E20 फ्यूल से बचने के लिए अब ये रास्ता अपना रहे लोग, गाड़ियों में डलवा रहे ये वाला पेट्रोल
E20 Fuel Controversy: ग्राहकों की मांग है कि उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से फ्यूल चुनने की आजादी मिलनी चाहिए. कुछ लोग चाहते हैं कि पेट्रोल पंपों पर E0, E10 जैसे ऑप्शन मौजूद होने चाहिए.

देश में E20 को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है. कई कार मालिक अब इस पेट्रोल को लेकर सवाल उठा रहे हैं. कई ग्राहक चाहते हैं कि पेट्रोल पंपों पर उन्हें E20 के साथ-साथ बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल या कम एथेनॉल वाला पेट्रोल चुनने का ऑप्शन भी मिले. लोगों का कहना है कि अलग-अलग गाड़ियों की जरूरत और उम्र के हिसाब से फ्यूल चुनने की सुविधा होनी चाहिए.
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में अचानक से प्रीमियम पेट्रोल की मांग बढ़ गई है. यहां महंगे इलाकों में मांग में बढ़ोतरी ज्यादा देखी जा सकती है. इन इलाकों में हाई ऑक्टेन वाले फ्यूल्स की मांग ज्यादा है. कई कार मालिकों की सबसे बड़ी चिंता माइलेज और इंजन की सेहत को लेकर है. लोगों का सवाल है कि जिन पुरानी गाड़ियों को कम एथेनॉल वाले पेट्रोल के हिसाब से बनाया गया था, उनमें E20 इस्तेमाल करने से क्या असर पड़ेगा?
सरकार का क्या हैा कहना?
सरकार ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि E20 पेट्रोल को लेकर कार कंपनियों से भी सलाह ली गई है और इसे धीरे-धीरे लागू किया गया है. सरकार का कहना है कि ज्यादातर गाड़ियां E20 के लिए तैयार हैं. माइलेज को लेकर सरकार ने यह भी माना है कि कुछ गाड़ियों में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से माइलेज में लगभग 3 से 5 फीसदी तक की कमी आ सकती है.
क्या है ग्राहकों की मांग?
ग्राहकों की मांग है कि उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से फ्यूल चुनने की आजादी मिलनी चाहिए. कुछ लोग चाहते हैं कि पेट्रोल पंपों पर E0, E10 जैसे ऑप्शन मौजूद होने चाहिए, ताकि पुरानी और नई गाड़ियों के मालिक अपनी सुविधा के हिसाब से फैसला ले सकें. लेकिन सरकार का कहना है कि देशभर में अलग-अलग तरह के पेट्रोल की सप्लाई और भंडारण इतना आसान नहीं है. इससे पेट्रोल वितरण प्रणाली जटिल और महंगी हो सकती है. सरकार के मुताबिक, इससे किसानों को भी लाभ मिलता है क्योंकि एथेनॉल को बनाने के लिए कृषि उत्पादों का इस्तेमाल किया जाता है.
फिलहाल E20 पेट्रोल को लेकर सरकार और ग्राहकों के बीच बहस जारी है. एक तरफ सरकार इसे भविष्य के लिए बेहतर और ज्यादा साफ ईंधन बता रही है, वहीं दूसरी तरफ कई कार मालिक अपनी गाड़ियों की परफॉर्मेंस, माइलेज और फ्यूल चुनने की आजादी को लेकर सवाल उठा रहे हैं.
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