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Chikoo Farming: अपने खेत में कैसे कर सकते हैं चीकू की खेती, हर साल होगी लाखों की कमाई? 

Chikoo Farming: चीकू की खेती लगभग हर घर की उपजाऊ मिट्टी में की जा सकती हैं, लेकिन अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी इसके लिए सबसे बेहतर मानी जाती है खेत का पीएच मान 5.8 से 8 के बीच होना चाहिए.

Chikoo Farming: देश के किसान अब अलग-अलग तरह की खेती को अपना रहे हैं. कम लागत और लंबे समय तक मिलने वाली आमदनी की वजह से इन अलग-अलग खेती में चीकू की खेती भी किसानों के बीच अपनी जगह बना रही है. खास बात यह है कि चीकू का पौधा एक बार लगाने के बाद कई सालों तक फल देता रहता है, जिससे किसानों की लगातार कमाई होती है. महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इसकी खेती बड़े स्तर पर की जा रही है ऐसे में चलिए आज आपको बताते हैं कि आप अपने खेत में चीकू की खेती कैसे कर सकते हैं, जिससे हर साल लाखों की कमाई होगी. 

कैसी मिट्टी और जलवायु होती है सही? 

चीकू की खेती लगभग हर घर की उपजाऊ मिट्टी में की जा सकती हैं, लेकिन अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी इसके लिए सबसे बेहतर मानी जाती है खेत का पीएच मान 5.8 से 8 के बीच होना चाहिए. इसके पौधों के लिए गर्म और स्वच्छ जलवायु सही रहती है, ज्यादा ठंड वाले इलाकों में इसकी खेती नुकसानदायक हो सकती है. चीकू के पौधे 10 डिग्री से 40 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान सहन कर लेते हैं. वहीं 70 प्रतिशत तक नमी वाले मौसम इसके विकास के लिए उपयुक्त माना जाता है. 

कैसे करें खेत की तैयारी? 

चीकू की खेती शुरू करने से पहले खेत को अच्छी तरह तैयार करना जरूरी है. सबसे पहले खेत में पुरानी फसल के अवशेष हटाए जाते हैं. इसके बाद दो से तीन बार गहराई गहरी जुताई की जाती है, मिट्टी को बराबर बनाने के लिए रोटावेटर चलाया जाता है और फिर खेत को समतल किया जाता है, ताकि जलभराव की समस्या न हो. पौधा लगाने के लिए खेत में करीब 1 मीटर चौड़ा और 2 फीट गहरा गड्ढा तैयार किया जाता है. एक लाइन से दूसरे लाइन के बीच 5 से 6 मीटर की दूरी रखी जाती है. गड्ढों में मिट्टी के साथ गोबर की खाद और जरूरी उर्वरक मिलाकर भर दिया जाता है. 

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सिंचाई और प्रबंधन 

भारत में चीकू की कई उन्नत किस्म की खेती की जाती है. इसमें काली पत्ती, बारहमासी, पिकेएम 2 और कलकत्ता राउंड जैसी किस्में काफी लोकप्रिय है. वहीं चीकू के पौधे को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती है. गर्मियों में सप्ताह में एक बार और सर्दियों में 5 से 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई पर्याप्त मानी जाती है. बारिश के मौसम में जरूरत के हिसाब से ही पानी देना चाहिए. इसके अलावा पौधे की अच्छी वृद्धि के लिए जैविक खाद का इस्तेमाल काफी फायदेमंद माना जाता है. 

कब तैयार होता है फल?

चीकू के पौधे में फूल आने से करीब 6 से 7 महीने बाद फल पकने लगते हैं. जब फल हरे रंग से बदलकर भूरे रंग में होने लगते हैं, तब उनकी तुड़ाई की जा सकती है. चीकू का पेड़ साल भर उत्पादन देता है, लेकिन नवंबर-दिसंबर के दौरान मुख्य फसल तैयार होती है.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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