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मूंगफली की ये 2 टॉप वैरायटी कराएंगी बंपर कमाई, कम खर्च में मिलेगा कई गुना ज्यादा तगड़ा रिटर्न

Peanuts Farming Tips: खरीफ सीजन में कम लागत में बड़ा मुनाफा कमाने के लिए देसी और लाल मूंगफली की खेती सबसे बेस्ट है. फूड इंडस्ट्री में भारी डिमांड होने से मंडियों में इसके बहुत ऊंचे दाम मिलते हैं.

Peanuts Farming Tips: पारंपरिक खेती के ढर्रे से निकलकर अगर आप कम समय और कम लागत में तगड़ा मुनाफा कमाना चाहते हैं. तो मूंगफली का बिजनेस आपके लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है. आजकल मार्केट में मूंगफली की मांग सिर्फ सर्दियों में टाइमपास के लिए नहीं बल्कि पीनट बटर, कुकिंग ऑयल और कॉस्मेटिक्स इंडस्ट्री में हमेशा हाई रहती है. ऐसे में अगर सही वैरायटी का चुनाव किया जाए. तो यह फसल किसानों की किस्मत बदल सकती है.

आज के दौर में आधुनिक तकनीक को अपनाने वाले किसान मूंगफली की दो खास किस्मों की खेती करके बेहद कम खर्च में रिकॉर्डतोड़ पैदावार ले रहे हैं. खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही इन वैरायटीज को लगाकर आप भी अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा सकते हैं. चलिए आपको एक्सपर्ट्स के हवाले से बताते हैं कि आखिर मूंगफली की ये कौन सी दो टॉप वैरायटी हैं जो मार्केट में धूम मचा रही हैं.

देसी मूंगफली की ताकत

इस लिस्ट में पहला नाम आता है हमारी ट्रेडिशनल यानी देसी मूंगफली का जो सालों से भारतीय किसानों की पहली पसंद बनी हुई है. इस वैरायटी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके पौधे बहुत मजबूत होते हैं और इनमें मौसम की मार झेलने की गजब की क्षमता होती है. इसके दानों का साइज भले ही मीडियम होता है. लेकिन इसका स्वाद और खुशबू इतनी लाजवाब होती है कि लोकल मार्केट से लेकर बड़े शहरों की मंडियों तक इसकी मांग कभी कम नहीं होती. 

यह भी पढ़ें: खेती को मॉडर्न बनाने के लिए सरकार दे रही है बंपर फंड, ऐसे उठाएं इस सरकारी स्कीम का पूरा फायदा

खूब रहती है डिमांड

देसी मूंगफली की खेती में लागत बहुत ही कम आती है क्योंकि इसके लिए आपको महंगे विदेशी इनपुट्स या खादों की जरूरत नहीं पड़ती. कम पानी और सामान्य देखरेख में भी यह फसल बंपर पैदावार देती है जिससे छोटे और सीमांत किसानों को सीधा और सुरक्षित मुनाफा मिलता है.

लाल मूंगफली का क्रेज 

अगर आप थोड़ा लीक से हटकर बिजनेस करना चाहते हैं और प्रीमियम प्राइस कमाना चाहते हैं. तो लाल मूंगफली  की खेती आपके लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन है. इस वैरायटी के दानों का रंग गहरा लाल या मैरून होता है. जो दिखने में बेहद अट्रैक्टिव लगते हैं. लाल मूंगफली में ऑयल कंटेंट और न्यूट्रिशनल वैल्यू सामान्य मूंगफली के मुकाबले काफी ज्यादा होती है जिसकी वजह से हेल्थ कॉन्शियस लोगों और बड़ी कंपनियों के बीच इसकी भारी डिमांड है. 

मुनाफे का सीक्रेट

मंडियों में व्यापारी इस वैरायटी के लिए बहुत अच्छे और ऊंचे दाम देने को तैयार रहते हैं. हालांकि इसकी खेती में थोड़ा सा मॉडर्न मैनेजमेंट और सही समय पर सिंचाई की जरूरत होती है लेकिन इसके बदले मिलने वाला रिटर्न इतना शानदार होता है कि आपकी पूरी लागत चुटकियों में वसूल हो जाती है.

यह भी पढ़ें: हरी सब्जियां उगाते समय कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां? एक्सपर्ट से सीखें स्मार्ट गार्डनिंग

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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