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पौधे में चायपत्ती डालनी चाहिए या नहीं, क्या कहते हैं कृषि एक्सपर्ट?

पौधों में इस्तेमाल की गई चायपत्ती डालने का चलन काफी आम है, लेकिन क्या चायपत्ती से पौधों को सच में फायदा होता है? जानें चायपत्ती को पौधों में डालने का सही तरीका.

घर में चाय बनने के बाद बची हुई चायपत्ती को अक्सर लोग सीधे गमले की मिट्टी में डाल देते हैं. माना जाता है कि इससे पौधों को पोषण मिलता है और उनकी अच्छी ग्रोथ में मदद हो सकती है, लेकिन हर पौधे में चायपत्ती नहीं डालना चाहिए. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस्तेमाल की गई चायपत्ती में कुछ कार्बनिक पदार्थ होते हैं, लेकिन उसे सीधे ज्यादा मात्रा में मिट्टी में डालने से फायदा होने के बजाय कुछ परेशानी भी हो सकती है. खासकर अगर चायपत्ती में दूध और चीनी बची हुई हो. इसलिए अगर आप घर के पौधों में चायपत्ती का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो इसे सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है.

चायपत्ती में पौधों के लिए क्या है?

इस्तेमाल की गई चायपत्ती में कुछ कार्बनिक पदार्थ और पोषक तत्व होते हैं. जब यह अच्छी तरह सड़कर मिट्टी में मिलती है तो मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद करती है. हालांकि इसे पौधे के लिए पूरी खाद नहीं समझना चहिए. पौधे को बढ़ने के लिए नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम और दूसरे पोषक तत्वों की जरूरत होती है. इसलिए सिर्फ चायपत्ती डालने से पौधे की सारी जरूरत पूरी नहीं हो सकती. कृषि विशेषज्ञ भी जैविक चीजों का इस्तेमाल सही मात्रा और सही तरीके से करने की सलाह देते हैं.

दूध-चीनी वाली चायपत्ती न डालें

अगर आप चाय बनाकर बची हुई चायपत्ती गमले में डाल रहे हैं तो इसमें एक बात का खास ध्यान रखें. दूध और चीनी वाली चायपत्ती सीधे पौधे की मिट्टी में नहीं डालनी चाहिए. दूध और चीनी मिट्टी में सड़ने के दौरान बदबू पैदा करते हैं और चींटियों या दूसरे कीड़ों को अपनी और बुला सकते हैं. इसलिए चायपत्ती को इस्तेमाल करने से पहले उसे पानी से अच्छी तरह धो लें, ताकि उसमें दूध और चीनी कम हो जाए. इसके बाद उसे कुछ समय के लिए सुखाकर इस्तेमाल करें.

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गीली चायपत्ती सीधे मिट्टी में न डालें

गीली चायपत्ती को रोजाना गमले में डालते रहने से मिट्टी में नमी और जैविक सामग्री बहुत ज्यादा जमा हो सकती है. इससे गमले की मिट्टी में फफूंद या दूसरे छोटे जीवों की समस्या होती है. बेहतर तरीका यह है कि चायपत्ती को पहले अच्छी तरह धोकर धूप या हवा में सुखा लें. इसके बाद थोड़ी मात्रा में मिट्टी में मिला दें. अगर आपके पास काफी मात्रा में चायपत्ती बचती है तो उसे कंपोस्ट में डालना ज्यादा अच्छा विकल्प हो सकता है.

हर पौधे में डालना जरूरी नहीं

चायपत्ती का इस्तेमाल हर पौधे में एक ही तरह से करना जरूरी नहीं है. अलग-अलग पौधों को अलग तरह की मिट्टी और पोषण की जरूरत होती है. कुछ पौधों को थोड़ी अम्लीय मिट्टी पसंद होती है, जबकि कुछ पौधे सामान्य मिट्टी में अच्छी तरह बढ़ते हैं. इसलिए सिर्फ यह सोचकर कि चायपत्ती पौधे के लिए खाद है, उसे बार-बार डालना सही नहीं है. पौधे की जरूरत देखकर ही जैविक खाद या दूसरी चीजों का इस्तेमाल करना चाहिए.

सबसे अच्छा तरीका क्या है?

अगर घर की चायपत्ती को फेंकने के बजाय पौधों के काम में लेना चाहते हैं तो उसे धोकर, सुखाकर और कम मात्रा में इस्तेमाल करें. इससे दूध और चीनी जैसी चीजें मिट्टी में जाने से बचेंगी. बड़ी मात्रा में चायपत्ती होने पर उसे दूसरे जैविक कचरे के साथ कंपोस्ट बनाकर इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर विकल्प है. इससे तैयार होने वाली खाद को पौधों की मिट्टी में जरूरत के हिसाब से डाला जाता है. 

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

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