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छोटे और सीमांत किसानों के लिए कमाल की हैं ये स्कीम, सीधे खाते में आता है पैसा

किसानों के लिए सरकार की कई योजनाएं चल रही हैं, जिनमें सीधे आर्थिक मदद, पेंशन और खेती के लिए सस्ता कर्ज जैसी सुविधाएं मिलती हैं. जानें कौन सी योजना किस काम आती है.

खेती में किसानों का सबसे बड़ा खर्च बीज, खाद, सिंचाई और फसल की देखभाल पर होता है. छोटे किसानों के लिए यह खर्च संभालना कई बार मुश्किल हो जाता है. ऐसे में सरकार की अलग-अलग योजनाएं किसानों को आर्थिक मदद और दूसरी सुविधाएं देती हैं. इनमें कुछ योजनाओं का पैसा सीधे किसान के बैंक खाते में भेजा जाता है, जबकि कुछ योजनाओं के जरिए सस्ता कर्ज, फसल बीमा या बुढ़ापे के लिए पेंशन की सुविधा मिलती है. PM-Kisan Samman Nidhi के तहत पात्र किसान परिवारों को सालाना 6,000 रुपये तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में दिए जाते हैं.

 पीएम किसान सम्मान निधि से मिलते हैं 6 हजार रुपये

PM-Kisan Samman Nidhi किसानों के लिए सबसे चर्चित योजनाओं में से एक है. इसके तहत पात्र जमीन रखने वाले किसान परिवारों को साल में कुल 6,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है. यह रकम तीन बराबर किस्तों में यानी 2,000-2,000 रुपये करके सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. योजना का पैसा DBT यानी Direct Benefit Transfer के जरिए पहुंचता है. PM-Kisan की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक e-KYC जरूरी है और किसान अपना पेमेंट स्टेटस भी ऑनलाइन देख सकते हैं.

 किसान मानधन योजना से मिलेगी पेंशन

प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PM-KMY) छोटे और सीमांत किसानों के लिए बुढ़ापे में आर्थिक सहारा देने वाली योजना है. इसके लिए किसान की उम्र 18 से 40 साल के बीच होनी चाहिए और उसके पास खेती योग्य जमीन 2 हेक्टेयर तक होनी चाहिए. इसमें किसान उम्र के हिसाब से तय राशि जमा करता है और केंद्र सरकार भी उतनी ही राशि का योगदान करती है. 60 साल की उम्र पूरी होने के बाद पात्र किसान को 3,000 रुपये महीने की पेंशन मिलती है. PM-Kisan लाभार्थी चाहें तो अपनी किस्त के लिए इस्तेमाल होने वाले बैंक खाते से मानधन का योगदान देने की सुविधा भी ले सकते हैं.

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 किसान क्रेडिट कार्ड से खेती के लिए कर्ज

किसानों को खेती के लिए समय पर पैसे की जरूरत होती है. ऐसे में किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC काम आता है. इसके जरिए किसान खेती, फसल के बाद के खर्च, फसल की बिक्री से जुड़े खर्च और खेती से जुड़े कुछ दूसरे कामों के लिए बैंक से कर्ज ले सकते हैं. सरकारी my Scheme पोर्टल के मुताबिक KCC में ब्याज सहायता और समय पर कर्ज चुकाने पर ईनाम दिया जाता है, जिससे पात्र किसानों के लिए कर्ज की लागत कम हो सकती है.

 फसल खराब होने पर बीमा योजना का सहारा

खेती में मौसम का बहुत बड़ा असर होता है. बारिश, सूखा, ओलावृष्टि, कीट या बीमारी की वजह से फसल खराब होने पर किसान को बड़ा नुकसान हो सकता है. ऐसे समय में फसल बीमा योजनाएं आर्थिक नुकसान कम करने में मदद करती हैं. सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक फसल बीमा में प्राकृतिक आपदा, कीट और बीमारी जैसे जोखिमों के लिए सुरक्षा दी जा सकती है और पात्र मामले में क्लेम की रकम किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है. हालांकि बीमा का कवरेज, प्रीमियम और क्लेम के नियम फसल और क्षेत्र के हिसाब से लागू होते हैं.

 योजना का पैसा पाने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

सरकारी योजना का फायदा लेने के लिए किसान को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि वह उस योजना की शर्तों को पूरा करता है या नहीं. PM-Kisan के मामले में e-KYC, बैंक खाते और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड सही होना जरूरी है. सरकारी वेबसाइट पर किसान अपना स्टेटस और पेमेंट की जानकारी भी देख सकता है. वहीं KCC या दूसरी योजनाओं के लिए अलग पात्रता और दस्तावेज हो सकते हैं.

यह भी पढ़ें : पीएम मानधन योजना में कैसे करते हैं अप्लाई, देखें लें पूरा प्रोसेस

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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