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जगह कम है तो छत पर उगाएं सब्जियां, बोरे से बनाएं ग्रो बैग

छत पर बिना कोई भारी खर्च किए ताजी हरी सब्जियां उगाने का यह तरीका नहीं जानते होंगे आप. कम जगह में बंपर पैदावार के लिए महंगे गमलों की जगह घर के सामान से जादुई ग्रो बैग कैसे बनाएं. जान लें प्रोसेस.

आजकल शहरों में घर छोटे हो रहे हैं और जमीन की कम होती जा रही है. पहले जहां लोगों के घरों में बगीचे हुआ करते थे. अब एक पौधा लगाने लायक भी जगह नहीं होती. इसके चलते किचन गार्डन जैसी चीजें अब ज्यादा लोग नहीं बना पाते हैं. लेकिन अगर आपके घर में थोड़ी सी खुली छत है. तो फिर आप वहां किचन गार्डनिंग कर सकते हैं और तरह-तरह की सब्जियां उगा सकते हैं.

बजार में मिलने वाली रासायनिक सब्जियों के डर से अगर आप भी परेशान हैं. तो रूफटॉप गार्डनिंग आपके लिए सबसे बढ़िया ऑप्शन है. इसमें अच्छी बात यह है कि इसके लिए आपको बाजार से महंगे गमले या प्लास्टिक के भारी कंटेनर खरीदने की कोई जरूरत नहीं पड़ती. 

घर में पड़े पुराने अनाज या दाल के बोरों का इस्तेमाल करके आप बेहद सस्ते और टिकाऊ ग्रो बैग तैयार कर सकते हैं. यह बोरे वजन में काफी हल्के होते हैं जिससे आपकी छत पर किसी तरह का भारी लोड नहीं पड़ता. अपनी रोजमर्रा की जरूरत के हिसाब से आप छत पर हरी-भरी, ताजी और पूरी तरह ऑर्गेनिक सब्जियां बहुत आराम से उगा सकते हैं.

घर के बेकार बोरों से तैयार करें ग्रो बैग

बाजार में मिलने वाले फैंसी ग्रो बैग काफी महंगे आते हैं. लेकिन घर पर रखे चावल, आटे या सीमेंट वाले प्लास्टिक के मजबूत बोरों से इन्हें फ्री में बनाया जा सकता है. सबसे पहले इन बोरों को अच्छी तरह धोकर धूप में सुखा लें जिससे कोई गंदगी न रहे. इसके बाद अपनी जरूरत और छत की जगह के हिसाब से बोरे को ऊपर से आधा मोड़ लें या काटकर छोटा कर लें. 

ग्रो बैग बनाते वक्त सबसे जरूरी काम है ड्रेनेज का सही इंतजाम करना. बोरे के निचले हिस्से में कैंची की मदद से 4 से 5 छोटे छेद जरूर बनाएं जिससे सिंचाई का फालतू पानी आसानी से बाहर निकल सके. अगर पानी रुकेगा तो पौधे की जड़ें सड़ जाएंगी. बोरे की बनावट ऐसी होती है कि इसमें हवा का आवागमन बहुत अच्छा रहता है. जिससे पौधों की जड़ों को सांस लेने में पूरी मदद मिलती है और उनकी ग्रोथ तेजी से होती है.


जगह कम है तो छत पर उगाएं सब्जियां, बोरे से बनाएं ग्रो बैग

सही मिट्टी और न्यूट्रिशन तैयार करने का तरीका

छत पर गार्डनिंग करते समय मिट्टी का हल्का और ताकतवर होना सबसे ज्यादा मायने रखता है. सिर्फ खेत की भारी मिट्टी भरने से छत का वजन बढ़ जाता है और जड़ों को फैलने में दिक्कत होती है. इसलिए 40 फीसदी सामान्य मिट्टी के साथ 30 फीसदी कोकोपीट या फिर सूखी पत्तियां और 30 फीसदी अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं. थोड़ा सा नीम खली का पाउडर भी इसमें मिला दें. जिससे मिट्टी में दीमक या किसी कीड़े का खतरा न रहे. 

यह मिक्सचर इतना हल्का होता है कि पौधे की जड़ें इसमें बहुत तेजी से फैलती हैं और पानी भी ज्यादा देर तक रुकता नहीं. बोरे में यह पॉटिंग मिक्स भरते वक्त ऊपर से कम से कम दो से तीन इंच की जगह खाली छोड़ें जिससे बाद में पानी देने और खाद की गुड़ाई करने में कोई परेशानी न आए. यह मिट्टी पौधों को लंबा पोषण देती है.

यह भी पढ़ें: खेत में पानी जमा न होने दें गन्ना किसान, फसल में बढ़ रहा बीमारी का खतरा

किस सब्जी के लिए कैसा बोरा चुनें?

ग्रो बैग में हर सब्जी अपनी जरूरत के हिसाब से फलती-फूलती है. इसलिए सही साइज चुनना बहुत जरूरी है. अगर आप धनिया, पालक, मेथी या पुदीना जैसी पत्तेदार सब्जियां उगा रहे हैं. तो कम गहराई वाला लेकिन चौड़ा बोरा सबसे सही रहता है. वहीं टमाटर, बैंगन, हरी मिर्च और शिमला मिर्च जैसे पौधों के लिए कम से कम 12 से 15 इंच गहरा बोरा चाहिए जिससे जड़ें नीचे तक जा सकें. 


जगह कम है तो छत पर उगाएं सब्जियां, बोरे से बनाएं ग्रो बैग

अगर आपको लौकी, तोरी या खीरे जैसी बेल वाली सब्जियां लगानी हैं. तो थोड़ा बड़ा और मजबूत बोरा चुनें और बेल को चढ़ाने के लिए रस्सियों का सहारा दें. छत पर पौधों को दिन में 5 से 6 घंटे की अच्छी धूप मिलनी जरूरी है. गर्मियों में सुबह-शाम हल्का पानी दें और सर्दियों में मिट्टी सूखने पर ही सिंचाई करें. घर की छत पर उगी बिना केमिकल वाली यह सब्जियां आपके पूरे परिवार को लाजवाब स्वाद तो देंगी साथ ही सेहत सही रखेंगी. 

यह भी पढ़ें: किसानों के खाते में आएंगे 10 हजार! किसान सम्मान निधि पर आया बड़ा अपडेट

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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