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बड़ा पद और अच्छी सैलरी, फिर भी अचानक इस्तीफा क्यों? कुंडली में छिपा होता है संकेत

Jobs Astrology: अच्छा पद, बड़ी सैलरी और सुरक्षित करियर होने के बाद भी लोग नौकरी क्यों छोड़ देते हैं? जानें दशम भाव, षष्ठ भाव, शनि, केतु और दशा की भूमिका.

आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से पढ़ाई. फिर लंदन में नौकरी और इसके बाद यूपीएससी पास कर आईएएस बनने का सपना पूरा हुआ. करीब 13 साल तक प्रशासनिक सेवा में रहने के बाद दिव्या मित्तल ने अब आईएएस से इस्तीफा दे दिया है.

उन्होंने अपने आधिकारिक X पोस्ट में लिखा कि वह अपनी इच्छा से 13 वर्षों की यात्रा को विराम दे रही हैं. साथ ही यह भी साफ कर दिया कि पद छूटा है, देश के लिए देखा गया सपना नहीं.

दिव्या मित्तल ने अपने फैसले के पीछे किसी विवाद, दबाव या नाराजगी का जिक्र नहीं किया है. 

लेकिन उनका फैसला एक सवाल जरूर खड़ा करता है. जिस नौकरी को पाने के लिए लाखों लोग वर्षों तक मेहनत करते हैं, उसे कोई अपनी इच्छा से क्यों छोड़ देता है? बाहर से सब ठीक होने के बाद भी मन दूसरी दिशा में क्यों जाने लगता है?

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दावा तो नहीं है लेकिन फिर भी ज्योतिष से इस स्थिति को काफी हद समझा जा सकता है. कुंडली के 12 भाव में इसका उत्तरा छिपा हो सकता है, लेकिन इसका जवाब केवल दशम भाव से नहीं मिलता. इसके लिए नौकरी, मन, संतुष्टि और बदलाव से जुड़े कई भावों को एक साथ देखना पड़ता है.

पद दशम भाव देता है, संतोष कहीं और से आता है

कुंडली का दशम भाव करियर, पद, अधिकार और समाज में मिलने वाली पहचान बताता है. दशम भाव और उसका स्वामी मजबूत हो तो व्यक्ति अपने क्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल कर सकता है. बड़े संस्थान, सरकारी सेवा और जिम्मेदारी वाले पद भी इसी भाव से देखे जाते हैं.

यहां एक बात समझना जरूरी है. मजबूत दशम भाव सफलता तो दिला सकता है, लेकिन उस सफलता से संतोष मिलेगा या नहीं, इसका फैसला अकेला दशम भाव नहीं करता.

मन की स्थिति चंद्रमा से देखी जाती है. सुख और मानसिक शांति का विचार चतुर्थ भाव से किया जाता है. यदि दशम भाव मजबूत हो, लेकिन चंद्रमा या चतुर्थ भाव दबाव में हो तो व्यक्ति के पास अच्छा पद होने के बाद भी सुकून की कमी रह सकती है. दुनिया उसके करियर को उपलब्धि मानती है, लेकिन वह स्वयं उस काम से जुड़ाव महसूस नहीं करता.

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नौकरी में बने रहने का संबंध षष्ठ भाव से

दशम भाव करियर बताता है, जबकि षष्ठ भाव नौकरी और सेवा की व्यवस्था से जुड़ा है. रोज तय समय पर काम करना, नियम मानना, अधिकारियों के साथ तालमेल रखना और चुनौतियों के बीच टिके रहना षष्ठ भाव के दायरे में आता है.

षष्ठ भाव और उसका स्वामी मजबूत हो तो व्यक्ति कठिन नौकरी को भी लंबे समय तक संभाल सकता है. यदि इस भाव पर लगातार अशुभ प्रभाव बन रहा हो तो काम का दबाव बढ़ सकता है. व्यक्ति को लगने लगता है कि वह काम तो कर रहा है, लेकिन अपनी शर्तों पर नहीं जी पा रहा.

सिर्फ षष्ठ भाव कमजोर होने से कोई नौकरी नहीं छोड़ देता. ऐसा फैसला तब सामने आता है, जब षष्ठ और दशम भाव से जुड़े ग्रहों की दशा भी चल रही हो.

शनि पहले थकाता है, फिर फैसला कराता है

शनि नौकरी, अनुशासन, जिम्मेदारी और व्यवस्था का कारक है. मजबूत शनि व्यक्ति को वर्षों तक एक जगह टिककर काम करने की क्षमता देता है. वह दबाव में भी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटता.

समस्या तब आती है, जब शनि का दबाव चंद्रमा, लग्न, दशम भाव या दशमेश पर बहुत अधिक बढ़ जाए. काम धीरे-धीरे उत्साह नहीं, बोझ लगने लगता है. व्यक्ति रोज अपना दायित्व पूरा करता है, लेकिन भीतर बदलाव की इच्छा बढ़ती रहती है.

शनि के असर में लिया गया फैसला अक्सर दुनिया को अचानक दिखाई देता है. वास्तविकता में व्यक्ति उस फैसले तक एक दिन में नहीं पहुंचता. वह लंबे समय से सब कुछ देख और सह रहा होता है. इस्तीफा केवल उस प्रक्रिया का आखिरी हिस्सा होता है.

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केतु क्यों कम कर देता है पद का आकर्षण?

केतु को विरक्ति का ग्रह कहा जाता है. इसे मोक्ष का कारक भी माना गया. इसका प्रभाव जिस भाव पर पड़ता है, व्यक्ति को वहां मिली उपलब्धियों से दूरी महसूस हो सकती है. सब कुछ होते हुए भी उसे लगता है कि कुछ कमी है.

केतु यदि दशम भाव में बैठा हो, दशमेश से संबंध बना रहा हो या उसकी दशा करियर के भाव को सक्रिय कर रही हो तो बड़े पद का आकर्षण कमजोर पड़ सकता है. व्यक्ति वेतन, कुर्सी और अधिकार से अधिक अपने काम का अर्थ तलाशने लगता है.

ऐसा व्यक्ति जरूरी नहीं कि काम करना छोड़ दे. वह पुरानी नौकरी छोड़कर स्वतंत्र काम, रिसर्च, शिक्षा, लेखन, समाजसेवा या किसी ऐसे क्षेत्र में जा सकता है जहां उसे अपने फैसले खुद लेने की आजादी मिले.

अचानक इस्तीफे में अष्टम भाव की भूमिका

अष्टम भाव अचानक आने वाले बदलाव का भाव है. अष्टमेश का दशम भाव या दशमेश से संबंध बने तो करियर में बड़ा मोड़ आ सकता है. यह बदलाव स्थानांतरण, विभाग बदलने, नौकरी छूटने या अपनी इच्छा से पद छोड़ने के रूप में सामने आ सकता है.

बारहवां भाव भी यहां महत्वपूर्ण हो जाता है. यह त्याग, दूरी और किसी पुराने अध्याय के अंत का संकेत देता है. यदि दशम भाव, अष्टम भाव और बारहवें भाव के स्वामियों की दशा-अंतरदशा जुड़ जाए तो व्यक्ति स्थापित करियर से बाहर निकलने का निर्णय ले सकता है.

फिर भी केवल एक योग देखकर इस्तीफे की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती. यह देखना जरूरी है कि उसी समय कौन-सी दशा चल रही है, ग्रह किस नवांश में हैं और गोचर जन्मकुंडली के किन भावों को सक्रिय कर रहा है.

नौकरी छोड़कर अपना काम शुरू करने के योग

हर इस्तीफा नुकसान या असफलता नहीं होता. कई लोग नौकरी इसलिए छोड़ते हैं क्योंकि उन्हें आगे का रास्ता दिखाई देने लगता है.

दशम भाव के साथ तृतीय भाव सक्रिय हो तो व्यक्ति जोखिम लेकर स्वतंत्र काम कर सकता है. पंचम भाव नई सोच और रचनात्मकता देता है. सप्तम भाव कारोबार से जुड़ा है, जबकि एकादश भाव आमदनी और बड़े नेटवर्क को दिखाता है.

इन भावों के स्वामी मजबूत हों और उनकी दशा चल रही हो तो नौकरी छोड़ने के बाद बिजनेस, कंसल्टिंग या किसी नए क्षेत्र में सफलता मिल सकती है.

नवम भाव जुड़ने पर व्यक्ति ऐसा काम चुन सकता है, जिसे वह केवल करियर नहीं बल्कि अपने जीवन का उद्देश्य मानता है.

हर अच्छी नौकरी हर व्यक्ति के लिए अच्छी नहीं होती

वेतन, पद और सुरक्षा के आधार पर कोई नौकरी बहुत अच्छी हो सकती है. लेकिन यदि वहां मन नहीं लग रहा, काम का उद्देश्य समझ नहीं आ रहा या व्यक्ति किसी दूसरे रास्ते पर जाना चाहता है तो वही नौकरी उसके लिए बंधन बन सकती है.

ज्योतिष में नौकरी छोड़ने का फैसला किसी एक ग्रह का परिणाम नहीं माना जाता. दशम भाव पद देता है, षष्ठ भाव नौकरी में टिकाता है, शनि जिम्मेदारी का भार बढ़ाता है, केतु मोह कम करता है और अष्टम भाव पुराने करियर की दिशा बदल सकता है. इन संकेतों का वास्तविक असर तभी सामने आता है, जब संबंधित ग्रह की दशा और गोचर भी साथ दें.

दिव्या मित्तल की प्रमाणित जन्मकुंडली उपलब्ध न होने के कारण उनके इस्तीफे को इनमें से किसी योग से जोड़ना उचित नहीं है. उनकी कहानी को बस इतना समझने के लिए देखा जा सकता है कि कभी-कभी पद हासिल करना मंजिल नहीं होता. एक मुकाम पर पहुंचने के बाद व्यक्ति अपने लिए उस रास्ते की तलाश शुरू कर देता है, जहां पद से ज्यादा काम का अर्थ मायने रखता है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह । Hirdesh Kumar Singh 

Senior Vedic Astrologer । Head – Religion & Astrology, ABP Live । Lead – ABP Dharma LIVE

हृदेश कुमार सिंह वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य और मीडिया पेशेवर हैं. उन्हें ज्योतिष, धर्म और मीडिया के क्षेत्र में 17 साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे ABP Live में Religion & Astrology वर्टिकल का नेतृत्व करते हैं. साथ ही ABP Dharma LIVE की कंटेंट और डिजिटल रणनीति की जिम्मेदारी संभालते हैं.

उनके काम में ज्योतिषीय लेखन, संपादन, वेबसाइट और वीडियो के लिए विषय चयन तथा संपादकीय योजना शामिल है. वे Search, Google Discover और सोशल मीडिया पर पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर धर्म और ज्योतिष की कवरेज तय करते हैं.

पंचांग, राशिफल, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराएं उनके लेखन के प्रमुख विषय हैं. वे करियर, विवाह, शिक्षा और व्यापार से जुड़े सवालों पर भी लिखते हैं. राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर उनके ज्योतिषीय विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर और मेदिनी ज्योतिष पर आधारित होते हैं. इनमें ग्रह स्थितियों को संभावित संकेतों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), नई दिल्ली से पत्रकारिता और IIMT University, मेरठ से ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की है. वे AstroSage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush' सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है.

नई पीढ़ी के पाठकों के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे प्रारूप पर काम किया है. इसमें पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा के फैसलों से जुड़े सवालों को राशिफल में जगह दी गई है. उनके लेख धार्मिक परंपराओं से जुड़े उन प्रश्नों पर भी केंद्रित होते हैं, जो बदलती जीवनशैली में सामने आते हैं.

वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु उनके अध्ययन एवं लेखन के विषय हैं. उनका मानना है, 'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है.

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