बाजार में नहीं मिल अच्छा धनिया, तो ऐसे घर पर ही उगा लें
बाजार का बेस्वाद, सड़ा-गला और केमिकल वाला धनिया खाकर थक चुके हैं. तो अब बिना एक रुपया खर्च किए घर के गमले में उगाएं बाजार से 10 गुना ज्यादा खुशबूदार हरा धनिया. जान लें इसका पूरा तरीका.

दाल हो, चटनी हो या कोई सब्जी जब तक ऊपर से कटा हुआ हरा धनिया न डाला जाए तब तक खाने का स्वाद और रंगत दोनों फीके नजर आते हैं. लेकिन आजकल सब्जी मंडी से जो धनिया हम खरीदकर लाते हैं. उसमें न तो पहले जैसी खुशबू मिलती है और न ही वह असली देसी स्वाद देता है. ऊपर से केमिकल और गंदे नाले के पानी से उगाई जाने वाली सब्जियां सेहत और बिगाड़ देती है. फ्रिज में रखने के दो दिन बाद ही यह धनिया काला पड़कर गलने लगता है.
इसलिए अगर आप भी बाजार के खराब और बेस्वाद धनिए से थक गए हैं. तो सबसे आसान रास्ता यही है कि इसे अपने घर की छत पर ही उगा लिया जाए. घर पर गमले में हरा धनिया उगाना बहुत ही आसान है. इसके लिए आपको बस कुछ घरेलू नुस्खे अपनाने होंगे इससे आप साल भर बिना किसी केमिकल के एकदम बढ़िया, खुशबूदार और ऑर्गैनिक धनिया अपने हाथों से तोड़ सकते हैं.
किचन के खड़े धनिए से उगा सकते हैं
घर पर धनिया उगाने के लिए आपको बाजार से कोई महंगे बीज खरीदने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. आपके किचन के मसाले के डिब्बे में रखा साबुत खड़ा धनिया ही इस काम के लिए इस्तेमाल है. बस बीज बोने से पहले एक छोटी सी ट्रिक आजमाना जरूरी है. खड़े धनिए के दानों को किसी सूती कपड़े या फर्श पर रखकर बेलन या कटोरी के पिछले हिस्से से हल्के हाथ से दबाएं.
ध्यान रहे कि बीजों को पीसना नहीं है सिर्फ इतना दबाना है कि हर बीज दो टुकड़ों में आसानी से बंट जाए. ऐसा करने से बीज की बाहरी सख्त परत टूट जाती है और अंकुरण तेजी से होता है. इसके बाद इन दो टुकड़ों में बंटे बीजों को रात भर या कम से कम 5 से 6 घंटे के लिए गुनगुने पानी में भिगोकर छोड़ दें. सुबह पानी छानकर इन बीजों को किसी कॉटन के कपड़े में लपेटकर कुछ घंटों के लिए रख दें, जिससे रोपाई के वक्त इनमें नमी बनी रहे.
सही मिट्टी और गमले का चुनाव
धनिया उगाने के लिए किसी बहुत गहरा गमले नहीं चाहिए होता. क्योंकि इसकी जड़ें ज्यादा गहराई तक नहीं जाती हैं. इसके लिए चौड़े मुंह वाला 6 से 8 इंच गहरा चौड़ा प्लास्टिक का गमला एकदम सही रहता है. गमले के नीचे पानी निकलने के लिए ड्रेनेज होल यानी छेद जरूर होना चाहिए. जिससे पानी रुककर जड़ों को सड़ा न सके.अब बात करते हैं मिट्टी के मिश्रण की.
तो धनिया उगाने के लिए 50 फीसदी सामान्य बगीचे की भुरभुरी मिट्टी, 30 फीसदी सड़ी हुई पुरानी गोबर की खाद या और 20 फीसदी बारीक रेत मिला लें. यह मिट्टी एकदम हल्की और हवादार बनती है जिसमें जड़ें तेजी से फैलती हैं. गमले में मिट्टी भरकर ऊपर से तैयार किए गए बीजों को बिखेर दें. बीजों के ऊपर मिट्टी की बहुत पतली परत, यानी आधा इंच से भी कम छिड़क दें जिससे बीज ढक जाएं लेकिन दब न पाएं.
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कुछ ही हफ्तों में हरा धनिया तैयार
बीज बोने के बाद पानी डालने में अक्सर लोग गलती कर बैठते हैं. मग से सीधे पानी उड़ेलने की बजाय हमेशा स्प्रे बोतल से छिड़काव करके पानी दें. जिससे बीज अपनी जगह से हिलें नहीं. मिट्टी में सिर्फ हल्की नमी बनाकर रखनी है, उसे कीचड़ बिल्कुल न बनाएं. शुरुआत के दो-तीन दिन गमले को किसी हल्की छांव वाली जगह पर रखें.
जैसे ही छोटे-छोटे हरे अंकुर फूटने लगें गमले को ऐसी जगह शिफ्ट कर दें जहां दिन की कम से कम 4 से 5 घंटे की अच्छी धूप आती हो. धनिया को ताजी हवा और धूप बेहद पसंद होती है. हफ्ते में एक बार पौधों पर हल्के पानी का स्प्रे करते रहें.

लगभग 20 से 25 दिनों में आपके गमले में घनी हरी पत्तियां लहलहाने लगेंगी. जब भी चटनी या सब्जी के लिए धनिए की जरूरत हो, तो पौधे को जड़ से कभी न उखाड़ें. कैंची की मदद से ऊपर की टहनियों को काटें. ऐसा करने से नीचे से नई पत्तियां लगातार फूटती रहेंगी और धनिया मिलता रहेगा.
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