अगर ये छोटी सी ट्रिक अपनाई तो सालों-साल चलेंगे आपके टायर, गाड़ी का माइलेज भी बढ़ेगा
Car Tyre Tips: अगर टायर बहुत ज्यादा घिसे हों तो अचानक फटने या स्लिप होने का खतरा बढ़ जाता है. आमतौर पर हर 5,000 से 8,000 किलोमीटर या 6 महीने में एक बार टायर रोटेशन करवा लेना चाहिए.

कार चलाते समय हम अक्सर इंजन, माइलेज या फीचर्स पर ध्यान देते हैं, लेकिन टायर की सही देखभाल उतनी ही जरूरी होती है. टायर ही गाड़ी का वह हिस्सा है जो सीधे सड़क से जुड़ा होता है, इसलिए इसकी हालत अच्छी होना सुरक्षा और परफॉर्मेंस दोनों के लिए जरूरी है. इसी देखभाल का एक अहम हिस्सा टायर रोटेशन है, जिसे बहुत से लोग नजरअंदाज कर देते हैं. यह छोटा सा काम लंबे समय में बड़ा फायदा देता है.
टायर रोटेशन का मतलब गाड़ी के चारों टायरों की पोजीशन बदलना होता है. यानी आगे के टायर पीछे लगाना या पीछे के आगे या जरूरत के हिसाब से साइड बदलना. ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि गाड़ी के सभी टायर एक समान नहीं घिसते.
क्या हैं फायदे?
आमतौर पर आगे वाले टायर ज्यादा जल्दी घिसते हैं, क्योंकि उन पर इंजन का वजन होता है और ब्रेकिंग का काम भी ज्यादा होता है. वहीं पीछे वाले टायर कम घिसते हैं. अगर आप टायरों को उनकी जगह पर ही छोड़ देते हैं तो कुछ टायर जल्दी खराब हो जाएंगे और कुछ अभी भी ठीक रहेंगे. यहीं पर टायर रोटेशन काम आता है.
जब आप समय-समय पर टायर बदलते रहते हैं तो सभी टायर बराबर घिसते हैं. इससे उनकी लाइफ बढ़ जाती है और आपको एक साथ चारों टायर बदलने का मौका मिलता है, जिससे बार-बार खर्च नहीं करना पड़ता. एक और बड़ा फायदा यह है कि गाड़ी की पकड़ और कंट्रोल बेहतर रहता है. अगर टायर बराबर घिसे हुए हों तो गाड़ी सड़क पर ज्यादा स्थिर रहती है. खासकर बारिश या फिसलन वाली सड़कों पर यह बहुत काम आता है, क्योंकि उस समय अच्छे टायर ही गाड़ी को सुरक्षित रखते हैं.
अगर टायर घिस जाते हैं, तो गाड़ी चलाते समय वाइब्रेशन महसूस हो सकती है या गाड़ी एक तरफ खिंच सकती है. इससे ड्राइविंग आरामदायक नहीं रहती और लंबे समय में गाड़ी के दूसरे पार्ट्स पर भी असर पड़ सकता है. टायर रोटेशन इस समस्या को कम करता है और ड्राइविंग को स्मूद बनाता है.
माइलेज पर भी पड़ता है असर
टायर रोटेशन का असर माइलेज पर भी पड़ता है. जब टायर सही हालत में होते हैं और बराबर घिसे होते हैं, तो गाड़ी को चलाने में कम मेहनत लगती है. इससे इंजन पर दबाव कम पड़ता है और ईंधन की बचत होती है.
अगर टायर बहुत ज्यादा घिसे हों, तो अचानक फटने या स्लिप होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे एक्सीडेंट हो सकता है. आमतौर पर हर 5,000 से 8,000 किलोमीटर या लगभग 6 महीने में एक बार टायर रोटेशन करवा लेना चाहिए. अगर आप खराब सड़कों पर ज्यादा गाड़ी चलाते हैं, तो यह काम और भी जल्दी करना बेहतर होता है.
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