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Litchi Farming: रातोंरात मालामाल बना देंगे लीची के बाग, इस खास तरीके से करें खेती

Litchi Cultivation: लीची की व्यावसायिक खेती से किसानों के लिये मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है. इसके प्रोसेस्ड उत्पाद- जैम, शरबत, नेक्टर और कार्बोनेटिड ड्रिंक्स आदि बनाकर भी बाजार में बेच सकते हैं.

Litchi Orchards Plantation: भारत को लीची (Litchi) का दूसरा बड़ा उत्पादक देश कहते हैं. यहां आज के समय में करीब 1 लाख हेक्टेयर जमीन पर लीची की खेती (Litchi Farming) करके 7 लाख टन से भी ज्यादा पैदावार मिल रही है. शुरुआत में जम्मू कश्मीर, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में लीची उगाई जाती थी, लेकिन आज बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, असम और त्रिपुरा, छत्तीसगढ़, उत्तरांचल, उड़ीसा, हरियाणा तथा पंजाब समेत 13 राज्य इसका बंपर उत्पादन कर रहे हैं. इसकी व्यावसायिक (Commercial Farming) खेती के लिये किसानों को ज्यादा फायदा होता है, क्योंकि लीची के प्रोसेगिंग (Litchi Processing) करके जैम, शरबत, नेक्टर और कार्बोनेटिड ड्रिंक्स भी तैयार किए जाते हैं, जिससे बढ़िया पैसा मिल जाता है.  

लीची की खेती (Litchi Cultivation) 
भारत में लीची की खेती के लिये जल निकासी वाली गहरी बलुई दोमट मिट्टी बेहतर रहती है. इसकी खेती के दौरान साल में 2 बाद ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है. पहले जनवरी-फरवरी के बीच लीची के पेड़ पर फूल एवं फल आते हैं और दूसरी अप्रैल-मई के बीच जब फल पककर तुड़ाई के लिये तैयार हो जाते हैं. लीची की खेती के लिये उन्नत और अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों का चुनाव करना चाहिये, जिसमें साही, कस्बा, पूर्वी, त्रिकोलिया, चाइना, ग्रीन, अर्लीबेदाना, देसी, डी रोज तथा रोज सेंटेड आदि शामिल हैं. 

Litchi Farming: रातोंरात मालामाल बना देंगे लीची के बाग, इस खास तरीके से करें खेती

गूटी विधि से तैयार करें पौधा (Preparing Plants by Gooty method) 
लीची की फसल से अच्छी क्वालिटी के उत्पादन के लिये गूटी विधि से पौधा तैयार करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि बीजों से पौधा बनाकर खेती करने से अच्छी क्वालिटी के फल नहीं मिलते और पेड़ों की बढ़वार भी धीरे होती है.

  • पौधा तैयार करने के लिये मई-जून के महीने में पेड़ की स्वस्थ डाली को चुनें.
  • डाली के सिरे से 40-50 सेमी. पीछे की ओर चाकू से गोलाई में 2 सेमी. का छल्ला बनायें.
  • इस रिंग या छल्ले पर आईबीए की 2000 पी.पी.एम. मात्रा का पेस्ट बनाकर लगायें.
  • पेस्ट लगाने के बाद रिंग पर गूटी बांधने के लिये नमी युक्त मॉस घास से ढकें और उसे पॉलीथिन से कवर करके सूतली रस्सी से टाइट बांध दें.
  • लीची के पेड़ पर गूटी बांधने के बाद 2 महीने में जड़ें निकल आती है, जिसके बाद डाली की आधी पत्तियों को हटाकर छायादार स्थान में रोपाई कर देनी चाहिये.

Litchi Farming: रातोंरात मालामाल बना देंगे लीची के बाग, इस खास तरीके से करें खेती

ऐसे करें लीची की रोपाई (Plantation Of Litchi) 
मानसून की अच्छी बारिश पड़ने बाद ही लीची के पौधों की रोपाई बाग में करनी चाहिये. इसके लिये जून-जुलाई का महीना ठीक रहता है, इस समय बारिश के कारण पौधों की तेजी से बढ़वार हो जाती है.

  • रोपाई से पहले खेत में 10X10 मीटर की दूरी पर 1X1X1 आकार के गड्ढों की खुदाई करें.
  • इस गड्ढों को 2-3 टन गोबर की सड़ी खाद, 2 किलो नीम की खली, 1 किलो सिंगल सुपर फास्फेट और मिट्टी के मिश्रण से भर दें.
  • जिन इलाकों में बारिश और जल भराव अधिक है, वहां गड्ढों को 20-25 सेमी की ऊंचाई तक भरना चाहिये.
  • इन गड्ढों में लीची के पौधों की रोपाई करें और हल्की सिंचाई का काम भी कर लें.

लीची का उत्पादन (Litchi Production) 
रिपोर्ट्स के मुताबिक, खेत में लीची के पौधे (Litchi Plantation) लगाने पर 15-20 सालों में ये मजबूत पेड़ बन जाते हैं, जिनसे हर साल 100 किलोग्राम फल मिल जाते हैं. बाजार में क्वालिटी के हिसाब से लीची को 80-200 रुपये किलो के भाव पर बेचा जाता है.

Litchi Farming: रातोंरात मालामाल बना देंगे लीची के बाग, इस खास तरीके से करें खेती

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और जानकारियों पर आधारित है. ABPLive.com किसी भी तरह की जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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