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हर बार नीलगाय कर देती है फसल को बर्बाद, ये देसी तरीका अपनाएं किसान

Crop Protection From Nilgai: खेतों में नीलगाय के आतंक से परेशान किसानों के लिए सड़े अंडे का देसी घोल और पुरानी साड़ियों की फेंसिंग सबसे कारगर इलाज है. इसकी तेज गंध से नीलगाय फसलों से दूर रहती हैं.

Crop Protection From Nilgai: किसानों के लिए रात-दिन मेहनत करके फसल उगाना जितना बड़ा काम है. उतना ही बड़ा सिरदर्द उसे आवारा पशुओं और नीलगाय से बचाना बन चुका है. नीलगाय अक्सर झुंड में आती हैं और देखते ही देखते हरी-भरी खड़ी फसल को चरकर या रौंदकर पूरी तरह बर्बाद कर देती हैं. इनसे अपनी फसल को बचाने के लिए कई किसान भाई महंगे कटीले तार या फेंसिंग का सहारा लेते हैं. जिसमें भारी-भरकम खर्च आता है और हर किसी के बजट में यह फिट नहीं बैठता.

लेकिन अब आपको परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. क्योंकि हमारे पास ऐसा बेहद सस्ता और असरदार देसी नुस्खा है जो बिना किसी खर्च के नीलगाय को आपके खेत से कोसों दूर रखेगा. इस आसान और घरेलू तरीके को अपनाकर आप अपनी फसलों की 100 परसेंट सुरक्षा कर सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं इस देसी तरीके के बारे में पूरी जानकारी.

सड़े अंडे के घोल का नुस्खा 

नीलगाय को खेत से दूर रखने का सबसे पहला और सबसे खतरनाक देसी तरीका है सड़े हुए अंडों का एक खास घोल तैयार करना. इसके लिए आपको बस कुछ अंडे लेकर उन्हें पानी में फोड़कर कुछ दिनों के लिए धूप में छोड़ देना है.  जिससे वे बुरी तरह सड़ जाएं और उनमें से भयंकर बदबू आने लगे. 

पत्तियों पर छिड़क दें

इसके बाद इस बेहद बदबूदार पानी में थोड़ा वाशिंग पाउडर और पानी मिलाकर अच्छे से मिक्स कर लें. जिससे यह पत्तियों पर आसानी से चिपक सके. अब इस कड़क मिक्चर को स्प्रे मशीन की मदद से अपने खेत के चारों तरफ मेड़ों पर और फसलों की बाहरी बाउंड्री पर अच्छी तरह छिड़क दें.

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सूंघते ही नीलगाय भागेंगी दूर

इस सड़े अंडे की असहनीय और तीखी गंध को सूंघते ही नीलगाय को उल्टी जैसा महसूस होने लगता है और वे आपके खेत की तरफ देखना भी बंद कर देती हैं. इस सड़े अंडे के स्प्रे का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पूरी तरह नेचुरल है और इससे फसलों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता जबकि नीलगाय इसकी स्मेल से मीलों दूर भागती हैं. 

जीरो बजट का तरीका भी है

इसके साथ ही आप एक और जीरो बजट वाला तरीका अपना सकते हैं. जिसमें खेत के चारों तरफ बांस गाड़कर रंग-बिरंगी पुरानी साड़ियों की एक दीवार जैसी फेंसिंग बना दी जाती है. हवा चलने पर जब ये साड़ियां हिलती हैं. तो नीलगाय को दूर से ही किसी इंसान के होने का भ्रम होता है. इसके अलावा मेड़ों पर चमकीली टेप या रिबन बांधने से जो धूप में चमकती हैं और हवा से आवाज करती हैं नीलगाय डरकर तुरंत अपना रास्ता बदल लेती हैं. 

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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