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खरीफ फसल की कटाई से पहले किसान जरूर कर लें यह काम

खरीफ फसल पककर तैयार है लेकिन कटाई से पहले की एक छोटी सी चूक आपकी चार महीने की मेहनत पर पानी फेर सकती है. दाना बिखरने और सड़ने से बचाने के लिए क्या है एक्सपर्ट्स की जरूरी सलाह? जान लीजिए

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  • फसलों की क्वालिटी और पैदावार के लिए कटाई का सही समय जानें.
  • कटाई के पहले मौसम का हाल चेक कर लें और मशीनें दुरुस्त रखें, थ्रेशर जाली सही हो.
  • कटाई बाद अनाज को सुखाकर, नमी जांचकर सही तरीके से स्टोरेज करें.

महीनों की मेहनत के बाद जब खेत में खड़ी खरीफ फसल पककर सुनहरी होने लगती है. तो सभी किसानों का चेहरा खिल जाता है. मक्का, मूंगफली, सोयाबीन, उड़द, मूंग और बाजरा जैसी फसलें अब अपने आखिरी मुकाम पर हैं और खेतों में कटाई का दौर शुरू होने वाला है. लेकिन अक्सर देखने में आता है कि किसान आखिरी वक्त पर थोड़ी सी लापरवाही कर देते हैं. जिसका सीधा असर पैदावार और अनाज की क्वालिटी पर पड़ता है.

जल्दबाजी में अनदेखी के चलते दाने खेत में ही बिखर जाते हैं और इसके अलावा नमी ज्यादा होने से उनमें फफूंद लग जाती है. कई बार मौसम का मिजाज अचानक बदल जाता है और बेमौसम बारिश पूरी फसल को तबाह कर देती है. अगर आप चाहते हैं कि आपकी खून-पसीने की मेहनत पूरी तरह सुरक्षित घर पहुंचे और मंडी में उसका बढ़िया ऊंचा भाव मिले तो कटाई से ठीक पहले कुछ जरूरी सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है.

फसल पकने के बाद कटाई कब?

जिंदगी में हर काम में टाइमिंग बहुत जरूरी होती है. खेत में फसल की कटाई के मामले में टाइमिंग ही बड़ा रोल अदा करती है. फसल को न तो बहुत कच्चा काटना चाहिए और न ही उसे जरूरत से ज्यादा खेत में सूखने देना चाहिए. अगर आप कच्ची फसल काट लेंगे तो दानों में नमी ज्यादा रहेगी, दाने पिचक जाएंगे और भंडारण के दौरान उनमें कीड़े या फफूंद लगने का खतरा बढ़ जाएगा. वहीं अगर फसल खेत में बहुत ज्यादा सूख गई तो कटाई और गहाई के दौरान दाने छिटककर खेत में ही गिर जाएंगे.

दलहनी फसलों जैसे मूंग और उड़द में जब फलियों का रंग काला या गहरा भूरा पड़ने लगे और 75 से 80 फीसदी फलियां सूख जाएं तब कटाई का सही वक्त होता है. मक्का में जब भुट्टे के ऊपर का छिलका पूरी तरह सूखकर पीला-भूरा हो जाए और दाने कड़े हो जाएं तभी तुड़ाई करनी चाहिए. सोयाबीन में जब पत्तियां पीली पड़कर झड़ने लगें और फलियां सूखकर खड़खड़ाने लगें तो समझ लें कि खेत कटाई के लिए पूरी तरह तैयार है.


खरीफ फसल की कटाई से पहले किसान जरूर कर लें यह काम

आखिरी वक्त की परेशानी से ऐसे बचें

आजकल मौसम का कोई पक्का भरोसा नहीं रहता. कभी भी बादल घिर आते हैं और तेज आंधी या बारिश शुरू हो जाती है. इसलिए कटाई की शुरुआत करने से पहले मौसम विभाग का तीन से चार दिन का पूर्वानुमान अपने स्मार्टफोन पर जरूर चेक कर लें. अगर बारिश या तेज हवा की चेतावनी है. तो कटाई दो दिन आगे टालना ही समझदारी है. गीली फसल पर कंबाइन या रीपर चलाने से दाने मिट्टी में सन जाते हैं और भूसा भी सड़ने लगता है.

इसके अलावा अपनी मशीनरी और औजारों की जांच पहले ही निपटा लें. चाहे आप दरांती से हाथ से कटाई कर रहे हों या रीपर और थ्रेशर जैसी मशीनों का इस्तेमाल करने वाले हों उनकी धार और बाकी के सब पार्ट्स पहले से दुरुस्त रखें. थ्रेशर की जाली और आरपीएम को फसल के हिसाब से पहले ही सेट कर लें. गलत जाली होने से दाने कटने लगते हैं. जिससे मंडी में फसल का सीधा-सीधा दाम गिर जाता है.


खरीफ फसल की कटाई से पहले किसान जरूर कर लें यह काम

यह भी पढ़ें: पावर वीडर लें या ट्रैक्टर, छोटी जमीन पर खेती में क्या फायदेमंद?

सुखाने और स्टोरेज सही तरीका क्या?

खेत से फसल कटने के बाद काम खत्म नहीं होता. बल्कि असली चुनौती उसे सुरक्षित रखने की होती है. फसल कटाई के तुरंत बाद अगर दानों को ढेर बनाकर रख दिया जाए. तो अंदर पैदा हुई गर्मी और उमस से अनाज काला पड़ जाता है. इसलिए फसल को खेत में या पक्के खलिहान में पतली परत बनाकर धूप में अच्छी तरह सुखाना चाहिए.अनाज को बोरियों में भरने से पहले यह पक्का कर लें कि उसमें नमी का लेवल 10 से 12 परसेंट से ज्यादा न हो.

इसका देसी तरीका यह है कि दाने को दांतों से दबाकर देखें. अगर वह कड़क आवाज के साथ टूटता है तो समझ लीजिए कि नमी खत्म हो चुकी है. स्टोरेज के लिए इस्तेमाल होने वाले कमरों और बोरियों को पहले साफ और धूप में सुखा लें. नीम की सूखी पत्तियां या दवाइयों का सही इस्तेमाल करें जिससे महीनों तक आपका अनाज सुरक्षित रहे.

यह भी पढ़ें: फार्मर आईडी से कैसे बुक होगी खाद? जान लीजिए पूरा प्रोसेस

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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