Chaturmas 2025: क्यों खास है चातुर्मास के 4 महीने, जानें धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व!
Chaturmas Importance: 6 जुलाई 2025 रविवार देवशयनी एकादशी व्रत के मौके पर चातुर्मास लगने जा रहा है. आइए जानते हैं चातुर्मास का अर्थ, धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक महत्व क्या है?

Chaturmas 2025: हिंदू धर्म के अनुसार हर साल चतुर्मास का महीना आता है. ज्यादातर लोगों को न ही इसका अर्थ पता होगा और न ही महत्व, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं हैं. आज हम आपको चतुर्मास के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे. इसके साथ ही ये भी बताएंगे हिंदू धर्म में इसका इतना विशेष महत्व क्यों हैं?
हिंदू धर्म में व्रत, भक्ति और शुभ कार्य के 4 महीने को चातुर्मास कहते हैं. ध्यान, साधना और कर्म करने वाले लोगों के लिए ये महीना काफी महत्वपूर्ण होता है. चातुर्मास 4 महीने की अविध को कहा जाता है, जो आषाढ़ शुक्ल एकादशी से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलती है.
चातुर्मास का धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व
6 जुलाई 2025 यानी देवशयनी एकादशी व्रत का दिन, इस दिन से लेकर अगले 4 महीने के लिए श्रीविष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं. जिस कारण अगले 4 माह तक किसी भी तरह की शादी, सगाई, मुंडन या धार्मिक कर्मकांड करना नहीं चाहिए.
आइए जानते हैं चातुर्मास की धार्मिक मान्यता और महत्व के बारे में. स्कंद पुराण के अनुसार जब भगवान श्री हरि विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं, तब चातुर्मास काल का आरंभ होता है.
इसको लेकर स्कंद पुराण में एक उल्लेख दर्ज है, “चातुर्मास्यं हि देवस्य विष्णोर्निद्रायै कल्पितम्। तस्मात् कर्तव्यमेवैतच्चातुर्मास्यव्रतम् द्विजाः॥” जिसका अर्थ चातुर्मास का महीना भगवान विष्णु की योगनिद्रा का समय होता है, अतः इस अवधि का नियमपूर्वक पालन करना चाहिए.
साधु संतों के नजरिए से चातुर्मास की अवधि
- चातुर्मास के दौरान साधु-संत एक ही स्थान पर ठहरते हैं.
- यात्रा या प्रव्रज्या करने से बचते हैं.
- चातुर्मास के दौरान सत्संग, ध्यान, पाठ और नाम जाप में लीन रहते हैं.
- चातुर्मास काल को परिव्राजक जीवन का विश्राम काल कहा जाता है.
चातुर्मास का आध्यात्मिक महत्व क्या है?
- चातुर्मास का महीना आध्यात्मिक शक्ति से जुड़ने, ध्यान और साधना करने के लिए बेहद ही शुभ समय होता है.
- इस दौरान व्रत उपवास रखना चाहिए.
- धार्मिक कथाएं या सत्संग में शामिल होना चाहिए.
- चातुर्मास के महीने में दान और सेवा करने पर विशेष फल की प्रााप्ति होती है.
चातुर्मास का वैज्ञानिक दृष्टिकोण क्या है?
भारतीय ऋषि आध्यात्मिकता के साथ-साथ विज्ञान का भी पालन करते थे. चातुर्मास का निर्धारण ऋतु बदलने के आधार पर किया गया है. चातुर्मास की अवधि में वर्षा ऋतु से लेकर शरद ऋतु का काल भी आता है.
चातुर्मास को लेकर विज्ञान की राय
- वर्षा ऋतु में पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है.
- बैक्टीरिया और कीटाणुओं का प्रभाव अधिक हो जाता है.
- अधिक यात्रा करने से रोग फैलने की संभावना भी रहती है.
चातुर्मास का सामाजिक और पारिवारिक पक्ष क्या कहता है?
- चातुर्मास केवल आध्यात्मिकता ही नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव पर भी सुधार देता है.
- इस अवधि में सयंम और नियमों का पालन किया जाता है.
- उत्सवों के जरिए समाज में एकता और समरसता बढ़ती है.
- पर्यावरण की सुरक्षा होती है.
चातुर्मास को मात्र व्रतों और तिथियों के नजरिए से देखना गलत होगा. ये अवधि जीवन की पवित्रता और शुद्धता के लिए भी अहम है, जो मन, मस्तिष्क और आत्मा को शुद्ध करने का कार्य करता है.
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