T2T Genome India: अब आएगी दाल क्रांति, वैज्ञानिकों ने तैयार किया अरहर का पहला T2T जीनोम
T2T Genome India: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने अरहर की 'आशा' किस्म का भारत का पहला T2T जीनोम तैयार किया, जिसमें 36,557 जीन की पहचान हुई, इससे बेहतर और रोग प्रतिरोधी किस्में विकसित करना आसान होगा.

T2T Genome India: देश में दलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक बड़ी वैज्ञानिक डेवलपमेंट सामने आई है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने अरहर (तूर) की आशा किस्म का देश का पहला पूरी तरह तैयार टेलोमेयर टू टेलोमेयर यानी T2T जीनोम विकसित कर लिया है.
जीनोम को आसान भाषा में समझें तो यह किसी भी पौधे की पूरी जेनेटिक जानकारी की किताब होती है, यानी उसका पूरा ब्लूप्रिंट. T2T जीनोम किसी फसल के डीएनए का सबसे पूर्ण और सटीक नक्शा माना जाता है, जिसकी मदद से वैज्ञानिक पौधे के हर क्रोमोसोम की बनावट और उसमें मौजूद जीन को बेहद बारीकी से समझ सकते हैं.
समझें इस खोज की गहराई
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर प्लांट बायोटेक्नोलॉजी की टीम ने इस जीनोम में 75.26 करोड़ बेस पेयर्स का पूरा अनुक्रम तैयार किया है, जिसे 92 कंटिग्स में व्यवस्थित किया गया है. इसमें अरहर के सभी 11 गुणसूत्र की संपूर्ण स्ट्रक्चर दर्ज की गई है. शोध के दौरान 36,557 जीन और 48,008 कोडिंग सीक्वेंस की पहचान की गई और ट्रांसक्रिप्टोम मैपिंग में सटीकता 99.9 फीसदी से भी ज्यादा दर्ज हुई. इस जीनोम को NIPB CcT2T_4 नाम दिया गया है, जिसे 20 अप्रैल 2026 को अंतरराष्ट्रीय डेटाबेस एन सी बी आई में ऑफिसियल तौर पर रजिस्टर किया जा चुका है.
2011 से चली आ रही रिसर्च का नतीजा
यह उपलब्धि रातोंरात नहीं मिली. दरअसल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर प्लांट बायोटेक्नोलॉजी ने साल 2011 में ही अरहर की आशा किस्म का दुनिया का पहला ड्राफ्ट जीनोम पब्लिश किया था. उसी शुरुआती शोध पर सालों की मेहनत और लगातार सुधार के बाद अब यह पूरी तरह एनोटेटेड T2T जीनोम तैयार हो पाया है.
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किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस जेनेटिक जानकारी की मदद से अब ऐसी नई अरहर किस्में विकसित करना आसान होगा, जो ज्यादा पैदावार दें, बीमारियों से बेहतर तरीके से लड़ सकें, पोषण से भरपूर हों, और सूखे व बदलते मौसम को भी बेहतर तरीके से झेल सकें. यह पूरी तरह एनोटेटेड जीनोम अब वैज्ञानिकों के लिए एक अहम नैशनल रिसोर्सेज बन चुका है.
महाराष्ट्र से यूपी तक होगा असर
अरहर देश की सबसे अहम दलहन फसलों में से एक है और महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश तक कई राज्यों के किसान इसकी खेती पर निर्भर हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध सीधे तौर पर दलहन उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा, जिससे आने वाले सालों में देश की दाल क्रांति को नई रफ्तार मिल सकती है.
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