New Car Testing: शोरूम में बिकने से पहले नई गाड़ी कितनी बार टेस्ट की जाती है, जानें क्या-क्या चेक होता है?
कार बनने के बाद सबसे पहले फैक्ट्री में उसका क्वालिटी टेस्ट किया जाता है. इस दौरान इंजन, ब्रेक, स्टीयरिंग, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, लाइट्स, एयरबैग और दूसरे जरूरी फीचर्स की जांच होती है.

New Car Testing: नई कार खरीदना हर किसी के लिए एक खास मौका होता है, लेकिन कई बार डिलीवरी के समय जब नई गाड़ी के ओडोमीटर पर 20, 30 या 50 किलोमीटर दिखाई देता है तो खरीदार के मन में सवाल उठ जाते हैं कि यह गाड़ी पहले से चली हुई तो नहीं है. किसी भी कार को ग्राहक तक पहुंचाने से पहले कई स्तर की टेस्टिंग से गुजरना पड़ता है. फैक्ट्री से लेकर शोरूम तक पहुंचाने के दौरान गाड़ी की क्वालिटी और सेफ्टी परफॉर्मेंस के लिए अलग-अलग टेस्ट किए जाते हैं. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि शोरूम में बिजनेस से पहले नई गाड़ी कितनी बार टेस्ट की जाती है और इसे लेकर इसे क्या-क्या चेक होता है.
फैक्ट्री में सबसे पहले होता है क्वालिटी टेस्ट
कार बनने के बाद सबसे पहले फैक्ट्री में उसका क्वालिटी टेस्ट किया जाता है. इस दौरान इंजन, ब्रेक, स्टीयरिंग, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, लाइट्स, एयरबैग और दूसरे जरूरी फीचर्स की जांच होती है. कई कंपनियां स्पेशल टेस्ट ट्रैक पर गाड़ी को चलाकर भी देखते हैं, ताकि किसी तकनीकी खराबी का पता लगाया जा सके.
रोड टेस्ट के कारण बढ़ता है ओडोमीटर
ज्यादातर ऑटोमोबाइल कंपनियां हर कार का रोड टेस्ट करती है. इस टेस्ट में गाड़ी को कुछ किलोमीटर तक चलाकर इंजन की परफॉर्मेंस, ब्रेकिंग, गियर, शिफ्टिंग और सस्पेंशन की जांच की जाती है. इस वजह से नई कार के ऑडोमीटर पर कुछ किलोमीटर पहले से दिखाई देना सामान्य बात है.
स्टॉक यार्ड और ट्रांसपोर्ट के दौरान भी चलती है कार
फैक्ट्री से निकलने के बाद कार को ट्रक के जरिए स्टॉक यार्ड और फिर डीलरशिप तक पहुंचाया जाता है. इस दौरान कई बार कार्ड को लोड-अनलोड करने के लिए चलाया जाता है. यही वजह है की डिलीवरी के समय ओडोमीटर पर 10 से 50 किलोमीटर तक की रीडिंग दिखाई देती है.
शोरूम में होता है प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन
ग्राहक को गाड़ी सौंपने से पहले डीलरशिप स्तर पर प्री डिलीवरी इंस्पेक्शन यानी पीडीआई किया जाता है. इसमें पेंट क्वालिटी, इलेक्ट्रॉनिक फीचर, एसी, वाइपर, टायर, बैटरी, इन्फोटेनमेंट सिस्टम और दूसरे जरूरी हिस्सों की जांच की जाती है. कई बार इस प्रक्रिया के दौरान भी कार को थोड़ी दूरी तक चला कर देखा जाता है.
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कितनी ओडोमीटर रीडिंग नॉर्मल?
ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार नई कार में आमतौर पर 10 से 15 किलोमीटर तक की रीडिंग नॉर्मल मानी जाती है. कुछ मामलों में यह 80 से 100 किलोमीटर तक भी हो सकती है. खासकर तब जब कार के स्टॉक यार्ड और शोरूम के बीच कई बार मूव किया गया हो, हालांकि अगर ओडोमीटर 100 किलोमीटर से काफी ज्यादा दिख रहा है तो खरीदार को डीलर से इसकी वजह जरुर पूछनी चाहिए.
डिलीवरी से पहले किन चीजों की करनी चाहिए जांच?
नई कार लेते समय केवल ऑडोमीटर ही नहीं बल्कि वीआईएन नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट, टायर के निर्माण की डेट, बैटरी की तारीख और पूरी बॉडी की जांच भी करनी चाहिए. साथ ही यह कंफर्म करना चाहिए कि गाड़ी पर किसी तरह की रिपेयरिंग या स्क्रैच के निशान ना हो.
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