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अमरूद के पेड़ पर कीड़े लगने से पहले ही दिख जाते हैं ये संकेत, ऐसे बचाएं पैदावार

Guava Farming Tips: अमरूद की अच्छी पैदावार के लिए सिर्फ देखभाल ही बल्कि समय रहते इन संकेतों को समझना भी जरूरी है. जानिए किन बातों पर नजर रखना फायदेमंद रहेगा.

Guava Farming Tips: घर के आंगन में या बाग में लगा अमरूद का पेड़ जब फलों से लद जाता है. तो देखकर दिल खुश हो जाता है. लेकिन कई बार मीठे-मीठे अमरूदों के भीतर कीड़े अपना घर बना लेते हैं. अक्सर लोगों को पता लगता है जब फल सड़ने लगते हैं. लेकिन आपको बता दें कीड़े अचानक हमला नहीं करते. वह आने से पहले पेड़ पर कई तरह के  शुरुआती लक्षण छोड़ते हैं. 

अगर आप थोड़े से सतर्क बन जाएं और इन शुरुआती बदलावों को पकड़ लें तो अपनी पूरी पैदावार को खराब होने से बचा सकते हैं. अमरूद के पेड़ की सही देखभाल के लिए बस आपको अपनी नजर थोड़ी सी पैनी रखनी होगी. जिससे कीड़ों के हमले से पहले ही आप उनका रास्ता रोक पाए. जान लीजिए जरूरी बातें.

पेड़ के लक्षण न करें नजरअंदाज

अमरूद के पेड़ पर कीड़ों का हमला होने से पहले पत्तियां और टहनियां खराब होने लगती हैं. अगर आपको पत्तियों पर छोटे-छोटे छेद, सफेद चिपचिपा पाउडर, या पत्तियां बेवजह मुड़ती हुई दिखें. तो समझ जाइए कि खतरा बिल्कुल पास है. कई बार फलों पर छोटे-छोटे काले या भूरे धब्बे दिखने लगते हैं. 

जो इस बात का संकेत हैं कि मक्खियों ने वहां अपने अंडे दे दिए हैं. पेड़ के आसपास अचानक चींटियों का आना-जाना बढ़ जाना भी इस बात का सबूत है कि वहां रस चूसने वाले बारीक कीड़े पनप रहे हैं. इन छोटे-छोटे बदलावों पर नजर रखकर आप बड़ी मुसीबत को शुरू होने से पहले ही टाल सकते हैं.

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ऐसे करें अपने अमरूद के पेड़ का बचाव

जब आपको यह शुरुआती लक्षण दिख जाएं तो तुरंत कदम उठाएं. सबसे पहला और देसी इलाज है कि आप 15-20 दिनों में एक बार नीम के तेल का पानी में घोल बनाकर पूरे पेड़ पर अच्छे से छिड़काव करें. यह सुरक्षा कवच का काम करता है. पेड़ के नीचे गिरे हुए सड़े-गले फलों और सूखी पत्तियों को तुरंत हटा दें.

क्योंकि यह कीड़ों के पनपने की सबसे बड़ी वजह बनते हैं. फलों को मक्खियों से बचाने के लिए आप उन पर छोटी-छोटी थैलियां चढ़ा सकते हैं या बाग में खास जाल लगा सकते हैं. इन नए और आसान तरीकों को अपनाकर आपके पेड़ के अमरूद पूरी तरह रख सकेंगे.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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