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Impact of Weak Monsoon El Nino 2026 : इस बार कमजोर रह सकता है मॉनसून, जानें किन फसलों पर सबसे ज्यादा पड़ेगा असर?

Impact of Weak Monsoon El Nino 2026: मौसम विभाग ने कहा है कि मॉनसून  22 मई से 30 मई के बीच कभी भी केरल में पहुंच सकता है, लेकिन सिर्फ आगमन का समय ही जरूरी नहीं है.

Impact of Weak Monsoon El Nino 2026 : देशभर में इस समय भीषण गर्मी ने लोगों और किसानों को परेशान किया हुआ है. ऐसे में हाल ही में एक राहत भरी खबर सामने आई है, मौसम विभाग (IMD) के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून इस साल केरल में 26 मई के आसपास पहुंच सकता है. आमतौर पर मॉनसून 1 जून के आसपास केरल में आता है, लेकिन इस बार यह पहले आ सकता है. मौसम विभाग ने कहा है कि मॉनसून  22 मई से 30 मई के बीच कभी भी केरल में पहुंच सकता है, लेकिन सिर्फ आगमन का समय ही जरूरी नहीं है. इस बार मौसम विशेषज्ञ एक और बड़ी चुनौती की ओर इशारा कर रहे हैं.

इस बड़ी परेशानी का नाम एल नीनो है. यह घटना भारत में मॉनसून की ताकत और फसलों पर गहरा असर डाल सकती है. मौसम विशेषज्ञों और कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर इस साल एल नीनो मजबूत होता है तो मॉनसून कमजोर रह सकता है. इसके कारण कम बारिश, बढ़ता तापमान और सूखे जैसी परिस्थितियां हो सकती हैं. ऐसे में किसानों की खेती, उत्पादन और इनकम तीनों पर असर पड़ सकता है. आइए जानते हैं कि इस बार कमजोर मॉनसून के कारण किन फसलों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. 

इस बार क्यों कमजोर रह सकता है मॉनसून?

इस साल विशेषज्ञों ने संकेत दिया है कि एल नीनो के कारण मॉनसून सामान्य से कमजोर रह सकता है. IMD के अनुसार, जून से सितंबर के बीच बारिश लगभग 80 सेंटीमीटर हो सकती है, जबकि सामान्य औसत 87 सेंटीमीटर है. कमजोर मॉनसून का असर सबसे पहले खरीफ फसलों पर पड़ेगा. इनमें धान, सोयाबीन, कपास, गन्ना और मक्का जैसी फसलें शामिल हैं. कम बारिश से इनकी पैदावार घट सकती है, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है और महंगाई बढ़ सकती है. ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अपनी आय और खर्च के लिए कृषि पर निर्भर रहते हैं. ऐसे में कमजोर मॉनसून का असर किसानों की आजीविका, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, FMCG सेक्टर, ट्रैक्टर और टू-व्हीलर बिक्री पर भी पड़ सकता है. 

एल नीनो क्या है?

एल नीनो एक वैश्विक जलवायु घटना है. इसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इसके कारण भारत में मॉनसून कमजोर हो सकता है. बारिश कम हो सकती है. तापमान बढ़ सकता है और सूखे की स्थिति बन सकती है. वैश्विक स्तर पर भी एल नीनो दुनिया के कई हिस्सों में मौसम को बदल सकता है. यह दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया में सूखा ला सकता है और कहीं-कहीं ज्यादा बारिश भी करा सकता है. इस साल मई से जुलाई 2026 के बीच एल नीनो के बनने की संभावना लगभग 82 प्रतिशत है, और यह दिसंबर 2026 तक बने रहने की संभावना 96 प्रतिशत है. 

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किन फसलों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा?

कमजोर मॉनसून का असर सबसे पहले खरीफ फसलों पर पड़ेगा. खरीफ सीजन की मुख्य फसलें धान, गन्ना, मक्का और कपास हैं. ये सभी ज्यादा पानी की मांग करती हैं. कमजोर मॉनसून या लंबी सूखी अवधि से धान और गन्ना की पैदावार कम हो सकती है. मक्का और कपास की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है. पानी की कमी के कारण किसान सिंचाई पर ज्यादा निर्भर होंगे. दक्षिण भारत के कई किसान पहले से ही भूजल और सिंचाई के सहारे फसल बो रहे हैं. कमजोर मॉनसून के कारण उनकी मेहनत और निवेश जोखिम में पड़ सकता है. 

किसान पहले से कैसे करें तैयारियां?

किसानों और कृषि विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस साल मौसम आधारित खेती अपनाना बहुत जरूरी है. इसमें कम पानी वाली फसलें उगाना जैसे मोटे अनाज, दालें और सूखा सहन करने वाली किस्में. साथ ही माइक्रो इरिगेशन का यूज ड्रिप इरिगेशन, स्प्रिंकलर और मल्चिंग तकनीक से पानी बचाया जा सकता है. इसके अलावा खेत में नमी बनाए रखना, जिसमें जैविक पदार्थ डालना और सुबह-शाम सिंचाई करना शामलि है. इसके अलावा समय पर फसल बोने से उत्पादन पर नकारात्मक असर कम होगा. साथ ही जल संरक्षण सबसे जरूरी है. इसलिए तालाब, पानी के टैंक और स्थानीय सिंचाई प्रबंधन करें. कुछ राज्यों जैसे असम और ओडिशा के किसान पहले से रेजिलिएंस प्रोजेक्ट के तहत आधुनिक सिंचाई तकनीकें अपनाकर पानी की बचत और उत्पादन बढ़ा रहे हैं. 

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