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वर्मी कंपोस्टिंग से बदलें अपनी किस्मत, खेती के साथ शुरू करें ये साइड बिजनेस, 100 दिन में मिलेगा मुनाफा

Vermicomposting Business For Farmers: गांव में रहकर कम लागत में वर्मी कंपोस्ट का बिजनेस शुरू करना एक फायदे का सौदा है. महज 100-120 दिनों में तैयार होने वाली यह जैविक खाद किसानों की कमाई बढ़ा सकती है.

Vermicomposting Business For Farmers: आजकल हर कोई ऑर्गेनिक फार्मिंग की बातें कर रहा है और इसी वजह से मार्केट में काले सोने यानी वर्मी कंपोस्ट की डिमांड जबरदस्त तरीके से बढ़ गई है. अगर आप गांव में रहकर कम निवेश में एक सॉलिड बिजनेस शुरू करना चाहते हैं. तो केंचुआ खाद का काम आपके लिए बेस्ट है. यह न सिर्फ फसलों की पैदावार बढ़ाता है बल्कि मिट्टी की क्वालिटी को भी नेचुरल तरीके से रीस्टोर करता है. 

कृषि वैज्ञानिकों का भी मानना है कि केंचुआ किसानों का सबसे बड़ा दोस्त है क्योंकि इसकी बनाई खाद साधारण गोबर खाद के मुकाबले कहीं ज्यादा न्यूट्रिशियस और असरदार होती है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसे शुरू करने के लिए आपको किसी बड़ी फैक्ट्री या महंगी मशीनरी की जरूरत नहीं है, बस थोड़ी सी जगह और सही जानकारी के साथ आप इसे अपने घर के आंगन या खेत के छोटे से हिस्से से शुरू कर सकते हैं.

केंचुआ खाद कई गुना पावरफुल

वर्मी कंपोस्ट कोई मामूली खाद नहीं है. बल्कि यह फसलों के लिए एक कंप्लीट हेल्थ ड्रिंक की तरह काम करती है. साधारण गोबर खाद को तैयार होने में लंबा वक्त लगता है और उसके पोषक तत्व भी उतने स्ट्रॉन्ग नहीं होते. लेकिन केंचुओं की मदद से तैयार यह खाद मिट्टी की रोग प्रतिरोधक क्षमता को जबरदस्त तरीके से बूस्ट कर देती है. इसके इस्तेमाल से फसलों में बीमारियां कम लगती हैं और पैदावार कई गुना बढ़ जाती है. यह पूरी तरह से ईको-फ्रेंडली है. जिसका मतलब है कि आप न सिर्फ पैसा कमा रहे हैं बल्कि पर्यावरण को भी बचा रहे हैं.

  • यह मिट्टी की वाटर-होल्डिंग कैपेसिटी को बढ़ाती है, जिससे सिंचाई की जरूरत कम पड़ती है.
  • इसमें मौजूद माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स पौधों की जड़ों को मजबूती देते हैं जिससे फसल गिरती नहीं है.

खेती के साथ-साथ यह साइड बिजनेस आपकी मंथली इनकम को एक नया और स्टेबल आधार दे सकता है.

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बेड बनाने से लेकर खाद तैयार होने का पूरा प्रोसेस

इस बिजनेस को शुरू करने का तरीका बहुत ही सिंपल और किफायती है. सबसे पहले आपको लगभग 6 से 8 फुट का एक शेड बनाना होता है ताकि केंचुओं को सीधी धूप और बारिश से बचाया जा सके. इसके बाद जमीन पर बेड तैयार किए जाते हैं जिनमें 10-15 दिन पुराना गोबर इस्तेमाल करना सबसे अच्छा रहता है. ताजे गोबर की गर्मी केंचुओं के लिए नुकसानदेह हो सकती है. इसलिए उसे थोड़ा ठंडा करके ही बेड में डालें. एक बार जब आप इसमें केंचुए छोड़ देते हैं. तो बस समय-समय पर पानी का हल्का छिड़काव करना होता है जिससे नमी बनी रहे.

  • बेड तैयार करते समय उसमें हवा के वेंटिलेशन का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है.
  • केंचुओं को नमी पसंद है. इसलिए दिन में एक या दो बार हल्की वाटरिंग जरूर करें.

लगभग 100 से 120 दिनों के भीतर आपकी प्रीमियम क्वालिटी की खाद बनकर मार्केट में बिकने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है.

कम लागत में लाखों की कमाई

वर्मी कंपोस्ट बिजनेस की सबसे बड़ी यूएसपी इसकी लो कोस्ट-हाई प्रॉफिट वाली प्रोफाइल है. एक बार जब आपके केंचुए मल्टीप्लाई होने लगते हैं. तो आपकी लागत और भी कम हो जाती है क्योंकि आप केंचुए भी अलग से बेच सकते हैं. आजकल शहरों में गार्डनिंग करने वाले लोग और बड़े ऑर्गेनिक फार्म्स इस खाद के लिए मुंह मांगी कीमत देने को तैयार रहते हैं. यह बिजनेस न सिर्फ गांव के युवाओं को रोजगार दे रहा है. बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर भी बना रहा है. बस थोड़ी सी मार्केटिंग और अच्छी पैकेजिंग के साथ आप अपने लोकल ब्रांड को ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं.

  • आजकल नर्सरी और पॉलीहाउस मालिक थोक भाव में वर्मी कंपोस्ट की बुकिंग करते हैं.
  • यह एक ऐसा बिजनेस है जो कभी मंदी का शिकार नहीं होता क्योंकि खेती हमेशा चलती रहेगी.

अगर आप भी मेहनत करने को तैयार हैं. तो यह केंचुआ खाद का बिजनेस 100 दिनों के भीतर आपकी किस्मत के दरवाजे खोल सकता है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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