EV चलाना सस्ता, पर Repair महंगी? Insurance के आंकड़ों में खुलासा
Policybazaar के आंकड़ों के अनुसार, 10–15 लाख रुपये की EVs के औसत इंश्योरेंस क्लेम पेट्रोल-डीजल कारों से 14% ज्यादा रहे. जानें मरम्मत खर्च, मानसून के जोखिम और जरूरी इंश्योरेंस कवर

इलेक्ट्रिक कारों को अक्सर पेट्रोल और डीजल कारों के मुकाबले कम रनिंग कॉस्ट वाला विकल्प माना जाता है. लेकिन दुर्घटना के बाद मरम्मत का खर्च कितना हो सकता है, यह भी कार खरीदने से पहले समझना जरूरी है. Policybazaar के हालिया आंकड़ों के अनुसार, 10 से 15 लाख रुपये की कीमत वाली कारों के पहले तीन साल के दौरान इलेक्ट्रिक कारों के औसत इंश्योरेंस क्लेम की रकम 41,543 रुपये रही.
वहीं, इसी कीमत की पेट्रोल और डीजल कारों के लिए यह आंकड़ा 36,185 रुपये था. यानी इलेक्ट्रिक कारों के औसत क्लेम की रकम करीब 14 प्रतिशत ज्यादा रही. यह तुलना बड़े नुकसान वाले क्लेम को शामिल किए बिना की गई है. इसका मतलब यह नहीं है कि हर EV की मरम्मत महंगी होगी, लेकिन यह आंकड़ा दिखाता है कि इलेक्ट्रिक कार खरीदते समय इंश्योरेंस और मरम्मत के खर्च को भी ध्यान में रखना चाहिए.
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EV की Repair पर ज्यादा खर्च क्यों आता है.
इलेक्ट्रिक कारों में बैटरी पैक, इलेक्ट्रिक मोटर और कई आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम होते हैं. इनमें से किसी महंगे हिस्से को नुकसान पहुंचने पर मरम्मत या बदलाव का खर्च बढ़ सकता है. Policybazaar के मुताबिक, मॉडल के आधार पर बैटरी बदलने की लागत कार की कुल कीमत के 40 से 50 प्रतिशत तक हो सकती है. इसके अलावा, बैटरी को ठंडा रखने वाला सिस्टम, इंफोटेनमेंट सिस्टम और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक हिस्से भी मरम्मत का खर्च बढ़ा सकते हैं. कुछ मरम्मत के लिए खास उपकरणों और प्रशिक्षित तकनीशियनों की जरूरत होती है. हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर छोटी दुर्घटना में बैटरी बदलनी पड़ेगी. वास्तविक खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि कार के किस हिस्से को कितना नुकसान हुआ है और उसकी मरम्मत संभव है या नहीं.
बारिश में बढ़ सकता है Insurance Claim का खर्च.
रिपोर्ट के अनुसार, मानसून के दौरान इलेक्ट्रिक कारों के औसत इंश्योरेंस क्लेम की रकम करीब 65,000 रुपये तक पहुंच जाती है. बाकी साल में यह औसतन लगभग 52,000 रुपये बताई गई है. यानी बारिश के मौसम में क्लेम की औसत रकम करीब 25 प्रतिशत ज्यादा रही. जलभराव, बाढ़ और पानी से होने वाले नुकसान की वजह से यह खर्च बढ़ सकता है. हालांकि, हर तरह का पानी से जुड़ा नुकसान इंश्योरेंस में कवर हो, यह जरूरी नहीं है. कवरेज पॉलिसी की शर्तों और चुने गए ऐड-ऑन पर निर्भर करता है. आंकड़ों में यह भी सामने आया कि EV मालिकों के बीच बैटरी प्रोटेक्शन कवर लेने का चलन बढ़ा है. पिछले छह महीनों में यह हिस्सा 51 प्रतिशत से बढ़कर 70 प्रतिशत हो गया.
EV Insurance लेते समय किन बातों का रखें ध्यान.
इलेक्ट्रिक कार खरीदने वालों को केवल सबसे सस्ता इंश्योरेंस प्लान चुनने के बजाय उसकी कवरेज भी ध्यान से देखनी चाहिए. पॉलिसी में बैटरी से जुड़े नुकसान, पानी के कारण होने वाली क्षति, डिडक्टिबल और अन्य अपवादों की जानकारी पढ़ना जरूरी है. बैटरी प्रोटेक्शन, जीरो डेप्रिसिएशन, रोडसाइड असिस्टेंस और कंज्यूमेबल्स कवर जैसे ऐड-ऑन जरूरत के हिसाब से उपयोगी हो सकते हैं, लेकिन इनकी शर्तें और कीमत अलग-अलग हो सकती हैं. यह भी जांचें कि आपके शहर में बीमा कंपनी के नेटवर्क में ऐसे गैराज उपलब्ध हैं या नहीं, जहां इलेक्ट्रिक कार की मरम्मत की सुविधा हो. ध्यान रहे कि आंकड़े केवल 10 से 15 लाख रुपये की कारों के शुरुआती तीन साल और बड़े नुकसान वाले क्लेम को छोड़कर की गई तुलना पर आधारित हैं. इसलिए हर मॉडल और हर पॉलिसी का खर्च अलग हो सकता है.
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