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Kaal Bhairav Jayanti 2025: 12 या 13 कब है काल भैरव जयंती? जानिए पूजा विधि, महत्व और भगवान भैरव से जुड़ी पौराणिक कथा

Kaal Bhairava Jayanti 2025: भगवान शिव के पांचवें अवतार जिनके नाम को सुनकर काल भी कांपता हो, वो हैं भगवान काल भैरव. इस साल काल भैरव जयंती 12 नवंबर को मनाई जाएगी. जानिए पूजा विधि और कथा.

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  • काल भैरव की पूजा से सभी विघ्नों से मुक्ति मिलती है।

Kaal Bhairava Jayanti 2025: हिंदू धर्म में भगवान शिव के स्वरूप काल भैरव देवता की जयंती हर वर्ष मार्गशीर्ष मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. मान्यताओं के मुताबिक इस दिन ही भगवान शिव ने काल भैरव का अवतार लिया था.

हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष यह त्योहार 12 नवंबर 2025, बुधवार के दिन मनाया जाएगा. काल भैरव भगवान की पूजा किस कामनापूर्ति के लिए की जाती है और इसकी पूजा विधि से कैसे शुभ फल की प्राप्ति होती है? आइए जानते हैं विस्तार से 

  • कालभैरव जयंती 12 नवंबर 2025, बुधवार
  • अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 नवंबर 2025, मंगलवार रात 11 बजकर 8 मिनट 
  • अष्टमी तिथि की समाप्ति 12 नवंबर 2025, बुधवार 10 बजकर 58 मिनट पर

कौन हैं भगवान काल भैरव?

सनातन धर्म के अनुसार भगवान शिव के पांचवें अवतार का नाम काल भैरव है, जिनकी कई रूपों में पूजा की जाती है. रुद्रयामल तंत्र में 64 भैरव का जिक्र देखने को मिलता है, लेकिन मुख्यता उनके दो ही रूपों की पूजा की जाती है. 

मान्यताओं के मुताबिक भगवान भैरव का बटुक स्वरूप शांत और सौम्य है तो वहीं उनका दूसरा स्वरूप काल भैरव उग्र रूप माना जाता है. उनके हाथ में त्रिशूल, तलवार और डंडा होने के कारण इन्हें दंडपाणि के नाम से भी जाना जाता है. 

जिनकी नाम से काल भी कांपता हो, उनकी पूजा करने से साधक को किसी भी तरह का डर नहीं सताता है. भगवान भैरव क्रोधी स्वभाव के बावजूद अपने भक्तों के सभी कष्ट और दुखों को हर लेते हैं. इनकी पूजा से साधक सभी तरह के विघ्नों से पार पाता है.

भगवान भैरव की पूजा विधि

काल भैरव जयंती के दिन सुबह स्नान कर भगवान शंकर के मंदिर में उन्हें गंगाजल अर्पित करना चाहिए. इसके बाद भगवान भैरव का ध्यान करके शिवलिंग पर फल-फूल, धूप, दीप, मिष्ठान, पान, सुपाड़ी आदि अर्पित करना चाहिए. इसके बाद सच्चे मन से उनकी आरती करनी चाहिए. भगवान भैरव को प्रसन्न करने के लिए जलेबी का भोग अर्पण करें. 

भगवान काल भैरव की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश के बीच श्रेष्ठता को लेकर असमंजस सी स्थिति उत्पन्न हो गई. सभी देवताओं को बुलाकर इसपर उनकी राय मांगी गई.

तब ज्यादातर देवताओं ने भगवान शिव और विष्णु को श्रेष्ठ बताया. इस बात से क्रोध होकर ब्रह्मा जी शिवजी को लेकर अपशब्द कहने लगे. 

इस पर शिवजी क्रोध से भर उठे, और तब उनके क्रोध से काल भैरव का जन्म हुआ. मान्यताओं के मुताबिक जिस दिन भगवान भैरव प्रकट हुए, वह दिन मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि थी. मान्यताओं के मुताबिक भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव ने ब्रह्मा जी के पांच में से एक सिर को धड़ से अलग कर दिया.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

अंकुर अग्निहोत्री (Ankur Agnihotri)

Astrology & Religion Content Writer

अंकुर अग्निहोत्री ABP Live के Astro & Religion सेक्शन से जुड़े डिजिटल पत्रकार हैं, जो दैनिक राशिफल, व्रत-त्योहार, ग्रह-गोचर और ज्योतिषीय विषयों पर सरल, तथ्य-आधारित और उपयोगी लेखन करते हैं. उनका कंटेंट विशेष रूप से उन पाठकों के लिए तैयार होता है जो ज्योतिष और धर्म को आसान भाषा में समझना चाहते हैं.

अंकुर पिछले 2+ वर्षों से ABP Live (abplive.com) में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं और ज्योतिष, अंक शास्त्र, वास्तु शास्त्र, शकुन अपशकुन शास्त्र, हस्तरेखा, स्वप्न शास्त्र, चाइनीच ज्योतिष आदि पर आर्टिकल्स प्रकाशित करते हैं.

उनका काम हाई-फ्रीक्वेंसी कंटेंट प्रोडक्शन, ट्रेंड-आधारित स्टोरी चयन और यूजर-इंटेंट आधारित लेखन पर केंद्रित है, जिससे उनके लेख लगातार अच्छा डिजिटल एंगेजमेंट प्राप्त करते हैं. इसके अतिरिक्त अंकुर अग्निहोत्री निम्नलिखित विषयों पर भी लेखन करते हैं:

  • दैनिक और साप्ताहिक राशिफल
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वे अपने लेखों में जानकारी प्रस्तुत करते समय, पंचांग आधारित तिथि, नक्षत्र और योग का संदर्भ लेते हैं. सामान्य ज्योतिषीय सिद्धांतों (ग्रह-स्थिति, गोचर प्रभाव) का उपयोग करते हैं और पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित स्रोतों के आधार पर जानकारी देते हैं. अंकुर ABP Live जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म के साथ जुड़े हैं और Astro सेक्शन में नियमित रूप से कंटेंट प्रकाशित करते हैं.

उनके लेख धार्मिक मान्यताओं, पारंपरिक ज्योतिषीय सिद्धांतों और सामान्य स्रोतों पर आधारित होते हैं. वे किसी भी प्रकार के निश्चित या गारंटीड परिणाम का दावा नहीं करते और पाठकों को जानकारी को मार्गदर्शन के रूप में लेने की सलाह देते हैं. इन्होने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई की है.

अंकुर का फोकस ज्योतिष और धर्म को सरल, व्यावहारिक और समझने योग्य रूप में प्रस्तुत करना है, ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यह जानकारी हर वर्ग के पाठकों तक पहुंच सके.

Personal Interests की बात करें तो अंकुर को अंक शास्त्र, वैदिक ज्योतिष, वास्तु और स्वप्न शास्त्र में रुचि. साथ ही साहित्य और फिल्में देखने का शौक है.

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Frequently Asked Questions

काल भैरव जयंती पर पूजा विधि क्या है?

इस दिन सुबह स्नान कर शिवलिंग पर गंगाजल, फल-फूल, धूप, दीप, मिष्ठान आदि अर्पित करना चाहिए। भगवान भैरव का ध्यान करके आरती करनी चाहिए और उन्हें जलेबी का भोग लगाना चाहिए।

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