सिंचाई की चिंता होगी खत्म, किसानों के काम आएगी यह योजना
PM Krishi Sinchayee Yojana: देश के जरूरतमंद किसानों को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से आधुनिक सिंचाई पर भारी सब्सिडी मिलती है. जिससे खेती की लागत घटकर मुनाफा बढ़ जाता है.

PM Krishi Sinchayee Yojana: खेती-किसानी में पानी की किल्लत और सिंचाई का बढ़ता खर्च हमेशा से देश के किसानों के लिए एक बहुत बड़ा सिरदर्द रहा है. मानसून की बेरुखी और डीजल-बिजली के महंगे होते दामों के बीच फसलों को सही समय पर पानी देना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता है. किसानों को इसी परेशानी से बचाने के लिए सरकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना चला रही है.
जो मार्डन तकनीक के जरिए खेतों तक पानी पहुंचाने का काम कर रही है. इस योजना का मकसद है देश के हर खेत को पर्याप्त पानी मिले और सिंचाई के दौरान पानी की एक भी बूंद बेकार न जाए. किसान अब इन नए तरीकों के जरिए कम खर्च में अपनी फसल को हरा-भरा रख सकते हैं.
प्रति बूंद अधिक फसल
इस योजना में सरकार किसानों को खेतों में ड्रिप इरिगेशन यानी टपक सिंचाई और स्प्रिंकलर यानी फव्वारा सिंचाई जैसी तकनीकें अपनाने के लिए सब्सिडी दी जा रही है. पुरानी बाढ़ सिंचाई के तरीके के मुकाबले यह तरीके खेतों में पानी की लगभग 40 से 50 प्रतिशत तक की बचत करते हैं. ड्रिप सिस्टम के जरिए पानी सीधा पौधों की जड़ों तक बूंद-बूंद करके पहुंचता है.
जिससे खेत में फालतू पानी जमा नहीं होता है. इसके अलावा पानी के साथ ही खाद और जरूरी पोषक तत्वों को भी सीधे पौधों तक पहुंचाया जा सकता है. जिससे फसल की क्वालिटी बेहतर होती है और पैदावार में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखने को मिलती है.
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किसानों को मिलती है आर्थिक मदद
इस योजना में सरकार किसानों को आधुनिक सिंचाई यंत्र खरीदने और उन्हें अपने खेतों में इंस्टॉल करने के लिए भारी-भरकम सब्सिडी देती है. अगर आप छोटे या सीमांत श्रेणी के किसान हैं. तो सरकार आपको इन पाइपों और संयंत्रों की लागत पर 55 प्रतिशत तक की भारी छूट देती है.
वहीं दूसरी तरफ बड़े किसानों को भी इस योजना के तहत 45 प्रतिशत तक की आर्थिक सहायता सीधे तौर पर मिल जाती है. इस तगड़ी सरकारी मदद की वजह से किसानों को अपनी जेब पर ज्यादा भारी बोझ नहीं डालना पड़ता है और वे बेहद कम लागत में अपने पूरे खेत में माइक्रो इरिगेशन का पूरा सेटअप आसानी से तैयार करवा लेते हैं.

खेती की लागत में कमी और मुनाफे में बढ़त
पुराने वक्त की बात की जाए तो पहले डीजल पंप इस्तेमाल किए जाते थे. तो जहां बिजली व्यवस्था थी वहां बिजली से चलने वाले पंप थे. जिसमें डीजल खरीदने तो बिजली बिल भरने में खूब पैसा चला जाता था. लेकिन जब किसान इस सरकारी योजना की मदद से अपने खेतों में ड्रिप या फव्वारा सिस्टम लगा लेते हैं. तो उनकी पानी और बिजली की खपत में भारी कमी आ जाती है. कम पानी और कम बिजली लगने से खेती की कुल लागत बहुत कम हो जाती है. तो साथ ही कम समय में खेतों से बंपर पैदावार निकलती है जिसके बाजार में दाम भी अच्छे मिलते हैं.
आवेदन करने की प्रोसेस
जिस किसान के पास खुद के नाम पर खेती की जमीन और पानी का सोर्स जैसे बोरवेल या कुआं हो वह इस योजना में आवेदन कर सकता है. आवेदन करने के लिए किसानों को अपने राज्य के कृषि विभाग या उद्यान विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाना होता है.
इसके अलावा किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर या ब्लॉक कृषि कार्यालय में जाकर भी आसानी से अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं. फॉर्म भरते समय आधार कार्ड, जमीन के कागजात, बैंक पासबुक और पासपोर्ट साइज फोटो जैसे जरूरी दस्तावेज लगाने होते हैं. जिसके बाद सरकार सीधे डीबीटी के माध्यम से सब्सिडी का पैसा किसान के खाते में भेज देती है.

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