है कि स्पीड ब्रेकर पर सिडान कार का पेट लगने की शिकायत ज्यादा आती है. वहीं एसयूवी और कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट की कारें आमतौर पर इससे ज्यादा क्लीयरेंस के साथ आती हैं, इसलिए गांव, कस्बों और पहाड़ी इलाकों में इन्हें ज्यादा पसंद किया जाता है.
बाकी चीजें भी हैं मायने रखती
सिर्फ ग्राउंड क्लीयरेंस देखकर कार का पूरा परफॉर्मेंस नहीं आंका जा सकता है. सस्पेंशन की मजबूती, व्हीलबेस, टायर का साइज और फ्रंट रियर ओवरहैंग भी इस बात में अहम रोल निभाता है कि कार असल में कितनी ऊबड़ खाबड़ सड़क को झेल सकेगी. यानी सिर्फ नंबर पर भरोसा करने की बजाय पूरी गाड़ी की बनावट पर ध्यान देना जरूरी है.
क्या कुछ और भी ही जरूरी
गांव या कस्बों में रहने वाले लोगों के लिए ग्राउंड क्लीयरेंस और भी अहम होता है, क्योंकि वहां की सड़कें अक्सर कच्ची या टूटी फूटी होती हैं. यही वजह है कि रेनो क्विड जैसी छोटी कारें भी ग्रामीण भारत में पसंदीदा है, क्योंकि इनका ग्राउंड क्लीयरेंस अच्छा होता हहै और यह रफ टफ रास्तों पर भी आराम से चल जाती हैं.
पहले टेस्ट ड्राइव जरूर लें
सिर्फ ब्रोशर में लिखे नंबर पर भरोसा करने के बजाय, कार खरीदने से पहले उसे किसी खराब या ऊबड़ खाबड़ सड़क पर टेस्ट ड्राइव जरूर करें. इससे पता चल जाएगा कि असल जिंदगी में कार का ग्राउंड क्लीयरेंस आपकी जरूरत के हिसाब से है या नहीं.
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