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क्या फाइनेंस वाली गाड़ी नहीं खींच सकते रिकवरी एजेंट? जान लें उत्तराखंड हाई कोर्ट का यह आदेश

Finance Car Recovery Rules: क्या फाइनेंस वाली गाड़ी को रिकवरी एजेंट जबरन उठा सकते हैं? आइए उत्तराखंड हाई कोर्ट का आदेश और सही प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानते हैं.

आजकल बहुत से लोग लोन पर कार खरीदते हैं, लेकिन कई बार किस्त (EMI) न भर पाने की स्थिति में रिकवरी एजेंट गाड़ी उठाने आ जाते हैं. ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या रिकवरी एजेंट आपकी गाड़ी जबरन ले जा सकते हैं या नहीं. इस पर उत्तराखंड हाई कोर्ट का एक अहम फैसला सामने आया है, जो हर वाहन मालिक को जानना चाहिए.

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने साफ किया है कि कोई भी रिकवरी एजेंट या फाइनेंस कंपनी जबरदस्ती आपकी गाड़ी नहीं छीन सकती. अगर आपने लोन नहीं चुकाया है, तो कंपनी को कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी. यानी बिना नोटिस और बिना सही प्रक्रिया के गाड़ी उठाना गलत माना जाएगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि लोगों के साथ बदसलूकी या दबाव बनाना कानून के खिलाफ है.

क्या है सही प्रक्रिया?

अगर किसी व्यक्ति ने कार लोन की किस्तें नहीं भरी हैं, तो बैंक या फाइनेंस कंपनी सबसे पहले उसे नोटिस भेजती है. इसके बाद भी भुगतान नहीं होता है, तो मामला कोर्ट में जा सकता है. कोर्ट के आदेश के बाद ही गाड़ी को जब्त किया जा सकता है. यानी पूरी प्रक्रिया कानून के तहत होती है, न कि जबरदस्ती.

रिकवरी एजेंट क्या कर सकते हैं?

रिकवरी एजेंट का काम सिर्फ ग्राहक से संपर्क करना और भुगतान के लिए कहना होता है. वे आपको समझा सकते हैं, लेकिन डराना, धमकाना या गाड़ी छीनना उनके अधिकार में नहीं आता. अगर कोई एजेंट ऐसा करता है, तो आप उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत कर सकते हैं.

वाहन मालिक के अधिकार क्या हैं?

अगर आपने लोन पर गाड़ी ली है, तब भी आपके कुछ अधिकार होते हैं. कोई भी आपकी संपत्ति बिना कानूनी प्रक्रिया के नहीं ले सकता. अगर आपके साथ गलत व्यवहार होता है, तो आप कानूनी मदद ले सकते हैं. साथ ही, आपको अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है.

किन बातों का रखें ध्यान?

अगर आप लोन पर गाड़ी खरीद रहे हैं, तो समय पर EMI भरना सबसे जरूरी है. अगर किसी वजह से भुगतान नहीं हो पा रहा है, तो बैंक से बात करें और समाधान निकालने की कोशिश करें. इससे आप किसी भी कानूनी परेशानी से बच सकते हैं.

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