ईवी कारों की बिक्री में किस देश की बोलती है तूती? ये धुरंधर हैं सबसे पीछे, चौंका देंगे ये नाम
Top Electric Car Selling Countries: दुनिया में सबसे ज्यादा ईवी कारें चीन में बिकती हैं. इसका सबसे बड़ा कारण है चीन द्वारा बिछाया गया अपने देश में चार्जिंग इन्फ्रास्टक्चर का जाल है.

Top Electric Car Selling Countries: आज के समय में ग्लोबल वॉर्मिंग के बढ़ने से दुनिया का हर देश जीवाश्म ईंधन की खपत को कम कर रहें हैं और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा दे रहे हैं. ताकि प्रदुषण को कम किया जा सके. ऐसे में ईवी कारों का इस्तेमाल काफी तेजी से होने लगा हैं, क्योंकि इनके इस्तेमाल से प्रदुषण नहीं होता. चीन दुनिया का ऐसा देश हैं, जो बीते 10 वर्षों से इलेक्ट्रिक कार बेचने के मामले में नंबर 1 पर है। ऐसे में आप सोच रहे होंगे कि आखिरकार ऐसा क्या है चीन के पास कि वहां लोग खूब इलेक्ट्रिक कारें खरीद रहे हैं. दरअसल, इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में चार्जिंग स्टेशन का अहम योगदान है इसलिए चीन ने अपने चार्जिंग स्टेशन इन्फ्रास्टक्चर को काफी बेहतर तरीके से बना रखा है. आइए जानते हैं ग्लोबल ईवी मार्केट का पूरा हाल...
चीन की बोलती है तूती
जब बात इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री और उनके उत्पादन की आती है, तो पूरी दुनिया में चीन का सिक्का चलता है. आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन पूरी दुनिया में जितनी भी इलेक्ट्रिक कारें बिकती हैं, उनमें से लगभग 60% से ज्यादा हिस्सा अकेले चीन का होता है. चीन में अब हालत यह है कि वहाँ बिकने वाली नई कारों में से आधी से ज्यादा गाड़ियां इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड होती हैं. साथ ही चीन की कंपनी BYD ने तो बिक्री के मामले में एलन मस्क की मशहूर कंपनी टेस्ला को भी पछाड़ दिया है. इसका एक बड़ा कारण यह है कि चीन ने बहुत पहले से ही ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर यानी चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाना शुरू कर दिया था, जिसका फायदा उसे आज मिल रहा है.
इस छोटे देश का कमाल
अगर आबादी के हिसाब से देखें, तो नॉर्वे काफी छोटा सा देश है. लेकिन इसने पूरी दुनिया को पीछे छोड़ दिया है. नॉर्वे में नई कारों की कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी लगभग 97% तक पहुंच चुकी है. यानी वहाँ पेट्रोल-डीजल की गाड़ियाँ अब न के बराबर बिकती हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह नॉर्वे सरकार की बेहतरीन नीतियां, भारी टैक्स छूट और मुफ्त पार्किंग जैसी सुविधाओं को माना जाता है. जिससे वहाँ का हर नागरिक ईवी कार खरीदना ज्यादा पसंद करता है.
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ये बड़े देश रह गए पीछे
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बाद भी अमेरिका इस रेस में काफी पीछे है. अमेरिका में नई कारों की बिक्री में ईवी का हिस्सा मात्र 10% के आसपास ही है. साथ ही जापान इस लिस्ट में सबसे पीछे खड़ा नजर आता है, जापान के कार बाजार में ईवी कारों की हिस्सेदारी सिर्फ 2% के करीब है.
हमारा देश भारत भी इस रेस में तेजी से कदम बढ़ा रहा है, भारत में टाटा, महिंद्रा और ओला जैसी कंपनियाँ लगातार नए मॉडल लॉन्च कर रही हैं. हालांकि, अभी भी भारत में चार्जिंग स्टेशनों की कमी और ईवी का महंगा होना एक बड़ी चुनौती है, जिसे दूर करने की कोशिशें जारी हैं.
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