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खेती के अलावा किसान कर सकते हैं मधुमक्खी पालन, सरकार की इस योजना में मिलेगी मदद

National Beekeeping and Honey Mission: सरकार की राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन योजना मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए 50% तक सब्सिडी और मुफ्त ट्रेनिंग दे रही है.

National Beekeeping and Honey Mission: खेती-किसानी के साथ अगर कुछ एक्स्ट्रा कमाई का जरिया मिल जाए, तो किसानों की आर्थिक स्थिति काफी मजबूत हो सकती है. आजकल मधुमक्खी पालन यानी 'बी-कीपिंग' एक ऐसा बिजनेस बन गया है जिसमें कम लागत में मोटा मुनाफा कमाया जा सकता है. सबसे अच्छी बात यह है कि मधुमक्खियां फसलों में परागण (Pollination) में मदद करती हैं.

जिससे पैदावार भी बढ़ती है और साथ में शहद, मोम और रॉयल जेली बेचकर अलग से कमाई भी होती है. केंद्र सरकार भी 'मीठी क्रांति' लाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. अगर आप भी पारंपरिक खेती के साथ अपनी इनकम बढ़ाना चाहते हैं, तो सरकार की खास योजनाएं इसमें आपकी पूरी मदद करने के लिए तैयार हैं.

क्या है ये योजना?

मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन (NBHM) की शुरुआत की है. इस मिशन का मकसद देश के किसानों की आय को दोगुना करना है. यह योजना पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा फंडेड है और इसे राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (NBB) के जरिए लागू किया जाता है. इस मिशन के तहत न केवल शहद के उत्पादन पर जोर दिया जाता है.

बल्कि मधुमक्खी पालन से जुड़े अन्य कीमती उत्पादों जैसे प्रोपोलिस और बी-वेनम के प्रोडक्शन को भी प्रमोट किया जाता है. यह योजना खेती में वैज्ञानिक तरीके अपनाकर ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने का एक बड़ा विजन लेकर आई है.

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सरकार ऐसे देती है मदद

इस योजना के तहत सरकार किसानों और पशुपालकों को मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए भारी सब्सिडी और तकनीकी सहायता प्रदान करती है. अलग-अलग वर्गों के हिसाब से प्रोजेक्ट लागत पर 35 से 50 परसेंट तक की सब्सिडी दी जाती है. इसमें मधुमक्खी के बक्से (Bee Boxes), छत्ते और अन्य जरूरी उपकरण खरीदने के लिए आर्थिक मदद शामिल है.

तो साथ ही सरकार किसानों को मधुमक्खी पालन की आधुनिक ट्रेनिंग भी दिलवाती है. जिससे वे बिना किसी नुकसान के इस काम को सीख सकें. शहद की क्वालिटी जांचने के लिए लैब बनाने और उसे बाजार तक पहुँचाने के लिए कोल्ड चेन और स्टोरेज की सुविधा पर भी सरकार काफी पैसा खर्च कर रही है जिससे किसानों को उनके उत्पाद का सही दाम मिल सके.

ऐसे करना होगा आवेदन

अगर आप इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं. तो सबसे पहले आपको राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (NBB) की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा. आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक खाते की जानकारी, निवास प्रमाण पत्र और भूमि से जुड़े दस्तावेजों की जरूरत होती है. रजिस्ट्रेशन के बाद आपको एक यूनिक आईडी दी जाती है.

आप अपने जिले के कृषि विभाग या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र में जाकर भी योजना की जानकारी ले सकते हैं और वहां से ट्रेनिंग के लिए फॉर्म भर सकते हैं. एक बार जब आपका आवेदन अप्रूव हो जाता है और आप ट्रेनिंग पूरी कर लेते हैं. तो सब्सिडी की राशि सीधे आपके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है. जिससे आप अपना काम शुरू कर सकते

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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