'बच्ची जवान होती है तो मां-बाप के सिर पर बोझ हो जाता है,' रेप और शादी वाले विवादित बयान के बाद बोले साजिद रशीदी
Maulana Shajid Rashidi: साजिद रशीदी का कहना है कि इस्लाम खुद कहता है कि लड़की के बालिग होने पर उसकी शादी कर देनी चाहिए. झारखंड, असम, बिहार, त्रिपुरा, एमपी और राजस्थान में आज भी बाल विवाह होता है.

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन (AIIA) के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने बच्चियों की देर से हो रही शादी को रेप से जोड़ा और बेहद विवादित बयान दिया, जिसके बाद से सियासत तेज हो गई है. अपने बयान के बाद से लगातार आलोचनाओं का सामना कर रहे साजिद रशीदी ने अपनी सफाई में फिर एक बयान दिया जिसके जरिए वो अपने पुराने विवादित बयान पर कायम रहे. उन्होंने कहा, "मेरा बस यही कहना है कि किसी भी धर्म में अगर अच्छी बात है तो उसे अपनाने में क्या बुराई है?"
मौलाना साजिद रशीदी का कहना है, "मैंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि मौजूदा हालात में ऐसे कानून लाए जा रहे हैं जिनसे एक महिला दूसरी महिला से या एक पुरुष दूसरे पुरुष से शादी कर रहे हैं. जहां एक शादीशुदा महिला बिना किसी कानूनी कार्रवाई के किसी दूसरे पुरुष के साथ रह रही है. ऐसे कानूनों वाले देश में अगर कोई रेप या किसी बुरी वारदात के डर से लड़की की जल्दी शादी करने का सुझाव देता है, तो यह पक्का एक राजनीतिक मुद्दा बन जाएगा. लोग इसका गलत मतलब निकालेंगे. ये लोग कौन हैं?"
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'कम पढ़ी-लिखी बेटियों की शादी कराई जाती है, इस्लाम भी यही सलाह देता है'
साजिद रशीदी का कहना है कि उनके बयान को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है. ये वही लोग हैं जो कानून बनाते हैं, लेकिन उस कानून को तोड़ने की क्षमता भी रखते हैं. ये लोग सामाजिक सुधार नहीं देखना चाहते. रशीदी ने कहा, "मैंने सामाजिक सुधार के हित में बात की. इस्लाम खुद कहता है कि लड़की के बालिग होने पर उसकी शादी कर देनी चाहिए. मैं 6 या 7 राज्यों के नाम ले सकता हूं जैसे झारखंड, असम, बिहार, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश और राजस्थान जहां आज भी बाल विवाह होता है. माता-पिता अक्सर कम उम्र में ही बिना पढ़ी-लिखी बेटियों की शादी कर देते हैं. समाज में यह सब हो रहा है. इस्लाम भी यही सलाह देता है."
#WATCH दिल्ली: ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने अपने बयान 'लड़कियों की देर से शादी रेप का कारण बनती है' पर कहा, "मैंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि मौजूदा हालात ऐसे हैं जहाँ ऐसे कानून लाए जा सकते हैं जिनसे एक महिला दूसरी महिला से या एक पुरुष दूसरे पुरुष से शादी… pic.twitter.com/T4e3pTEkab
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 10, 2026
'18 से कम उम्र वाली लड़कियों की शादी कराने को नहीं कहा'
मौलान ने कहा, "इस्लाम यही सलाह देता है कि लड़की के बालिग होने पर उसकी शादी कर देनी चाहिए. मैंने ऐसा क्या गलत कह दिया जिससे इतना बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया. यह दावा किया जा रहा है कि रशीदी साहब ने 18 साल से कम उम्र की लड़कियों की शादी की वकालत की? मैंने ऐसा कभी नहीं कहा."
'जवाब बच्ची मां-बार के सिर पर बोझ'
साजिद रशीदी यहीं नहीं रुके. उन्होंने आगे कहा, "बच्ची जवान हो जाती है तो मां-बार के सिर पर एक बोझ हो जाता है कि किसी तरह से इसकी शदी हो जाए, इसके साथ कोई अनहोनी न हो. इस बोझ को केवल मां-बाप ही समझ सकते हैं."
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