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अदरक की खेती से कितना कमा सकते हैं किसान, जान लीजिए मुनाफे का गणित

अदरक की लगातार डिमांड इसे किसानों के लिए कमाई वाली फसल बना सकती है. एक एकड़ में कितनी रकम लगेगी और खर्च निकालकर कितना पैसा बचेगा. जानिए इसकी खेती से मुनाफे का पूरा गणित.

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  • औसत 8 हजार किलो उत्पादन से 1.70 लाख मुनाफा हो सकता है.

भारत में शायद ही कोई ऐसी रसोई होगी जहां अदरक का इस्तेमाल न होता हो. सुबह की चाय से लेकर सब्जी, दाल, चटनी में इसका इस्तेमाल होता है. इसका इस्तेमाल बहुत से आयुर्वेदिक प्रोडक्ट बनाने में भी होता है. यानी इसकी जरूरत कभी कम नहीं होती साल भर डिमांड बनी रहती है. बाजार में लगातार डिमांड होने की वजह से अदरक किसानों के लिए अच्छी कमाई वाली फसल बन सकती है. इसकी खेती में वैज्ञानिक तरीके अपनाकर लाखों का मुनाफा कमाया जा सकता है.

बाजार में कच्चा अदरक कच्चे अदरक के रूप में भी हाथों-हाथ बिकता है और अगर किसान चाहें तो इसे सुखाकर सोंठ बनाकर लंबे समय तक स्टोर भी कर सकते हैं. शादी-ब्याह के सीजन और सर्दियों में तो इसके थोक भाव आसमान छूने लगते हैं. अगर सही समय पर बुवाई कर ली जाए तो एक एकड़ खेत से ही तगड़ी कमाई हो सकती है. जान लीजिए इसकी खेती में खर्च से लेकर मुनाफे की जानकारी.

एक एकड़ में कितना आएगा खर्च?

एक एकड़ में अदरक लगाने के लिए करीब 600 से 800 किलो बीज की जरूरत पड़ सकती है. अच्छी क्वालिटी के रोगमुक्त बीज पर सबसे ज्यादा खर्च आता है. अगर बीज का भाव 40 से 60 रुपये किलो मानें तो केवल इसे खरीदने में करीब 24 हजार से 48 हजार रुपये लग सकते हैं. 

कुछ इलाकों में बीज का रेट इससे ज्यादा भी हो सकता है. इसके अलावा खेत की तैयारी, जुताई, बेड बनाने, खाद, उर्वरक, सिंचाई, मल्चिंग और मजदूरी पर पैसा खर्च होगा. बीमारियों और कीड़ों से बचाव के लिए दवाओं की जरूरत भी पड़ सकती है. एक एकड़ में कुल लागत करीब 1.20 लाख से 2 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. 


अदरक की खेती से कितना कमा सकते हैं किसान, जान लीजिए मुनाफे का गणित

इतनी मिल सकती है अदरक की पैदावार

अदरक को आमतौर पर अच्छी जल निकासी वाली भुरभुरी दोमट मिट्टी पसंद होती है. इसके लिए खेत में नमी बनी रहनी चाहिए. लेकिन पानी रुकना नहीं चाहिए. बुवाई के लिए स्वस्थ और रोगमुक्त गांठों का इस्तेमाल करें. फसल को खरपतवार से बचाने के साथ सही समय पर खाद और सिंचाई देना जरूरी है. अदरक की फसल करीब 8 से 9 महीने में पूरी तरह तैयार हो सकती है. सब्जी वाले अदरक के लिए इसकी खुदाई कुछ समय पहले भी की जा सकती है.

बीज लगाने के बाद सही से देखभाल की जाती रही तो एक एकड़ खेत से करीब 6 हजार से 10 हजार किलो तक ताजा अदरक मिल सकता है. उत्पादन हर इलाके में एक जैसा नहीं रहता. मौसम खराब होने, बीज की क्वालिटी कमजोर रहने और बीमारी लगने से पैदावार कम भी हो सकती है. इसलिए कमाई भी इसी हिसाब से प्रभावित हो सकती है. 

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इतना हो सकता है मुनाफा

मान लेते हैं कि एक एकड़ से किसान को 8 हजार किलो अदरक मिलता है और बिक्री का औसत भाव 40 रुपये किलो रहता है. इस हिसाब से कुल बिक्री 3.20 लाख रुपये की होगी. अगर खेती पर 1.50 लाख रुपये खर्च हुए हैं तो किसान के पास करीब 1.70 लाख रुपये बच सकते हैं. यह अनुमानित मुनाफा है. इसमें जमीन का किराया, ट्रांसपोर्ट, मंडी चार्ज और स्टोरेज का खर्च जुड़ने से बचत और कम हो सकती है. अगर अदरक का भाव 50 रुपये किलो मिले और उत्पादन 10 हजार किलो हो तो कुल बिक्री 5 लाख रुपये तक पहुंच सकती है.


अदरक की खेती से कितना कमा सकते हैं किसान, जान लीजिए मुनाफे का गणित

करीब 2 लाख रुपये की लागत निकालने के बाद 3 लाख रुपये बच सकते हैं. वहीं भाव 25 रुपये रहने और उत्पादन घटकर 6 हजार किलो होने पर बिक्री सिर्फ 1.50 लाख रुपये होगी. ऐसे में किसान को बहुत कम फायदा मिलेगा. इसलिए बुवाई से पहले आसपास की मंडी, खरीदार और पिछले सालों के भाव के बारे में अच्छे से पता जरूर लें. सही कीमत के लिए किसान सीधे दुकानदारों, मसाला कारोबारियों और प्रोसेसिंग यूनिट से भी संपर्क कर सकते हैं.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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