Tubeless Tyres: कैसे काम करते हैं ट्यूबलेस टायर, क्यों कील घुसने के बाद भी तुरंत नहीं निकलती एयर?
Tubeless Tyres: ट्यूबलेस टायर की खास डिजाइन ही इसकी ताकत है, इसी वजह से पंचर होने पर भी यह तुरंत जवाब नहीं देता और कोई बड़ी दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न नहीं होती, आइए समझते हैं कैसे.

Tubeless Tyres: आजकल लगभग हर नई कार या बाइक में ट्यूबलेस टायर का इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन हमारे मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि अगर इन टायरों में कील घुस जाए या कोई और नुकसान हो जाए, तो इसकी हवा तुरंत क्यों नहीं निकलती. इसका जवाब ट्यूबलेस टायर की खास बनावट और काम करने के तरीके में छिपा होता है.
कैसे काम करता है ट्यूबलेस टायर?
ट्यूबलेस टायर में अलग से कोई 'ट्यूब' नहीं होती. इसमें टायर और व्हील (रिम) मिलकर एक एयरटाइट चैंबर बनाते हैं. ट्यूबलेस टायर के अंदर एक खास रबर की परत होती है, जिसे इनर लाइनर कहा जाता है, जो हवा को बाहर निकलने नहीं देती. जब टायर में हवा भरी जाती है, तो यह हवा का दबाव टायर को रिम से मजबूती से चिपका देता है. इस वजह से टायर और रिम के बीच कोई गैप नहीं रहता और पूरा सिस्टम सील हो जाता है. इसके अलावा, टायर का वाल्व भी सीधे रिम पर फिट होता है, जिससे हवा सिर्फ एक ही रास्ते से अंदर-बाहर जा सकती है और लीकेज की संभावना कम होती है.
ट्यूबलेस टायर में पंचर होने पर क्या होता है?
जब किसी ट्यूब वाले टायर में कील घुसती है, तो अंदर की ट्यूब तुरंत फट जाती है और हवा तेजी से बाहर निकलने लगती है. लेकिन ट्यूबलेस टायर में ऐसा नहीं होता. इसमें जब कील घुसती है, तो आमतौर पर छेद बहुत छोटा होता है और केवल उसी छोटे छेद से हवा बाहर निकलती है. यही कारण है कि हवा धीरे-धीरे निकलती है.
कील घुसने के बाद हवा तुरंत क्यों नहीं निकलती?
कील घुसने के बाद ट्यूबलेस टायर से हवा तुरंत नहीं निकलती, क्योंकि कील खुद ही एक तरह से 'प्लग' का काम करती है और छेद को एक तरीके से बंद कर देती है, जिससे हवा के बाहर निकलने का रास्ता बहुत छोटा हो जाता है. साथ ही, टायर का एयरटाइट डिजाइन हवा को कहीं और से निकलने नहीं देता, इसलिए वह सिर्फ उसी छोटे छेद से धीरे-धीरे बाहर आती रहती है. इसके अलावा, अंदर का एयर प्रेशर टायर को रिम से मजबूती से चिपकाए रखता है, जिससे कोई बड़ा गैप नहीं बन पाता. हालांकि, कुछ टायर खुद ठीक हो जाते हैं, क्योंकि कई मामलों में ऐसा देखा गया है कि अंदर मौजूद Sealent छोटे छेद (लगभग 3 से 6 mm) को भरकर लीकेज को कम या बंद कर देता है.
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ट्यूबलेस टायर क्यों ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं?
- इसमें अचानक ब्लास्ट होने का खतरा कम होता है.
- दुर्घटना के दौरान ड्राइवर को गाड़ी कंट्रोल करने का समय मिल जाता है.
- हाई स्पीड पर भी सेफ्टी और बैलेंस बेहतर रहती है.
- छोटे पंचर खुद ही कंट्रोल हो सकते हैं, जिससे जल्दी दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न नहीं होती.
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Source: IOCL


























