क्या है VL सीरीज, कैसे गेहूं की फसल को मिलेगा इससे बढ़ावा?
VL सीरीज गेहूं की खास किस्मों का समूह है, जिसे ICAR के संस्थान VPKAS, अल्मोड़ा ने बनाया है. जानिए यह क्या है, बीमारी और कम पानी में कैसे काम आती है और किसान क्या सावधानी रखें.

पहाड़ी इलाकों में गेहूं उगाना आसान नहीं होता. यहां खेत छोटे होते हैं, पानी कम मिलता है और रतुआ जैसी बीमारी फसल खराब कर देती है. इसी दिक्कत को दूर करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ICAR के वैज्ञानिकों ने "विवेकानंद लैबोरेटरी VL सीरीज की किस्में बनाई हैं. इन्हें VL गेहूं भी कहते हैं. आइए आसान भाषा में जानें कि यह सीरीज क्या है, इसमें क्या खास है और किसानों को क्या फायदा हो सकता है. यह जानकारी पहाड़ और मैदान के किसानों के काम की है.
क्या है VL सीरीज
VL सीरीज को ICAR के विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान VPKAS, अल्मोड़ा ने तैयार किया है. गेहूं की इसकी आठ किस्में जारी हो चुकी हैं. ये हैं VL गेहूं 953, 967, 3004, 2014, 2015, 2028, 3010 और 2041. यह सीरीज मुख्य रूप से पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों की जलवायु, कम पानी, जैविक खेती और विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है. VL 953 को पहाड़ों के साथ मैदानी इलाकों में भी उपयोगी है.
बीमारी से बचाव और पैदावार
गेहूं में पीला और भूरा रतुआ बड़ी परेशानी है. यह बीमारी पत्तियों पर पीले या भूरे धब्बे बना देती है जिससे दाना कमजोर हो जाता है. VL गेहूं 967 और VL गेहूं 2028, दोनों इस बीमारी से बचाव में काम करते हैं . VL 967 अप्रैल 2019 में जारी हुई. इसकी औसत पैदावार करीब 19.86 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. अच्छे हालात में यह 35.44 क्विंटल तक जाती है. देर से बुवाई में भी यह ठीक चलती है और इसकी रोटी की क्वालिटी अच्छी मानी जाती है. VL 2028 अगस्त 2022 में जारी हुई. इसकी औसत पैदावार करीब 22.7 क्विंटल और अच्छे हालात में 30.7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है.
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किसानों को फायदा और जरूरी सावधानी
संस्थान ने 2014 से 2019 के बीच 252 किसानों के खेतों में VL गेहूं 907 और 953 को आजमाया. नतीजे में दोनों किस्में स्थानीय किस्मों से ज्यादा मुनाफे वाली रहीं. VL 953 में हर 1 रुपये के खर्च पर करीब 2.8 से 2.9 रुपये की कमाई हुई. फिर भी किस्म चुनने से पहले अपने इलाके का मौसम और बुवाई का समय जरूर देखें. बीज किसी अधिकृत दुकान या सरकारी एजेंसी से ही लें. जरूरत हो तो पास के कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लें. VL सीरीज खास हालात को ध्यान में रखकर बनी है, इसलिए इसे हर खेत के लिए एक जैसा न मानें.
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