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कैसे पता चलता है कि सब्जी देसी है या हाईब्रिड? क्यों हाईब्रिड को नहीं माना जाता हेल्थ के लिए ठीक

बाजार में देसी से अधिक हाइब्रिड सब्जियां अधिक बिक रही हैं. ये दिखने मे आकर्षक, वजनदार और चमकभरी होती हैं. लेकिन उतनी सेहत के लिए नुकसानदायक भी हैं. खाने के लिए देसी सब्जियों का चयन करना चाहिए

Vegetables benefit: सब्जियां आपकी डेली लाइफ में शामिल होती हैं. इन सब्जियों की बदौलत ही आपका इम्यून सिस्टम बूस्ट करता है. इन सब्जियों से पैदा हुआ प्रतिरोधक तंत्र उन वायरस-बैक्टीरिया को मारकर भगा देता है, जो हर रोज बॉडी पर अटैक करने की कोशिश करते हैं. सब्जियां पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं. लेकिन खाने के लिए इनके चयन के समय अलर्ट होने की जरूरत है. जल्दी पैदावार के कारण आजकल बाजार में ऐसी सब्जियों का चलन बढ़ गया है, जिनको तैयार करने में बेहद खतरनाक कैमिकल का प्रयोग कर दिया जाता है. यही जानने की कोशिश करते हैं कि देसी और हाइब्रिड सब्जियों में क्या अंतर है? क्यों डॉक्टर हाइब्रिड सब्जी के बजाय देसी सब्जी खाने की सलाह देते हैं, जबकि हाइब्रिड सब्जी अधिक चमकदार और दिखने में आकर्षक होती है.

पहले हाइब्रिड बीज बनाना समझिए
हाइब्रिड बीज एक तरह से संकर प्रजाति होती है. दरअसल, इसमें एक तरह के पौधों की दो अलग अलग किस्मों का प्रयोग किया जाता है. नर पौधे के फूल से परागण लेकर मादा यानि फीमेल पौधे के साथ क्रासिंग कराई जाती है. फीमेल की ओवरी में परागण होने पर नई प्रजाति विकसित होती है. यही हाइब्रिड होती है. लेकिन इसका नुकसान यह है कि लोगों की सेहत को नजरअंदाज कर अधिक कैमिकल और हार्माेंस का इस्तेमाल किया जाता है. 

अब हाइब्रिड सब्जी के नुकसान जानिए
हाइब्रिड वेजीटेबल बनाने के प्रोसेस में कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन इस प्रोसेस को पूरा करने में जो खतरनाक केमिकल और हार्माेंस का इस्तेमाल किया जाता है. वह बेहद खतरनाक है. दरअसल, हाइब्रिड सब्जियों में कैमिकल और हार्माेंस का प्रयोग किया जाता है, ताकि सब्जी देसी सब्जियों की तुलना में अधिक वजनदार, आकर्षक और रंगभरी हो. इन केमिकल्स के चलते यह कई तरह के टॉक्सिंस पैदा करती है. यही टॉक्सिंस बॉडी में जाकर जहरीले तत्व बनाते हैं. ऐसी सब्जी खाने से पेट में अपच, उल्टी, डायरिया के अलावा स्किन कैंसर और अन्य तरह के कैंसर होने की संभावना तक रहती है.

तो देसी सब्जियां हैं फायदेमंद
बाजार में हाइब्रिड लौकी, कद्दू, तोरई, करेला, भिंडी, बैंगन समेत अन्य सब्जियां भी उपलब्ध हैं. इनकी चमक धमक देखकर आकर्षित नहीं होना चाहिए. इसके बजाय डॉक्टर देसी सब्जियों को खाने की सलाह देते हैं. जानकारों का कहना है कि सब्जी की दुकान या ठेले से खरीदारी करते समय सब्जी को गौर से देखें, यदि अधिक मोटी, चमकीली और सुंदर दिख रही है तो इसे खरीदने से बचें. देसी सब्जी को खरीदने में इंटरेस्ट दिखाएं. देसी सब्जी को बनाने में किसी तरह के कैमिकल या हार्माेंस का प्रयोग नहीं किया जाता है. यह पोषक तत्वों से भरी होती हैं. देसी सब्जियों की विशेषता है कि हाइब्रिड की तरह हर मौसम मेें नहीं बोई जाती हैं. इन्हें सीजनल ही बोया जाता है. यदि देसी सब्जी आर्गेेनिक खाद से तैयार की जा रही है तो यह सोने पर सुहागा वाली बात है. 

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. किसान भाई, किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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